रोचक : उत्तराखंड के इस गांव में नहीं होती है हनुमान जी की पूजा
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चमोली ( Chamoli ) - आज आप चमोली जिले केई एक ऐसी रोचक जानकारी पढ़ेंगे , जिसे पढ़कर आप चौंक जाएंगे । चमोली जिले के ज्योतिर्मठ विकास खण्ड अन्तर्गत द्रोणागिरी पर्वत की तलहटी पर द्रोणागिरी नामक गांव बसा हुआ है । मान्यता है कि भगवान श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध के दौरान मेघनाद के दिव्यास्त्र से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे तब सुसैन वैद्य की सलाह पर हनुमान जी द्रोणागिरी पर्वत पर संजीवनी बूटी लेने के लिए आए थे । द्रोणागिरी गांव के लोग इस पर्वत को देवता मानते हैं । जब हनुमान जी को संजीवनी बूटी नहीं मिली तो हनुमान जी इस पर्वत का एक हिस्सा श्रीलंका के लिए उठा ले गए थे लेकिन फिर वापस नहीं लाए । इस कारण द्रोणागिरी गांव के लोग आज भी हनुमानजी की पूजा नहीं करते हैं । आज भी द्रोणागिरी पर्वत का ऊपरी हिस्सा कटा हुआ लगता है इस हिस्से को हम आसानी से देख सकते हैं , और बताया जाता है हनुमान जी द्वारा ले जाया गया आधा पर्वत आज भी श्रीलंका में है जो ठीक कटे हुए हिस्से जैसा ही दिखाई देता है । द्रोणागिरी पर्वत की ऊंचाई 7,066 मीटर है । यहां शीतकाल में भारी बर्फबारी होती है इस वजह गांव के लोग यहां से दूसरी जगह रहने के लिए चले जाते हैं । गर्मी के समय जब यहां का मौसम रहने योग्य होता है तो गांव के लोग वापस यहां रहने के लिए आ जाते हैं । ज्योतिर्मठ से मलारी की तरफ लगभग 50 किलोमीटर आगे बढ़ने पर जुम्मा नाम की एक जगह है । यहीं से द्रोणागिरी गांव के लिए पैदल मार्ग शुरू हो जाता है । संकरी पहाड़ी पगडंडियों वाला तकरीबन दस किलोमीटर का यह पैदल रास्ता बहुत कठिन है । ट्रैकिंग पसंद करने वाले काफी लोग यहां पहुंचते हैं ।
खबर से जुड़ी अन्य तस्वीरें: