सूचना अधिकार : नहीं मिलेगी सूचना , सहकारी समितियाँ RTI के दायरे में नहीं
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
देहरादून ( Dehradun ) - अक्सर आमजन यह सवाल करते हैं कि क्या सहकारी समितियों से भी सूचना अधिकार (RTI) के तहत जानकारी ली जा सकती है ? इस मुद्दे पर वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. शिवकुमार सिन्हा ने जानकारी साझा की है ।विशेषज्ञ की राय : RTI की परिधि से बाहर हैं सहकारी समितियाँ
सेवानिवृत्त महाप्रबंधक , नाबार्ड एवं वर्तमान में उच्च न्यायालय , मुंबई व गोवा के अधिवक्ता डॉ. शिवकुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि सहकारी समितियाँ सूचना का अधिकार अधिनियम , 2005 की धारा 2(h) के तहत लोक प्राधिकरण की परिभाषा में नहीं आती हैं । इसी कारण से सहकारी समितियों पर सीधे तौर पर RTI लागू नहीं होता ।जानिए , क्या कहता है RTI कानून ?
RTI अधिनियम , 2005 की धारा 2(h) के अनुसार केवल वही संस्थान RTI की परिधि में आते हैं जिन्हें , सरकार ने कानून या अधिसूचना द्वारा गठित किया हो , जिन पर सरकार का सीधा नियंत्रण हो , या जिन्हें सरकार से भारी वित्तीय सहायता प्राप्त हो । सहकारी समितियाँ , जो केवल अपने सदस्यों के योगदान से चलती हैं , इस श्रेणी में शामिल नहीं होतीं ।किन परिस्थितियों में आ सकती हैं समितियाँ RTI के दायरे में
हाईकोर्ट के कई फैसलों में यह भी साफ किया गया है कि यदि किसी सहकारी समिति को सरकार से भारी वित्तीय सहायता मिले या सरकार उसके प्रबंधन पर नियंत्रण रखे , तो वह समिति RTI अधिनियम के तहत लोक प्राधिकरण मानी जाएगी । ऐसी स्थिति में समिति से सूचना मांगी जा सकती है ।आम जनता के लिए संदेश
डॉ. सिन्हा के अनुसार , सहकारी समितियों में सूचना मांगने का अधिकार RTI से नहीं बल्कि समिति के अपने उपनियमों और आंतरिक नियमों से तय होगा । इसलिए आम जनता को यह समझना जरूरी है कि हर सहकारी समिति RTI के दायरे में नहीं आती ।
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