वीडियो : यहाँ माता की योनि की पूजा होती है
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
असम - क्या आप जानते हैं ? यहां माता की योनि की पूजा होती है । पुराणों में कहा गया है , पिता दक्ष के यज्ञ में पति भगवान शिव का अपमान होता देख सती हवनकुंड में कूद पड़ी थी । जिसके बाद भगवान शिव क्रोधित हो गए और माता सती के मृत शरीर को कंधे पर रखकर काफी वर्षों तक घूमते रहे । भगवान शिव के रौद्र रूप को कम करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने चक्र से माता सती के 51 टुकड़े कर दिए । माता सती के अंग 51 स्थानों पर जहाँ - जहाँ गिरे , वहाँ - वहाँ शक्तिपीठ बन गए । और वो शक्तिपीठ एक देवी के रूप मे परिवर्तित हो गए और भक्तों के परम तीर्थ माने गए । इन्हीं पीठों में से एक कामरूप असम में स्थापित हुआ , जो आज गोहाटी के सामने नीलांचल पर्वत नामक पहाड़ी पर स्थित है । इस शक्तिपीठ से जो देवी प्रकट हुई उन्हें कामाख्या देवी के नाम से जाना जाता है । कहा जाता है असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या देवी मंदिर में देवी सती की योनी गिरी थी और यहां माता सती की योनि की पूजा होती है । यहाँ साल के 3 दिन पुरुषों का प्रवेश करना वर्जित है । माना जाता है इन दिनों माता सती रजस्वला रहती हैं । इन 3 दिनों में पुरुष मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते हैं । कहते हैं कि इन 3 दिनों में माता के दरबार में सफेद कपड़ा रखा जाता है , जो 3 दिनों में लाल रंग का हो जाता है । इस कपड़े को अम्बुवाची वस्त्र कहते हैं । इसे ही प्रसाद के रूप में भक्तों को दिया जाता है । वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर टच करें -
https://youtu.be/abxqCDQwLkM?si=C6GFrlIPJIS-LPKa