सावधान : ये देशी जुगाड़ है घातक , 125 लोगों की आंखों की रोशनी दांव पर
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
मध्यप्रदेश ( M P ) - के भोपाल से एक बड़ी खबर आ रही है । यहां 150-200 रुपए की छोटी सी गन ने , न सिर्फ बच्चों के चेहरे झुलसा दिए बल्कि कई की आंखों की रोशनी पर भी खतरा मढ़ दिया । अस्पतालों के मुताबिक अब तक शहर के 125 से ज्यादा हर उम्र के लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं । इनमें ज़्यादातर 8 से 14 साल के बच्चे हैं । कुछ को कार्निया ट्रांसप्लांट की नौबत भी बनी है ।ऐसे काम करती है कार्बाइड गन
दरअसल , गैस लाइटर , प्लास्टिक पाइप और आसानी से उपलब्ध कैल्शियम कार्बाइड से जुगाड़ की देसी गन बनाई जा रही है । इस गन में भरा कैल्शियम कार्बाइड जैसे ही पानी से मिलता है तो एसिटिलीन गैस बनाता है । और लाइटर की छोटी सी चिंगारी मिलते ही तेज़ विस्फोट होता है । इस प्रक्रिया की अनियंत्रितता और पाइप के टूटने पर निकलने वाले छोटे-छोटे प्लास्टिक के टुकड़े छर्रों की तरह शरीर में घुसकर गंभीर चोटें करते हैं , खासकर आंखों में । कई बार बच्चे झांकते हुए देखते हैं और उसी वक़्त धमाका हो जाता है । आंखें , चेहरे और कॉर्निया को गहरा नुकसान पहुंचता है ।सावधान ! हो सकता है स्थायी अंधापन
डॉक्टरों का कहना है कि यह खिलौना नहीं , छोटा बम है । इसमें फटने के साथ न केवल आंखों को बल्कि दिमाग़ और नर्वस सिस्टम को भी खतरा रहता है । लंबे संपर्क से ऑक्सीजन की कमी , ब्रेन एडिमा और न्यूरोलॉजिकल दिक़्क़तें भी हो सकती हैं । गंभीर मामलों में स्टेम सेल डैमेज , ऑप्टिक नर्व की चोट और रेटिना सूजन के कारण स्थायी अंधापन तक हो सकता है ।कॉर्निया तक फट रही
हमीदिया अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ ने बताया कि अभी तक सामने आए ज्यादातर मामलों में कॉर्निया इंजरी के मामले कार्बाइड वाले पटाखे के ही मिले हैं । लगभग सभी मामलों में बारूद और कार्बाइड जाने से आंख का काला मोतिया सफेद पड़ रहा है । दो बच्चों का हम एंब्रायोटिक मेम्ब्रेन ट्रांसप्लांट कर रहे हैं । इसके लिए इंदौर से एंब्रायोटिक मंगवाया है । यह एक आंख की सतह पर झिल्ली लगाकर ईलाज करने की सर्जिकल प्रक्रिया है , जो जले हुए , घाव वाले या गंभीर सूजन वाले आंखों में इस्तेमाल होती है । यह आमतौर पर केमिकल /थर्मल बर्न , गंभीर सूजन या संक्रमण के कारण होता है । कई मरीजों में ये कार्निया अल्सर बन रहा है । तीन मरीजों की रोशनी चली गई । गंभीर मामलों में ऑप्टिक न्यूरोपैथी यानी आंख की नसों को नुकसान और रेटिना में सूजन भी आ सकती है , जिससे हमेशा के लिए दृष्टि जा सकती है ।उत्तराखंड में भी खूब बिक रहा है ये मौत का सामान
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में भी ये देशी जुगाड़ की गन खूब बिक रही है । यहां लोग दीपावली में इसका प्रयोग करते नजर आए हैं और बंदरों , जंगली जानवरों को भगाने के लिए भी खूब खरीद रहे हैं । लोग इसके दुष्प्रभावों को जाने बिना बंदरों व सूअर भगाने के लिए इस गन इस्तेमाल धडल्ले से हो रहा है ।
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