वाह : चम्पावत के शिवराज की मेहनत ला रही है रंग
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत ( Champawat ) - पर्वतीय जिले में मेहनती लोगों की कमी नहीं है । यहां लोग हाड़तोड़ मेहनत के बलबूते आज अपने जीवन को सुखमय बना रहे हैं । जिले में तमाम लोग ऐसे हैं , जो खेतों में मेहनत कर ऑर्गेनिक उत्पाद खा रहे हैं और लोगों को खिला रहे हैं । हम आपको बता दें , सोने की कीमत लगाई जा सकती है लेकिन ये ऑर्गेनिक उत्पाद बहुमूल्य हैं । आज के समय में ऑर्गेनिक उत्पाद मिलना बेहद कठिन है और इन्हें सिर्फ हाड़तोड़ मेहनत से ही पाया जा सकता है ।भिंगराड़ा के शिवराज की मेहनत लाई रंग -
भिंगराड़ा अंतर्गत खरहीं के राजकोट निवासी शिवराज सिंह की मेहनत अब रंग लाने लगी है । बागवान शिवराज सिंह की मेहनत की बदौलत आज उनका बगीचा फलों से लदा हुआ है । गुरुद्वारा रीठा साहिब में जोड़ मेला शुरू होने वाला है और यहां दर्शन करने तमाम राज्यों से श्रद्धालु आ रहे हैं और बागवान शिवराज सिंह के आड़ू , पुलम और खुमानी का स्वाद ले रहे हैं । तीर्थयात्रियों का कहना है , इन उत्पादों में जो ऊर्जा है उसे शब्दों में बयां करना कठिन है बल्कि इसे सिर्फ खाकर ही महसूस किया जा सकता है ।आजीविका का माध्यम बन गई बागवानी -
कर्मठ किसान शिवराज सिंह कहते हैं , उन्हें मालूम नहीं था कि बागवानी उनके रोजगार का जरिया बन जाएगी । उन्होंने मेहनत करनी नहीं छोड़ी और आज उनकी मेहनत रंग ला रही है । उनके खेतों की हरी सब्जियां आज आजीविका का जरिया बन रही हैं । परंपरागत फलों में सेब , तिमला ( अंजीर ) , नींबू , खुमानी एवं आड़ू उत्पादन के साथ - साथ जैविक तरीके से विभिन्न प्रकार की खेती आज शिवराज सिंह के लिए लाभ का सौदा बन रही है ।उद्यान विभाग करता है प्रेरित -
उद्यान विभाग भिंगराड़ा के सचल दल की ओर से शिवराज सिंह को जैविक खेती एवं फलोत्पादन के लिए प्रेरित किया जाता है , जिससे उनका रुझान भी इस तरफ बढ़ता जा रहा है । अब शिवराज के फलों की लगातार मांग बढ़ रही है और जिसे देखते हुए उनके द्वारा बड़े पैमाने पर फलों का उत्पादन किया जाने लगा है ।उमेश चंद्र भी इस दिशा में बढ़ा चुके हैं कदम -
भिंगराड़ा निवासी प्रगतिशील किसान उमेश चन्द्र भट्ट द्वारा भी सफलतापूर्वक जैविक सब्जियों एवं फलों का उत्पादन किया जा रहा है । उनका कहना है , उन्हें मैदानी क्षेत्र से आ रहे पर्यटकों से अच्छा मुनाफा मिल रहा है और जैविक विधि से उगाए गये फलों एवं हरी सब्जियां को अब स्थानीय स्तर पर भी प्राथमिकता मिल रही है ।
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