मान्यता : आज ही के दिन स्वयं भगवान शिव करते हैं मां वाराही के दर्शन
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत ( Champawat ) - देवभूमि के पर्वों का रंग ही कुछ अलग है , और जब बात देवीधुरा बग्वाल की हो तो यह रंग श्रद्धा , परंपरा और जोश में डूबा हुआ नजर आता है । शनिवार को शांतिपूर्ण माहौल में बग्वाल निपटने के बाद रविवार को मां वाराही की भव्य शोभायात्रा निकली , जिसमें आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा । डमरू की थाप , नगाड़ों की गूंज और घंटियों की झंकार के बीच मां के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा ।रातभर दिया लेकर खड़ी रहीं मां की दहलीज़ पर
बग्वाल की रात मां बज्र वाराही , मां महाकाली और मां सरस्वती के ताम्र पेटिका में विराजमान होने के समय निसंतान महिलाएं हाथ में जलता दीप लिए पूरी रात मां की दहलीज़ पर खड़ी रहीं । मान्यता है कि इस रात की प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती , और मां की कृपा से घर आंगन में खुशियों की किलकारी गूंज उठती है ।आंखों पर काली पट्टी, हाथों में दूध-गंगाजल
सुबह नंद गृह में माताओं को काले कंबल से ढककर स्नान कराने का दृश्य श्रद्धालुओं को रोमांचित कर रहा था । बागड़ जाति के लोग , आंखों पर काली पट्टी बांधे , परंपरा निभाते हुए दूध और गंगाजल से माताओं का अभिषेक कर रहे थे । इसके बाद मां को नए आभूषण और चमकते वस्त्र पहनाए गए ।मुचकुंद ऋषि आश्रम में मां के दर्शन का वरदान
शोभायात्रा मुचकुंद ऋषि के आश्रम तक पहुंची , जहां से पंचाचुली और मानसरोवर की बर्फीली चोटियां दूर से नजर आती हैं । कथा है कि , मां वाराही ने चिरनिंद्रा में लीन मुचकुंद ऋषि को वर्ष में केवल इसी दिन दर्शन देने का वचन दिया था । धार्मिक मान्यता यह भी है कि , इस शुभ घड़ी में भगवान शिव स्वयं मां के दर्शनों करते हैं।सांस्कृतिक रंग और बाजार की चहल-पहल
देवीधुरा में इन दिनों सिर्फ मंदिर ही नहीं , बल्कि पूरा बाजार रौनक से भरा है । सांस्कृतिक मंच पर देशभर से आए कलाकार रंगारंग कार्यक्रमों से दर्शकों का मन मोह रहे हैं । चार खाम और सात थोको के लोग इस आयोजन की शान बढ़ा रहे हैं । दुकानों पर भीड़ , पकवानों की खुशबू और पहाड़ी हस्तशिल्प की चमक यहां के पर्यटन को नई उड़ान दे रही है ।
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