झटका नहीं , राहत ! बिजली दरों में बढ़ोतरी की चाल हुई फेल
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
लाइन लॉस की पोल खुली , आयोग ने कम किया अनुमोदन ।
सरकार हो या आम आदमी , DPS सभी पर लागू - आयोग सख्त ।
जनसुनवाई में गूंजा विरोध , जनता की आवाज बनी निर्णायक ।
तीन सालों में बार-बार फेल हुआ यूपीसीएल , लक्ष्य से ज्यादा हुआ नुकसान ।
देहरादून ( Dehradun ) - से उत्तराखंडवासियों के लिए बड़ी और राहतभरी खबर आई है । अब आपकी जेब पर बिजली का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा । उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने यूपीसीएल की उस याचिका को सख्ती से खारिज कर दिया है जिसमें 674.77 करोड़ रुपये की कैरिंग कॉस्ट उपभोक्ताओं से वसूलने की माँग की गई थी । आयोग ने कहा कि यह मांग निराधार और उपभोक्ता विरोधी है । यही नहीं , आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद और सदस्य विधि अनुराग शर्मा की पीठ ने साफ कर दिया कि इस पुनर्विचार याचिका में कोई नया तथ्य या वैध आधार नहीं है , इसलिए इसे सिरे से खारिज किया जाता है ।डिले पेमेंट सरचार्ज पर आयोग का दो टूक रुख
यूपीसीएल ने 129.09 करोड़ रुपये के डिले पेमेंट सरचार्ज (DPS) को टैरिफ से बाहर रखने की मांग की थी । तर्क ये दिया गया कि 2012 में राज्य सरकार ने DPS नहीं लेने का फैसला किया था । लेकिन आयोग ने तल्ख लहजे में कहा कि चाहे सरकार हो या उपभोक्ता , नियम सब पर बराबर लागू होते हैं । इस फैसले से साफ है कि DPS टैरिफ में शामिल रहेगा , जिससे आम उपभोक्ता को राहत मिल सकती है और बिजली दरें घट सकती हैं ।लाइन लॉस की हकीकत : आंकड़े जो यूपीसीएल की नींद उड़ाएंगे
यूपीसीएल ने 2025-28 तक के लिए जो लाइन लॉस का दावा किया था , उस पर भी UERC ने कैंची चला दी ।
वर्ष दावा (%) आयोग द्वारा मंजूर (%)
2025-26 13.50% 12.75%
2026-27 13.21% 12.25%
2027-28 12.95% 11.75%
इसका मतलब है कि यूपीसीएल को अब हर हाल में लाइन लॉस 11.75% तक लाना होगा , वरना भविष्य में उसे और सख्ती झेलनी पड़ सकती है ।पिछले तीन सालों में टारगेट से ज्यादा नुकसान
यूपीसीएल की परफॉर्मेंस पहले से ही कटघरे में है । पिछले तीन सालों के आंकड़े खुद चीख-चीख कर कह रहे हैं कि निगम लक्ष्य को छू भी नहीं पाया ।
2021-22: लक्ष्य 13.75% नुकसान 14.70%
2022-23: लक्ष्य 13.50% नुकसान 16.39%
2023-24: लक्ष्य 13.25% नुकसान 15.63%
इन आंकड़ों से साफ है कि निगम सिर्फ दावा करता है , ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है ।
जनसुनवाई में उठा विरोध का तूफान
5 अगस्त को हुई जनसुनवाई में यूपीसीएल की याचिका का जोरदार विरोध हुआ था । हितधारकों ने एक सुर में कहा कि बिजली दरें पहले से ही भारी हैं , और कैरिंग कॉस्ट की वसूली आम जनता के साथ अन्याय होगी । आयोग ने जनता की इस आवाज को सुना और उपभोक्ता हित में ऐतिहासिक फैसला सुनाया ।जनता की जीत , जेब पर राहत
इस फैसले ने साबित कर दिया कि अब बिजली उपभोक्ता जागरूक हैं और आयोग भी जनहित को सर्वोपरि मानता है । यूपीसीएल को अब अपने तंत्र में सुधार करना होगा , वरना आने वाले वर्षों में और बड़े झटके मिल सकते हैं ।
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