दिल्ली में उत्तराखंड के देव भूत का मंचन
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
दिल्ली ( Delhi ) - में उत्तराखंड के प्रबुद्ध जनों की उपस्थित में चंद्र मोहन पपनै द्वारा उत्तराखंड की पृष्ठभूमि पर रचित तथा विपिन कुमार द्वारा निर्देशित नाटक देव भूत का प्रभावशाली मंचन खचाखच भरे एलटीजी सभागार मंडी हाउस , दिल्ली में किया गया ।हिलजात्रा की याद ताजा हो गई दिल्ली में -
मंचित नाटक देव - भूत से उत्तराखंड की यादें दिल्ली में ताजा हुई हैं । उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल के सोरघाटी के गांवों में आस्था , विश्वास तथा संस्कृति का प्रतीक , कृषि व पशुचारण जैसे कार्यो से जुड़ा हुआ व रोमांचित करने वाली पौराणिक व अनेकों दंत कथाओं से ओतप्रोत एक मात्र मुखौटा आधारित लोकनाट्य हिलजात्रा के मुख्य पात्र जिसे स्थानीय ग्रामीण लटेश्वर महादेव , शिव के बारहवें गण , वीरभद्र , लखिया , बाबा तथा भूत इत्यादि विभिन्न नामों से जाना व पुकारा जाता है , तथा अंचल का रक्षक व सुख समृद्धि का प्रतीक माना जाता है । उक्त पौराणिक गाथा तथा मध्य हिमालय उत्तराखंड पर्वतीय अंचल के हास के कगार पर जा रहे पर्यावरण , लोक विधाओं की हो रही विलुप्ति , अभावग्रस्त जीवन , बढ़ते पलायन से भुतहा हो रहे ग्रामीण अंचल के गांवों के लोगों की दुर्दशा , जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक व जनमानस के अंतर्मन में भगवान वीरभद्र के रूप में लखिया देव के प्रति जमे अटूट विश्वास पर आधारित मौलिक नाटक था ।कुमाऊं की संस्कृति को दर्शकों ने जाना -
नाटक में पिरोए गए अंचल के लोकसंगीत , लोकगायन , नृत्यों तथा संवादों व अभिनय ने दर्शकों को बहुत प्रभावित किया । देव-भूत के रूप में गोबिंद के नृत्य तथा सास व बहु की भूमिका में क्रमशः बबीता पांडे व चन्द्रा बिष्ट , हुड़किया व हुड़क्याडी क्रमशः दीवान कनवाल व डॉ कुसुम भट्ट व रंगमंच के क्षेत्र में संस्कृति मंत्रालय - भारत सरकार से छात्रवृत्ति सहित कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त बाल कलाकार सृजन पांडे के गायन , नृत्य व अभिनय ने दर्शकों को बहुत प्रभावित किया ।लोकसंगीत की धुन ने बांधा समां -
लोकसंगीत की धुनों को संजोने में मधु बेरिया साह , हरीश रावत तथा सतीश नेगी ( राही )तथा भुवन रावत की भूमिका की दर्शकों द्वारा मुक्त कंठ प्रशंसा की गई । समूह गायन में महेंद्र लटवाल , के एस बिष्ट तथा अन्य नाटक पात्रों में अखिलेश भट्ट , खुशहाल सिंह रावत , दीपक राना , लक्ष्मी रौतेला , भगवती , के सी कोटियाल तथा गौरव द्वारा निभाई गई । विभिन्न पात्रों की भूमिका ने भी दर्शकों को बहुत प्रभावित किया ।दिल्ली में वर्ष 1968 में स्थापित हुई पर्वतीय कला केंद्र संस्था -
वर्ष 1968 में दिल्ली में उत्तराखंड के प्रवासियों द्वारा स्थापित पर्वतीय कला केंद्रदेश की एक सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक संस्था है , जिसका उद्देश्य उत्तराखंड के साथ - साथ देश की सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण व संवर्धन करना रहा है । उक्त संस्था द्वारा समय - समय पर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय फलक पर आयोजित अनेकों सांस्कृतिक समारोहों में प्रतिभाग कर उत्तराखंड व देश का गौरव बढ़ाया है ।
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