गबन मामले में बड़ी खबर , अब किसान करेंगे आमरण अनशन
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत ( Champawat ) - जिले से बड़ी खबर आ रही है । यहां जिले में किसान परेशान हैं और ऐसा होता देखकर लोग हैरान हैं । आज यहां ऐसी स्थिति बन चुकी है कि अन्न उत्पादन करने वाले अन्नदाता अब अन्नत्याग करने को मजबूर हैं । चम्पावत जिले के पाटी विकासखंड अंतर्गत बहुउद्देश्यीय साधन सहकारी समिति दूबड़ में गबन के आरोप लगे हैं । किसान कहते हैं , समिति सचिव जय राम उनके पैसे डकार गया है । यहां किसान एसआईटी जांच सहित कुल तीन सूत्रीय मांगों को लेकर उत्तराखंड किसान संगठन के बैनर तले उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी नरेंद्र उत्तराखंडी के नेतृत्व में दूबड़ सहकारी समिति में धरने पर बैठे हुए हैं । यहां किसानों ने 19 दिन धरना प्रदर्शन किया , लेकिन शासन / प्रशासन ने किसानों की समस्या को तवज्जो नहीं दी और उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया ।19 दिन धरने के बाद अब आमरण अनशन की बारी -
लगातार 19 दिन अनशन के बाद अब , किसान धरना प्रदर्शन को आमरण अनशन में बदलने जा रहे हैं । किसानों ने उत्तराखंड किसान संगठन के संयोजक नरेंद्र उत्तराखंडी के नेतृत्व में उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को आमरण अनशन के संबंध में पत्र भेजा है । पत्र के मुताबिक किसान 23 मार्च 2025 से आमरण अनशन पर बैठेंगे । किसानों का कहना है , आमरण अनशन में बैठे किसानों के जान - माल की पूर्ण जिम्मेदारी शासन / प्रशासन की होगी ।ये लोग बैठेंगे आमरण अनशन में -
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के मुताबिक चम्पावत जिले के पाटी विकासखंड अंतर्गत दूबड़ समिति में 23 मार्च 2025 से घनश्याम भट्ट पुत्र लीलाधर ग्राम - बालातड़ी , जय राम पुत्र घन राम ग्राम - बालातड़ी , हयात सिंह बोहरा पुत्र देव सिंह ग्राम - दूबड़ कमलेख , घनश्याम सकलानी पुत्र चूड़ामणि ग्राम - सकदेना और त्रिभुवन सकलानी पुत्र हरिनंदन ग्राम - सकदेना आमरण अनशन पर बैठेंगे ।किसानों की बात करने वाली सरकार की खुल रही है पोल -
कहा जाता है , उत्तराखंड के किसान प्रदेश की रीढ़ हैं । लेकिन आज यहां अन्नदाता खेतों के बजाय आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर है । बड़ी विडंबना है कि , सरकार कहती है किसानों की आय दोगुनी की जाएगी , लेकिन यहां किसान लगातार 19 दिन धरने में बैठने के बाद आमरण अनशन पर बैठ रहे हैं । किसानों का कहना है , किसानों की बात करने वाली सरकार किसानों की हितैषी बनने का ढोंग रच रही है । आज यहां अन्नदाता इतना मजबूर है कि उसे अन्न त्याग करना पड़ रहा है ।
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