19 मार्च 2026 से शुरू होगा हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्र - प्रसिद्ध कथावाचक प्रकाश कृष्ण शास्त्री
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत ( Champawat ) - उत्तराखंड के प्रसिद्ध कथावाचक प्रकाश कृष्ण शास्त्री ने स्पष्ट किया है कि 19 मार्च 2026 , गुरुवार से हिंदू नववर्ष (संवत्सर प्रतिपदा) और चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होगा । इस बार तिथि गणना को लेकर श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी , क्योंकि इसी दिन अमावस्या भी पड़ रही है ।जानिए , क्यों है भ्रम की स्थिति ?
दरअसल , हिंदू पंचांग के अनुसार नवरात्रि का आरंभ चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है । लेकिन 19 मार्च को अमावस्या होने के कारण लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि नवरात्रि की शुरुआत कैसे संभव है ।जानिए , शास्त्रों में क्या है नियम ?
प्रकाश कृष्ण शास्त्री के अनुसार , गत्संवत्सर में 19 मार्च 2026 गुरुवार अमावस्या को प्रतिपदा में ही नवरात्र आरम्भ करने का निर्देश है । इस प्रकार की स्थिति के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं । यथा - परदिने प्रतिपदोऽत्यन्ता सत्वे तु दर्शयुतापि पूर्वैवग्राह्या ।
यदि प्रतिपदा तिथि अगले दिन बहुत कम समय के लिए हो या सूर्योदय को स्पर्श ही न करे या एक मुहूर्त (लगभग 48 मिनट) से कम रहे तो ऐसी स्थिति में अमावस्या (दर्श) से युक्त प्रतिपदा को ही पर्व के लिए मान्य माना जाता है । ( निर्णय सिंधु ) धर्म सिंधुकार ने भी यही कहा है - प्रतिपदो मुहूर्तन्यून - व्याप्तो सूर्योदयास्पर्श वा दर्शयुतापि ग्राह्या ।19 मार्च को ही क्यों होगा नवरात्रारंभ ?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार 19 मार्च 2026 को अमावस्या तिथि सुबह 06:53 बजे समाप्त हो जाएगी । इसके बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हो जाएगी , लेकिन यह सूर्योदय पर पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं है । ऐसी स्थिति में शास्त्रों के अनुसार अमावस्या युक्त प्रतिपदा (पूर्व दिन) को ही ग्रहण किया जाता है । इसलिए 19 मार्च 2026 को ही नवरात्रि प्रारंभ और कलश स्थापना करना पूर्णतः शास्त्रसम्मत है ।कलश स्थापना का शुभ समय
अमावस्या समाप्ति के बाद , प्रातः 06:53 बजे के पश्चात कलश स्थापना करना शुभ माना गया है । श्रद्धालु इस समय से नवरात्रि पूजन आरंभ कर सकते हैं । तिथि क्षय और अमावस्या के संयोग के बावजूद , शास्त्रीय आधार पर 19 मार्च 2026 को ही नवरात्रि और हिंदू नववर्ष की शुरुआत मानना उचित और प्रमाणित है । श्रद्धालु बिना किसी संशय के इसी दिन से पूजा-पाठ प्रारंभ करें ।
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