सावधान : रात में तेज रोशनी बन रही है साइलेंट किलर
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
नई दिल्ली - अगर आप भी रात में मोबाइल की स्क्रीन चमकाकर सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हैं या टीवी ऑन रखकर सो जाते हैं , तो सावधान हो जाइए । एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने बड़ा खुलासा किया है - रात में तेज रोशनी दिल और दिमाग दोनों के लिए ज़हर साबित हो रही है ।क्यों होती है ये खतरनाक गड़बड़ी ?
शरीर में एक प्राकृतिक घड़ी होती है , जो नींद और जागने का सही समय बताती है । इसे सर्केडियन क्लॉक या बॉडी क्लॉक कहते हैं । जब रात में तेज रोशनी ( जैसे मोबाइल , ट्यूबलाइट , स्ट्रीटलाइट या टीवी की ) आंखों पर पड़ती है , तो शरीर को लगता है कि अभी दिन है । इससे मेलाटोनिन हॉर्मोन का स्तर गिर जाता है , जो नींद और शरीर के आराम के लिए बेहद ज़रूरी होता है ।बढ़ रहा है दिल और ब्रेन का खतरा
ऑस्ट्रेलिया की सिडनी इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के वैज्ञानिकों के मुताबिक , जो लोग रात में ज्यादा रोशनी में रहते हैं ,
उनमें दिल की बीमारी का खतरा 32% , दिल के दौरे का खतरा 56% और स्ट्रोक का खतरा 23% तक पाया गया है ।शहरों में सबसे ज्यादा असर
देर रात काम करने वाले और मोबाइल पर लंबे समय तक स्क्रॉल करने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं । स्ट्रीटलाइट और घरों की LED लाइट से भी मेलाटोनिन हॉर्मोन गड़बड़ा जाता है ।ऐसे करें करें बचाव
सूर्यास्त के बाद हल्की , मद्धम रोशनी का इस्तेमाल करें । ब्लैकआउट पर्दे लगाएं ताकि बाहर की स्ट्रीटलाइट अंदर न आए । सोने से एक घंटे पहले मोबाइल , टीवी , लैपटॉप बंद कर दें । रात में पढ़ाई या काम करते समय वार्म लाइट मोड का प्रयोग करें ।
रात में रोशनी से नुकसान, रात में मोबाइल चलाने के नुकसान, तेज लाइट से सेहत खतरे में, मेलाटोनिन हॉर्मोन, नींद और दिल की बीमारी, रात की लाइट से नुकसान, स्लीप डिसऑर्डर, मोबाइल लाइट इफेक्ट्स, हेल्थ न्यूज़ इन हिंदी
खबर से जुड़ी अन्य तस्वीरें: