चम्पावत में किसानों के साथ सौतेला व्यवहार ? एक ही विकासखंड में दो अलग - अलग मानसून का खेल
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
मानसून आधारित फसल बीमा भुगतान पर भड़के किसान , सरकार से जवाब की मांग ।
चम्पावत ( Champawat ) - जनपद के विकासखंड पाटी में मानसून आधारित फसल बीमा को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है । भारतीय किसान यूनियन ब्लॉक कमेटी पाटी ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि एक ही विकासखंड के दो क्षेत्रों - खेतीखान और पाटी में किसानों के साथ खुला भेदभाव किया जा रहा है ।एक ही विकासखंड , फिर दो अलग नुकसान ?
किसानों का सवाल सीधा और तीखा है - क्या एक ही विकासखंड में मानसून अलग - अलग तरीके से बरसा ? क्या खेतीखान में फसलों को 30% नुकसान हुआ और पाटी में केवल 11% ? या फिर यह सब कागजों और दफ्तरों में बैठकर किया गया आंकलन है ?खेतीखान को 30% , पाटी को 11% बीमा—क्यों ?
किसानों का कहना है कि खेतीखान क्षेत्र में 30 प्रतिशत बीमा भुगतान तय किया गया है , जबकि पाटी क्षेत्र में मात्र 11 प्रतिशत । जबकि दोनों ही क्षेत्र एक ही विकासखंड में आते हैं और मौसम , बारिश और खेती की परिस्थितियां लगभग समान हैं ।गद्देदार कुर्सियों में बैठकर किया गया नुकसान का आंकलन
किसान यूनियन ने आरोप लगाया कि फसल नुकसान का मैदानी सर्वे किए बिना , केवल ऑफिसों की गद्देदार कुर्सियों पर बैठकर आंकड़े तय किए गए हैं ।
किसानों का कहना है कि असल हालात खेतों में हैं , फाइलों में नहीं ।किसान संगठनों का कड़ा विरोध
इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए किसान यूनियन ब्लॉक कमेटी पाटी के अध्यक्ष बहादुर सिंह मेहता , उपाध्यक्ष भगीरथ सोराड़ी , सचिव ललित मोहन गहतोड़ी , सदस्य भुवन चंद्र भट्ट , शिवराज सिंह मेहता , रमेश चंद्र , महेश चंद्र , सुनील , सुनीता , शांति देवी , सुशीला , भावना समेत कई किसानों ने एक स्वर में कहा कि यदि न्यायपूर्ण बीमा भुगतान नहीं हुआ , तो किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे ।सरकार से मांग - दोबारा हो निष्पक्ष सर्वे
किसानों ने मांग की है कि पाटी क्षेत्र में फसल नुकसान का दोबारा सर्वे कराया जाए , एक ही विकासखंड में समान मापदंड लागू हों । किसानों के साथ भेदभाव तत्काल खत्म किया जाए ।उठ रहे हैं कई सवाल , क्या जवाब देगी सरकार
किसानों का कहना है , क्या किसानों की मेहनत की कीमत सिर्फ आंकड़ों तक सीमित रह गई है ? क्या फसल बीमा योजना किसानों के लिए है या सिर्फ कागजी खानापूर्ति ? आंखिर कब मिलेगा पाटी के किसानों को उनका हक ?
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