जानिए , कहां शुरू हुई थी भगवान शिव की लिंग रूप में पूजा
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
अल्मोड़ा ( Almora ) - देवभूमि उत्तराखंड के कण - कण में शंकर का वास है । लेकिन कुछ चुनिंदा स्थान ऐसे हैं जिन्हें विशेष माना गया है । भारत सहित तमाम अन्य देशों में भगवान शिव की लिंग रूप में पूजा होता है , लेकिन क्या आप जानते हैं कि सर्वप्रथम भगवान शिव की लिंग रूप में पूजा कहां से शुरू हुई । कहा जाता है भगवान शिव की लिंग रूप में पूजा सर्वप्रथम जागेश्वर से हुई । अल्मोड़ा जिले के प्रसिद्ध जागेश्वर मंदिर के पुजारी बताते हैं कि स्कंद पुराण , शिव पुराण और अन्य पुराणों में इस मंदिर का वर्णन है । लिंग पुराण में भी इस मंदिर की नक्काशी , शिलालेख और वास्तुकला का जिक्र है । मान्यता है कि सबसे पहले भगवान शिव की लिंग रूप में पूजा जागेश्वर धाम में हुई थी । यही वजह है कि जागेश्वर धाम को ज्योर्तिलिंग भी कहा जाता है । इसके बाद ही भगवान शिव की लिंग रूप में पूजा शुरू हुई थी । यहां पर भक्त रुद्राभिषेक के साथ पितृ इत्यादि की पूजा पाठ भी करा सकते हैं ।पौराणिक और ऐतिहासिक है अल्मोड़ा का जागेश्वर मंदिर -
अल्मोड़ा को देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक नगरी के रूप में भी जाना जाता है । धार्मिक लिहाज से महत्वपूर्ण अल्मोड़ा जिले में कई पौराणिक और एतिहासिक मंदिर हैं । इसमें पौराणिक जागेश्वर धाम विश्व में प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है । मंदिरों के समूह और ज्योतिर्लिंगों के लिए जागेश्वर का नाम इतिहास में दर्ज है । जागेश्वर धाम भगवान शिव के मंदिर ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है । यह मंदिर लगभग 2500 वर्ष पुराना बताया जाता है । शिव पुराण , लिंग पुराण और स्कंद पुराण आदि पौराणिक कथाओं में भी मंदिर का उल्लेख है । मंदिर में शिलालेख , नक्काशी और मूर्तियों का एक खजाना है । जटागंगा नदी की घाटी में स्थित मंदिर में वास्तुकला और इतिहास के लिहाज से भी कई पौराणिक सामग्री हैं ।यहां मंदिर के अंदर मंदिर -
मान्यता के अनुसार यहां भगवान शिव और सप्तऋषियों ने अपनी तपस्या की शुरुआत की थी । इस जगह से ही शिव लिंग को पूजा जाने लगा था । इस मंदिर की एक खास बात यह भी है कि इसे गौर से देखने पर इसकी बनावट बिल्कुल केदारनाथ मंदिर की तरह नजर आती है । यहां तक कि इस मंदिर के अंदर करीब 124 ऐसे छोटे - छोटे मंदिर बने हुए हैं जो जागेश्वर धाम का परिचय देता है ।जानिए , क्या कहते हैं यहां के पुजारी -
जागेश्वर धाम के पुजारी का कहना है पौराणिक और यहां एतिहासिक मंदिर समूह हैं । मंदिर का नाम इतिहास में भी दर्ज है । इस मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना गया है । मान्यता है कि यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की मनाेकामनाएं पूरी होती हैं । हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है । यहां के मंदिरों की नक्काशी प्राचीन भारतीय मंदिरों के अनुरूप है । कहा जाता है यहां पूजा अर्चना करने पर श्रद्धलुओं की मनोकामना पूर्ण होती है । इस महाशिवरात्रि आप भी जाइए जागेश्वर धाम और पूजा अर्चना के साथ मन की शांति व तन की स्फूर्ति भी पाएं ।
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