वीडियो : क्या , यहां बच्चों को शिक्षा का अधिकार छिनने पर मजबूर किया जा रहा है
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
मध्यप्रदेश ( M P ) - के एक छोटे से गांव में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय करकुवा में आजकल बच्चों के लिए स्कूल जाना एक बड़ी चुनौती बन चुका है । वीडियो खबर के अंत में दिया गया है । यह विद्यालय जहां एक तरफ शिक्षा की रोशनी फैलाने का दावा करता है , वहीं दूसरी ओर यहाँ की जर्जर इमारत और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने शिक्षा के स्तर को गंभीर संकट में डाल दिया है ।सभी कक्षाएं एक ही कमरे में -
राजकीय प्राथमिक विद्यालय करकुवा की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहाँ सभी कक्षाएं एक ही कमरे में संचालित हो रही हैं । एक ही कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चे बैठते हैं , जिससे पढ़ाई में गंभीर समस्या पैदा हो रही है । बच्चे जब अलग-अलग कक्षाओं के विषय पढ़ते हैं , तो ध्यान भटकता है और सीखने की प्रक्रिया प्रभावित होती है ।जर्जर भवन और छत से टपकता पानी -
विद्यालय भवन की हालत अत्यंत खराब है । यहाँ के कक्षाएं तो हैं , लेकिन उनमें से अधिकांश की छतें कमजोर हो चुकी हैं और बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता है , जिससे बच्चों को बैठने में भी कठिनाई होती है । वीडियो खबर के अंत में दिया गया है । गर्मी के मौसम में पंखे की कोई व्यवस्था नहीं है , जिससे बच्चों को अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ता है । ऐसी स्थितियों में बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता और उनकी सेहत पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है ।क्या बच्चों का शिक्षा का अधिकार कोई नहीं समझेगा ?
इस विद्यालय में बच्चों का सवाल है , क्या अच्छी शिक्षा पाना हमारा अधिकार नहीं ? जब बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो सकतीं , तो शिक्षा की गुणवत्ता की बात कैसे की जा सकती है ? यही सवाल अब स्थानीय बच्चों और उनके माता-पिता के दिलों में गूंज रहा है । क्या शासन और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए इस स्थिति में सुधार करेंगे या फिर इन बच्चों का भविष्य ऐसे ही अनदेखा होता रहेगा ?उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल -
यहां के जनप्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों पर सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर वे कब तक इस गंभीर स्थिति की अनदेखी करेंगे । प्रदेश में शिक्षा का स्तर सुधारने की बातें बड़े-बड़े मंचों से की जाती हैं , लेकिन इस विद्यालय जैसे छोटे से विद्यालय की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता । क्या मध्यप्रदेश सरकार और उसके अधिकारी इस गंभीर समस्या का समाधान करेंगे या सिर्फ कागजी कार्यवाही करते रहेंगे ?खबर का वीडियो देखने के लिए नीचे देखें-
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