दर्दनाक : जंगल की भूल ने छीन ली दो जिंदगियां
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
पिथौरागढ़ ( Pithoragarh ) - जंगल की भूल कभी - कभी जिंदगी भर का मातम बन जाती है । पंचाचूली गीत से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले कुमाऊंनी लोकगायक गणेश मर्तोलिया के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है । उनकी 28 वर्षीय बहन दीया और 70 वर्षीय नानी कुंती देवी ने जिसे भोजन सोचा था , वही उनका अंतिम निवाला साबित हुआ ।जिसने पाला , वो चली गई... और जो अभी जीना सीख रही थी , वो भी साथ चली गई -
धापा गांव ( मुनस्यारी ) की इस घटना ने हर संवेदनशील हृदय को कंपा दिया है । 11 जुलाई को जंगल से लाए गए मशरूम को परिवार ने भोजन में शामिल किया , लेकिन वो जहर बन चुका था । पहले हल्का दर्द , फिर उल्टियां , और फिर जैसे शरीर ने जवाब देना शुरू कर दिया । परिजन घबरा उठे और तुरंत जिला अस्पताल ले गए । लेकिन तब तक शरीर में ज़हर अपनी पकड़ जमा चुका था ।सफर था जीवन बचाने का , मगर रास्ते में टूट गई सांसें -
रविवार की शाम , उम्मीदों से भरी एंबुलेंस हल्द्वानी की ओर दौड़ रही थी , लेकिन खटीमा के पास बहन दीया की सांसे टूट गई । मां समान नानी को सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचाया गया , जहां उन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती किया गया । लेकिन ज़हर की पकड़ गहरी थी । सोमवार को उन्होंने भी जिंदगी की लड़ाई हार दी ।अब घर में सिर्फ उनकी यादें और वो आवाजें हैं जो अब कभी नहीं सुनाई देंगी -
सन्नाटा घर को खाली कर गया , आज मर्तोलिया परिवार में न रौनक है , न स्वर । एक तरफ बहन के सपने अधूरे रह गए , दूसरी ओर बुजुर्ग नानी का वात्सल्य हमेशा के लिए छिन गया । परिजन फूट - फूट कर रो रहे हैं , और गांव में मातम पसरा है । संगीत जगत में जहां गणेश मर्तोलिया का नाम सम्मान से लिया जाता है , वहां भी गहरा सन्नाटा है ।आप भी सावधान रहें , स्वाद बन सकता है जहर -
ये हादसा अन्य लोगों के लिए एक चेतावनी है । यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं , पूरे समाज के लिए चेतावनी है । जंगली मशरूम स्वाद में भले ही लुभाता है , लेकिन एक छोटी - सी गलती दो - दो जिंदगियों को निगल गई। अब सवाल उठता है , क्या हम ऐसी मौतों को यूँ ही होता देखते रहेंगे ?
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