चिंता : बुलेट न करे बैलेट को दागदार , जनता ही बने असली भागीदार
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत ( Champawat ) - कहते हैं – जहां बुलेट गरजे , वहां बैलेट की आवाज़ दब जाती है । उत्तराखंड के 12 जिलों में पंचायत चुनाव तो खत्म हो गए , लेकिन नैनीताल और बेतालघाट के घटनाक्रम ने लोकतंत्र की नींव हिला दी । सवाल उठ रहा है – क्या पंचायत चुनावों में अब जनता की आवाज़ दबाने के लिए धनबल और बाहुबल का सहारा लिया जाएगा ?देवभूमि में गुंडागर्दी का कल्चर
वरिष्ठ पत्रकारों से लेकर गांव की चौपाल तक एक ही बात गूंज रही है – उत्तराखंड तो शांत पहाड़ों की धरती थी , यहां महाराष्ट्र-बिहार वाला रंगदारी का खेल कब आ गया ? युवाओं , महिलाओं , व्यापारियों और कर्मचारियों ने जब चम्पावत के पीटीआई संवाददाता दिनेश चंद्र पांडेय से कहा – पहले यहां राजनीति में ईमानदारी और भाईचारा था , अब अपहरण , धमकी और खरीद-फरोख्त का बोलबाला बढ़ रहा है ।सेना के जांबाजों की दो टूक – गोली सिर्फ मासूमों की ढाल बने
सेना से रिटायर्ड कैप्टन बिंदु सिंह मौनी का कहना है – बैलेट की गरिमा को बुलेट से दागदार मत करो । देवभूमि के जांबाज देश के लिए अपनी जान न्यौछावर करते हैं , लेकिन चुनाव में बुलेट चले तो वो सिर्फ असहायों और पीड़ितों की रक्षा के लिए हो , न कि वोट लूटने के लिए ।धनबल-बाहुबल : पंचायत चुनाव का नया वायरस
पूर्व ब्लॉक प्रमुख मंजू तड़ागी ने कहा – पंचायत चुनाव में धनबल-बाहुबल का बढ़ना चिंता की घंटी है । अगर जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख का चुनाव सीधे जनता करे , तो अपहरण , धमकी और दलाली का खेल बंद हो सकता है । अफसर बनें जनता के सेवक , सत्ता के दलाल नहीं
सेवानिवृत्त मुख्य प्रशासनिक अधिकारी भगवत प्रसाद पांडेय का तंज – जब अफसर सत्ता के एजेंट बनते हैं , तो कुर्सी की गरिमा डूब जाती है । कानून और संविधान के दायरे में निष्पक्ष काम करना ही उनकी असली जिम्मेदारी है ।राज्य आंदोलनकारियों की चेतावनी – उत्तराखंड को बचाना होगा
राज्य आंदोलन के अग्रणी एडवोकेट नवीन मुरारी बोले – पंचायतें गांव की सरकार हैं , इन्हें भ्रष्टाचारियों और माफियाओं के हाथों का खिलौना मत बनाओ । जल-जंगल-जमीन और रोजगार बचाना अब पहली प्राथमिकता होनी चाहिए , वरना पहाड़ खाली हो जाएगा और माफिया कब्जा कर लेंगे । जैसा नगर निगम में , वैसा ही पंचायत में
पूर्व आरसेटी निदेशक जनार्दन चिलकोटी ने सुझाव दिया – जैसे मेयर का चुनाव सीधे जनता करती है , वैसे ही जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख का चुनाव भी ग्रामीण मतदाता करें । इससे गुंडागर्दी और धनबल का खेल खत्म होगा ।पढ़े-लिखे हों पंचायत के बड़े ओहदेदार
युवा मतदाता उत्कर्ष ने कहा – ग्राम प्रधान के लिए हाईस्कूल की योग्यता ठीक है , लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख कम से कम स्नातक पास हों ।महिलाएं बनें खुद की मालिक , पति या रिश्तेदार के ठेके में न रहें
युवा राहुल कुमार का कहना – पंचायतों में महिला प्रतिनिधियों को असली अधिकार और आज़ादी मिले । अक्सर महिलाएं सिर्फ नाम की प्रधान होती हैं और काम पति या परिजन करते हैं ।गांव-गांव रंजिश , शराब और झगड़ों की जड़ है पंचायत चुनाव ?
खिमुली आमा ने तल्खी से कहा – इन चुनावों से गांव में भाईचारा टूट रहा है , लड़के शराब और पैसों में बिगड़ रहे हैं । उनका मानना है कि इन पदों पर सीधे मनोनयन कर दिया जाए , ताकि गांवों में कड़वाहट न फैले ।उत्तराखंड हिंदी समाचार की नजर से
उत्तराखंड के पंचायत चुनाव अब सिर्फ लोकतंत्र का उत्सव नहीं , बल्कि सियासी दंगल बनते जा रहे हैं । वक्त आ गया है कि नियम-कायदों में सुधार कर जनता को असली ताकत दी जाए । वरना , बुलेट का शोर बैलेट की आवाज़ को हमेशा के लिए दबा देगा ।
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