डॉ एल एम रखोलिया , डॉ मृणालिका और डॉ रितु रखोलिया , नर को नारायण मानकर करते हैं सेवा
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
कुमाऊं - पहाड़ के लोग यहां की माटी में पले होने के बाद यदि विशेषज्ञ डॉक्टर हो बन जाते हैं , तो पहाड़ की ओर ही पीठ कर देते हैं , लेकिन हजारों किलोमीटर दूर स्वामी विवेकानंद जी की कार्यस्थली पश्चिम बंगाल की 30 वर्षीय महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मृणालिनी मजूमदार यहां स्वामी विवेकानंद जी के सिद्धांतों के अनुसार नर को नारायण मानकर जन सेवा करती आ रही है । इन्होंने तीन माह पूर्व लोहाघाट के उप जिला चिकित्सालय से अपनी सरकारी सेवा शुरू की थी । इस दौरान उन्होंने डेढ़ दर्जन ऐसे क्रिटिकल ऑपरेशन कर महिलाओं की जान बचाई है , जिन ऑपरेशन के लिए पहले उन्हें हल्द्वानी जाना पड़ता था । इसके अलावा बच्चेदानी के ऑपरेशन आदि सभी कार्य ऐसी भावनाओं से किया जा रहे हैं , जिससे न केवल सभी ऑपरेशन सफल हुए हैं बल्कि महिला रोगियों का रिफर होना भी बंद हो गया । डॉक्टर मृणालिनी का व्यवहार इतना मधुर है कि , आधा रोग तो वह अपने व्यवहार से ही लील लेती हैं ।रोगी की सेवा में लगे डॉ एल एम रखोलिया की काम करने की कोई सीमा नहीं -
रेडियोलॉजिस्ट डॉ ललित मोहन रखोलिया ऐसे पारिवारिक संस्कारों में पले हुए हैं कि , रेडियोलॉजिस्ट के अभाव के चलते उन्हें कुमाऊं के कई अस्पतालों में जाकर काम करना पड़ता था , लेकिन उनके चेहरे में कभी न थकान देखी गई और नहीं कोई तनाव । उनको भगवान ने सेवा का ऐसा भाव दिया है कि , अकेले एक ही दिन में उनके द्वारा करीब 100 गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है । जन सेवा करने के लिए डॉ ललित मोहन रखोलिया को जीवनसाथी के रूप में ऐसी बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रितु रखोलिया मिली हैं , जो अपने कार्य व व्यवहार से चिकित्सा पेशे में अपनी अलग शान व पहचान बनाए हुए हैं । लगता है डॉ रखोलिया दंपति को ईश्वर ने सेवा के लिए चार हाथ दे दिए हैं ।
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