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Home आस्था / आध्यात्म

आस्था : प्रतिदिन हजारों लोग कर रहे हैं मां पूर्णागिरि के दर्शन - Uttarakhand Hindi Samachar

Posted by admin
Posted Date: 2025-05-29 17:31:10
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आस्था : प्रतिदिन हजारों लोग कर रहे हैं मां पूर्णागिरि के दर्शन


(Report - uttarakhandhindisamachar.com)

रिपोर्ट - सूरज लडवाल
चम्पावत ( Champawat ) - जिले के टनकपुर ( Tanakpur ) स्थित सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम में चल रहे उत्तर भारत के सबसे विशाल मेले में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगातार जारी है । गुरुवार को भी करीब 21 हजार श्रद्धालुओं मां के दरबार में पूजा अर्चना की और मन्नत मांगी । चिलचिलाती गर्मी से बचने के लिए श्रद्धालु सुबह और शाम के वक्त दर्शन कर रहे हैं । पैदल जत्थे मां के जयकारों के साथ लगातार आगे बढ़ रहे हैं ।
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मंदिर क्षेत्र में मंदिर कमेटी और प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाओं का विशेष ख्याल रखा है । दिनभर मां के मुख्य मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार लगी रही । मंदिर कमेटी के अध्यक्ष किशन तिवारी ने बताया कि , 15 मार्च से आरंभ मेला अवधि 15 जून तक निर्धारित है । उन्होंने बताया मेला क्षेत्र में पेयजल , सफाई , लाइट आदि व्यवस्था ठीक है । इसके साथ - साथ मुख्य मंदिर में कमेटी की ओर से स्वयंसेवक भी तैनात किए गए हैं ।
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यहां 24 घंटे श्रद्धालुओं के लिए पूजा अर्चना की व्यवस्था की गई है ।

51 शक्तिपीठों में है खास , माता सती से जुड़ा है इतिहास -

मां पूर्णागिरि मंदिर का इतिहास काफी रोचक है । 51 शक्तिपीठों में शुमार मां पूर्णागिरि का धाम लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है । हर वर्ष यहां आयोजित होने वाले मेले में उत्तराखंड , उत्तर प्रदेश सहित भारत के अन्य राज्यों और पड़ोसी देश नेपाल के भक्त माता के दर्शन करने आते हैं ।

पूर्णागिरि में गिरी थी , माता सती की नाभि -

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णागिरि धाम में माता सती की नाभि गिरी थी । पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता सती के पिता दक्ष प्रजापति ने अपने महल में यज्ञ का आयोजन किया था , जिसमें सभी देवी - देवताओं को बुलाया था । लेकिन अपने दामाद भगवान शिव को निमंत्रण नहीं भेजा था । माता सती इसी बात से नाराज हो गई थी और उन्होंने जलते हवन कुंड में छलांग लगा दी ।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जैसे ही ये जानकारी भगवान शिव को मिली तो , वो भी क्रोधित होकर दक्ष प्रजापति के महल में पहुंचे और माता सती के जलते शरीर को लेकर आकाश मार्ग में विचरण करने लगे । भगवान भोलेनाथ के गुस्से को शांत करने के लिए विष्णु भगवान ने सुदर्शन चक्र से माता सती के 51 टुकड़े किए थे , जो देश के विभिन्न हिस्सों में गिरे थे और कालांतर में शक्ति पीठों के रूप में स्थापित हुए ।

भक्तों की मुराद पूरी करती है मां पूर्णागिरि -

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता सती का नाभि अंग टनकपुर के अन्नपूर्णा पर्वत में गिरा था , जिसे आज माता पूर्णागिरि के नाम से पूजा जाता है ।
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कहा जाता है कि , जो भक्त सच्चे मन से माता माता पूर्णागिरि के दर पर आता है , मां उसकी हर मुराद पूरी करती हैं । अगर आप भी माता पूर्णागिरि के दर्शन को जाते हैं , तो तन के साथ - साथ मन का शुद्ध होना भी बेहद जरूरी है । उत्तराखंड हिंदी समाचार दावे के साथ कहता है , अगर आप विश्व कल्याण की भावना के साथ मां के दर्शन को जाते हैं , तो आपके मन को शांति और तन को स्फूर्ति जरूर मिलेगी ।


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