डर इतना कि , मासूम बच्चियों ने गाड़ी के पीछे गुजार दी पूरी रात
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चमोली ( Chamoli ) - जिले के ज्योतिर्मठ क्षेत्र में मंगलवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया , जब नेपाल के जिला जुमला मूल निवासी एक परिवार की दो मासूम बेटियां अचानक लापता हो गईं । बच्चियों की उम्र महज 11 साल और 6 साल होने के कारण मामला बेहद संवेदनशील बन गया ।सुबह 8:30 बजे पहुंचा परिवार , पुलिस ने तुरंत संभाली कमान
21 जनवरी की सुबह करीब 8:30 बजे परिजन बदहवास हालत में कोतवाली ज्योतिर्मठ पहुंचे और पुलिस को सूचना दी कि उनकी दोनों बेटियां बीती शाम से गायब हैं । किसी अनहोनी की आशंका से डरे परिजनों ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई ।वरिष्ठ उपनिरीक्षक विनोद रावत की अगुवाई में चला सर्च ऑपरेशन
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ उपनिरीक्षक विनोद रावत ने बिना समय गंवाए पुलिस फोर्स के साथ मोर्चा संभाला । परिजनों को ढांढस बंधाते हुए संभावित मार्गों , पार्किंग एरिया और आसपास के इलाकों में तेज सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया ।एक घंटे में बड़ी सफलता , 9:30 बजे मिलीं दोनों बच्चियां
पुलिस की मेहनत रंग लाई और सुबह करीब 9:30 बजे , दोनों बच्चियों को पंचवटी से मारवाड़ी जाने वाले पैदल रास्ते पर सकुशल बरामद कर लिया गया । बच्चियां सुरक्षित थीं , यह जानकर पुलिस और परिजनों दोनों ने राहत की सांस ली ।कुरकुरे बने डर की वजह , वजह जानकर पुलिस भी चौंकी
जब महिला कांस्टेबल ने बच्चियों से प्यार से बात की , तो जो वजह सामने आई , वह चौंकाने के साथ - साथ सोचने पर मजबूर करने वाली थी । बच्चियों ने बताया - कल शाम हमने कुरकुरे खाए थे । डर था कि घर जाने पर मम्मी-पापा डांटेंगे । इसी डर से हम घर के पास पार्किंग में खड़ी एक गाड़ी के पीछे छुप गईं और पूरी रात वहीं बिताई ।पुलिस ने निभाई जिम्मेदारी , बच्चियों और परिजनों की काउंसलिंग
चमोली पुलिस ने केवल बच्चियों को बरामद कर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की , बल्कि महिला कांस्टेबल के माध्यम से बच्चियों और परिजनों की काउंसलिंग भी कराई । बच्चियों को समझाया गया कि डर के कारण घर से भागना जानलेवा हो सकता है । वहीं परिजनों को बच्चों से प्यार , धैर्य और समझदारी से पेश आने की सलाह दी गई ।परिजनों ने जताया आभार , बोले - पुलिस ने बचाई हमारी दुनिया
अपनी लाडलियों को सुरक्षित पाकर परिजनों की आंखें भर आईं । उन्होंने चमोली पुलिस की तत्परता , संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार के लिए तहे दिल से धन्यवाद किया ।
यह घटना न सिर्फ पुलिस की मुस्तैदी का उदाहरण है , बल्कि समाज को यह भी सीख देती है कि बच्चों के साथ सख्ती नहीं , संवाद और विश्वास सबसे जरूरी है ।
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