कुमाऊं : सस्ता राशन या बीमारी का पैकेट ? सड़े चावल की आपूर्ति से मचा हड़कंप
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
पिथौरागढ़ ( Pithoragarh ) - सीमांत जिले में गरीबों को सस्ता और निशुल्क राशन देने की सरकारी योजना खुद सवालों के घेरे में आ गई है । जिले की कई सस्ता गल्ला दुकानों में उपभोक्ताओं को सड़ा , बदबूदार और कीड़ों से भरा चावल बांटने की कोशिश का मामला सामने आया है ।वीडियो का लिंक खबर के अंत में दिया गया है । हालत यह रही कि जैसे ही दुकानों में चावल की बोरियां खोली गईं , सफेद कीड़े फर्श और दीवारों पर रेंगते दिखे , जिसे देखकर उपभोक्ता सन्न रह गए और बिना राशन लिए ही लौट गए ।वीडियो का लिंक खबर के अंत में दिया गया है ।फर्श पर रेंगते कीड़े , बोरियों से निकला काला चावल
मामला पाभैं , डुंगरा और धारी सस्ता गल्ला दुकानों से जुड़ा है । बीते दिनों खाद्यान्न गोदाम से राशन इन दुकानों तक पहुंचा । जैसे ही बोरियां खोली गईं , उनमें से बदबू के साथ कीड़े बाहर निकल आए । जांच में सामने आया कि 40 क्विंटल से अधिक चावल पूरी तरह सड़ चुका था और काला पड़ गया था ।उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा - राशन नहीं , बीमारी बांटी जा रही
घटना के बाद उपभोक्ताओं में जबरदस्त आक्रोश है । लोगों का कहना है कि सरकार और पूर्ति विभाग सस्ता राशन नहीं बल्कि बीमारी बांट रहा है । उपभोक्ताओं ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए । वीडियो का लिंक खबर के अंत में दिया गया है ।चार साल पुराना राशन , पैकिंग पर दर्ज है 2022 का साल
मामले में चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ कि सड़े चावल की बोरियों पर पैकिंग वर्ष 2022 दर्ज है । यानी चार साल पुराना राशन अब उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है । सवाल उठ रहे हैं कि - यह राशन इतने साल कहां पड़ा रहा ? गोदामों में इसकी कोई जांच क्यों नहीं हुई ? बिना गुणवत्ता जांच के इसे दुकानों तक कैसे भेज दिया गया ?गोदामों में पहले से खराब पड़ा है लाखों क्विंटल राशन
सूत्रों के अनुसार , बीते वर्ष अक्तूबर और नवंबर में सस्ता गल्ला विक्रेताओं की हड़ताल के कारण दो महीने का राशन नहीं बंट सका था । यही राशन अब भी गोदामों में डंप है । बारिश के दौरान करीब डेढ़ लाख क्विंटल राशन खराब होने की बात सामने आई थी । आशंका जताई जा रही है कि उसी सड़े राशन को अब दुकानों में खपाया जा रहा है ।जांच के नाम पर पल्ला झाड़ता पूर्ति विभाग
मामला उजागर होने के बाद पूर्ति विभाग ने जांच की बात तो कही है , लेकिन फिलहाल जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा है । वहीं , उपभोक्ताओं का कहना है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी , तब तक ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति होती रहेगी ।जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ या सिस्टम की लापरवाही ?
यह मामला सिर्फ सड़े चावल का नहीं , बल्कि जनस्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता का है । सवाल यह है कि अगर गरीबों के हिस्से का राशन ही जहरीला निकले , तो योजना का मकसद क्या रह जाता है ?वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर टच करें
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