अंतिम सांस ले रही फसल के लिए , वेंटिलेटर बन गई ये बारिश
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत ( Champawat ) - जिले में हुई बारिश खेतीबाड़ी एवं वातावरण में अमृत घोल गई है । इस बार भी मौसम विभाग की भविष्यवाणी सही साबित हुई है । इस वर्ष मौसम के दगा देने से जल स्रोतों का जलस्तर कम हो गया था । आलू बुवाई के बाद भी अंकुरित नहीं हो रहे थे । सब्जी उत्पादन करने वाले किसान माथा पकड़ कर आसमान की ओर टक - टकी निगाह लगाए हुए थे । मसूर गेहूं आदि रवी की फसल तो काफी बर्बाद हो गई है , ऐसे सामाजिक परिवेश में यह वर्षा लोगों के भविष्य की न केवल आश जगा गई है , बल्कि मौसम की तासीर बदलने से उसमें काफी रंगत भी आ गई है । यह वर्षा बारूद का ढेर बन रहे जंगलों के लिए भी काफी वरदान साबित हुई है ।अंतिम सांस ले रही फसल के लिए ऑक्सीजन बन गई ये बारिश -
जिला कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी हिमांशु जोशी के अनुसार यह वर्षा ऐसे समय में हुई है जब रवी की फसल अंतिम सांस ले रही थी । खेतों की नमी लगभग समाप्त हो रही थी , मौसम शुष्क होने से बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा था । इस वर्षा से खेती को नया जीवन मिला है ।सब्जी उत्पादन के लिए अमृत है ये बारिश -
एडीओ उद्यान आशीष खर्कवाल के अनुसार उद्यान एवं सब्जी उत्पादन के लिए यह वर्षा अमृत के समान हुई है । इस बारिश से , लगाए गए फलदार पौधों के लिए पर्याप्त नमी मिल गई है । ये बारिश आलू की खेती के लिए भी काफी लाभदायक सिद्ध हुई है । बेमौसमी सब्जियों के उत्पादन के लिए यह वर्षा रामबाण साबित हुई है । इससे फलों का भी उत्पादन बढ़ेगा ।बढ़ेगा चारा तो बढ़ेगा दूध -
पशु विशेषज्ञ एवं राजकीय पशु चिकित्सालय के चिकित्सा अधिकारी डॉ जेपी यादव के अनुसार वर्षा से जौ , बरशीम का उत्पादन बढ़ेगा , चारा घास का उत्पादन बढ़ेगा जिससे दूध बढ़ेगा , पशुओं का मौसमी बीमारियों से बचाव होगा । यह बर्षा हर दृष्टि से लाभदायक है ।जलश्रोत होंगे रीचार्ज -
जल संस्थान के सहायक अभियंता पवन बिष्ट के मुताबिक सूखते जा रहे जल श्रोत इस वर्षा से रीचार्ज होंगे और पेयजल संकट से निजात मिलेगी । दिनभर लगातार हुई इस बारिश से जल स्रोतों को संजीवनी मिली है । खेती के लिए पर्याप्त पानी मिलने के कारण पेयजल पर इसका दबाव कम हुआ है । इस वर्ष बर्षा न होने से शीतकाल में ही जल संकट पैदा हो गया था , लेकिन ये बारिश बेहद कारगर सिद्ध हुई है ।