अतिक्रमण : डीएम बंसल का बुलडोजर बनाम चम्पावत की खामोशी ! आखिर कहां गया मॉडल जिला
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
देहरादून में बुलडोजर एक्शन , चम्पावत में सन्नाटा : आखिर क्यों अलग - अलग है प्रशासन का मिजाज ?
देहरादून ( Dehradun ) - में एक बार फिर सख्त प्रशासन की तस्वीर सामने आई है । जिलाधिकारी सविन बंसल ने दिखा दिया कि अगर नीयत साफ हो तो कार्रवाई में देर नहीं लगती । चकतुनवाला क्षेत्र में एक प्रॉपर्टी डीलर की दबंगई तब धराशायी हो गई , जब स्थानीय लोगों की शिकायत सीधे डीएम तक पहुंची । मामला था जमीन पर अवैध कब्जे का , जहां दीवार खड़ी कर दी गई थी । डीएम ने तुरंत तहसीलदार सदर और राजस्व टीम को मौके पर भेजा और जांच में शिकायत सही निकली ।तुरंत गिराओ ! आदेश और एक्शन साथ-साथ
जैसे ही सच्चाई सामने आई , डीएम बंसल ने बिना समय गंवाए आदेश दिया - अवैध दीवार तुरंत गिराई जाए । फिर क्या था , पुलिस बल के साथ टीम पहुंची और बुलडोजर चलाकर दीवार को मिनटों में जमींदोज कर दिया ।डीएम का स्पष्ट संदेश , देहरादून में मनमानी नहीं चलेगी
डीएम का साफ संदेश है कि , देहरादून में आम जनता परेशान नहीं होगी ।
डीएम ने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए हैं - जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए । शिकायत आएगी तो कार्रवाई भी होगी , वो भी फौरन ।चम्पावत में क्यों ठंडी पड़ी है कार्रवाई ?
जहां देहरादून में कार्रवाई की रफ्तार तेज है , वहीं मॉडल जिला कहे जाने वाले चम्पावत के पाटी नगर पंचायत में प्रशासन की कार्यशैली सवालों के घेरे में है । यहां वन पंचायत की जमीन पर दर्जनों अवैध कब्जे हो चुके हैं , जिनमें कच्चे भी हैं और पक्के भी । हैरानी की बात ये है कि , शिकायत के बाद प्रशासन खुद 26 अतिक्रमण चिन्हित कर चुका है , लेकिन कार्रवाई अभी तक शून्य ।ये अतिक्रमणकारियों को संरक्षण है या लाचारी ?
लगातार शिकायतों के बावजूद कोई एक्शन न होना कई सवाल खड़े करता है । यहां , न हो शिकायतों पर अमल हो रहा है और न ही खबरों का संज्ञान लिया जा रहा है । यहां अक्सर अतिक्रमणकारी कहते नजर आते हैं कि - कोई हिलाकर दिखा दे एक ईंट भी । अब सबसे बड़ा सवाल ये उठने लगा है कि - क्या अतिक्रमणकारियों को संरक्षण मिल रहा है ? या फिर प्रशासन दबाव में है ? या मॉडल जिला सिर्फ कागजों में ही मॉडल है ?एक जिले में बुलडोजर , दूसरे में चुप्पी क्यों ?
देहरादून में जहां शिकायत पर तुरंत बुलडोजर चलता है , वहीं चम्पावत में फाइलें धूल खा रही हैं । अब जनता पूछ रही है - कानून का पैमाना अलग-अलग क्यों ? अगर प्रशासन सच में जनता के साथ है , तो चम्पावत में भी देहरादून जैसा एक्शन दिखना चाहिए । वरना मॉडल जिला का टैग सिर्फ एक मजाक बनकर रह जाएगा ।
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