त्यागी की हत्या से 780 करोड़ रुपये का राज़ दफन
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
देहरादून / हरिद्वार - 24 दिसंबर को हरिद्वार के लस्कर में पुलिस अभिरक्षा में दो बदमाशों ने पच्छिमी उत्तर प्रदेश के 57 वर्षीय कुख्यात गैंगस्टर विनय त्यागी को गोली मार दी । जिसके बाद उसे एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती किया गया था । विनय त्यागी के गले , छाती और हाथ में 3 गोलियां लगी थी । जिसके बाद उसकी आंतें फट गई और पेट में खून भर गया । डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन किया और फिर विनय त्यागी वेंटिलेटर पर था । शनिवार सुबह करीब 7 बजे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया ।कुख्यात विनय त्यागी की मौत और 780 करोड़ के राज दफ्न
विनय त्यागी की हत्या ने सिर्फ एक जान नहीं ली , बल्कि 780 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्तियों से जुड़ा ऐसा राज़ भी दफन कर दिया , जिसने उत्तराखंड से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सियासी और प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है ।हत्या के बाद उठा अरबों के काले धन का तूफान
विनय त्यागी की मौत के बाद जांच एजेंसियों के सामने ऐसे इनपुट आए हैं , जिनसे संकेत मिलते हैं कि उसके नेटवर्क में सैकड़ों करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति छिपी हुई थी । जमीन , शेल कंपनियां , फर्जी दस्तावेज और बेनामी सौदे , सब कुछ एक संगठित तंत्र का हिस्सा बताया जा रहा है ।पुलिस अभिरक्षा में मौत , सुरक्षा पर गंभीर सवाल
गैंगस्टर पर जानलेवा हमला उस वक्त हुआ जब उसे जेल से पेशी पर लाया गया था । चौंकाने वाली बात यह रही कि पुलिस असहाय खड़ी नजर आई , जिससे सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक सामने आई । इस घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा घेरा पर सवाल खड़े हो गए हैं ।बेटी तन्वी भारद्वाज का बड़ा आरोप
विनय त्यागी की बेटी तन्वी भारद्वाज ने पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं । उनका कहना है कि उन्होंने हमले से पहले ही पिता की जान को खतरे की सूचना मजिस्ट्रेट को दी थी , अतिरिक्त सुरक्षा की मांग भी की गई थी , लेकिन लापरवाही भारी पड़ी । अब उन्होंने निष्पक्ष जांच और पूरे घटनाक्रम की जवाबदेही तय करने की मांग की है ।जमीन के नाम पर 25 लाख की ठगी , पुराना मामला फिर चर्चा में
हरिद्वार के लक्सर क्षेत्र में कृषि भूमि दिलाने के नाम पर 25 लाख रुपये की ठगी का मामला भी एक बार फिर सुर्खियों में है ।
आरोप है कि फर्जी और कूट रचित बैनामा दिखाकर रकम ऐंठी गई , जबकि जमीन किसी और के नाम दर्ज थी । यह मुकदमा 3 दिसंबर को दर्ज हुआ था और इसकी जांच अब लोकपाल को सौंपी गई है ।कभी दोस्त , फिर दुश्मन - गैंगवार की अधूरी कहानी
सूत्रों के मुताबिक , विनय त्यागी के कई पुराने साथी बाद में उसके दुश्मन बन गए । हत्या , लूट , रंगदारी जैसे मामलों में नाम दर्ज होने के कारण उसकी दुश्मनी की सूची लंबी थी । हालांकि जानकारों की मानें तो यह मामला सिर्फ आपराधिक रंजिश का नहीं , बल्कि अरबों की बेनामी संपत्ति से गहराई से जुड़ा हुआ है ।क्या खुलेगा 780 करोड़ का पूरा सच ?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है - क्या जांच एजेंसियां 780 करोड़ रुपये के इस कथित काले साम्राज्य का पूरा सच सामने ला पाएंगी ? या फिर यह राज़ भी विनय त्यागी के साथ ही कब्र में दफन हो जाएगा ?
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