मेहनत और लगन से रसीले मीठे पूलम ने रसगुल्ले को दी मात
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत ( Champawat ) - जिले के एक बागवान ने मेहनत और लगन का ऐसा उदाहरण दिया है , जिससे जिले के अन्य बागवान हैरान हैं । जिले के भिंगराड़ा के निकटवर्ती राजकोट के दुर्गानगर निवासी शिवराज सिंह बोहरा की मेहनत ने आज सबको हैरान कर दिया है । उनका कुबेर गार्डन आज सिख तीर्थ यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्टॉपेज बन गया है । श्रीरीठासाहिब के जोड़ मेले के दौरान गार्डन में उगाए जाने वाले पूलम फल ने तीर्थ यात्रियों का दिल जीत लिया है , जो अपने रसीले और मीठे स्वाद के लिए प्रसिद्ध है ।पूलम की विशेषता -
कुबेर गार्डन में , पेड़ पर पके हुए पूलम फलों में इतनी मिठास भरी हुई है कि , तीर्थ यात्री इसकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं । उनका कहना है कि यह फल रसगुल्ला और गुलाब जामुन से भी बेहतर है ।गार्डन की विशेषता -
कुबेर गार्डन के मालिक शिवराज सिंह बोहरा ने अपनी पत्नी उर्मिला बोहरा और बेटे के साथ मिलकर इस गार्डन को बनाया है । बगीचे में विभिन्न प्रकार के जैविक फलों का उत्पादन होता है । इनमें काफल , अखरोट , अंजीर आदि शामिल हैं ।उत्पादों की विविधता -
कुबेर गार्डन में उगाए जाने वाले फलों का उपयोग विभिन्न प्रकार के उत्पादों में किया जाता है , जैसे कि फलों की रोटी और चटनी । इन उत्पादों को लोग बहुत पसंद कर रहे हैं और इन्हें खरीदने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं ।फलों की रोटी और चटनी -
कुबेर गार्डन में पूलम फलों को सुखाकर और मसालों के साथ मिलाकर चटनी बनाई जाती है , जो बहुत ही स्वादिष्ट होती है । फलों की रोटी भी एक लोकप्रिय उत्पाद है , जो ₹800 किलो के दर से बिक रहा है ।जानिए , क्या कहते हैं बागवान बोहरा -
बागवान शिवराज सिंह बोहरा का कहना है कि , तीर्थ यात्रियों द्वारा उन्हें सम्मान से जीने का अवसर देकर प्रोत्साहित किया जाता रहा है । वह जैविक अंजीर का भी स्वाद चखा रहे हैं , जो औषधीय गुणों से भरपूर है । शिवराज सिंह कहते हैं , मेहनत और लगन से अगर कार्य किया जाय तो , उसके परिणाम सकारात्मक आते हैं ।
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