वीडियो : चमोली का रम्माण , जहां मुखौटा नृत्य में उतर आते हैं भगवान
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
सलूड़-डुंगरा गांव बना आस्था और परंपरा का केंद्र ।
चमोली ( Chamoli ) - जिले के जोशीमठ विकासखंड के सीमांत सलुड़-डुंगरा गांव में 13 दिवसीय विश्व प्रसिद्ध रम्माण उत्सव का भव्य समापन हर्षोल्लास और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुआ । 14 अप्रैल से 26 अप्रैल तक चले इस ऐतिहासिक मेले में उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक परंपराओं का अनोखा संगम देखने को मिला । वीडियो का लिंक खबर के अंत में दिया गया है ।डोल-दमाऊ की गूंज पर थिरके देवभूमि के लोग
मेले में डोल-दमाऊ की 18 पारंपरिक तालों पर प्रस्तुत पौराणिक मुखौटा नृत्य ने हजारों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति ने मानो प्राचीन लोककथाओं को सजीव कर दिया । वीडियो का लिंक खबर के अंत में दिया गया है ।UNESCO की सूची में दर्ज है रम्माण
यह आयोजन सिर्फ एक मेला नहीं , बल्कि जीवंत लोक परंपरा का अद्भुत उदाहरण है , जिसे UNESCO द्वारा विश्व की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का दर्जा प्राप्त है । रम्माण उत्सव को आदि गुरु शंकराचार्य की परंपरा से भी जोड़ा जाता है , जो प्रकृति और मानव के गहरे संबंध को दर्शाता है । वीडियो का लिंक खबर के अंत में दिया गया है ।मुखौटा नृत्य में दिखे पौराणिक प्रसंग
मुख्य आकर्षण मुखौटा नृत्य में माल्यौण , मोर-मोरियीण , बणिया-बणियाण और माल युद्ध जैसे पारंपरिक प्रसंगों के साथ भगवान राम , सीता , लक्ष्मण और हनुमान की झांकियों ने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति कराई ।उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का वैश्विक मंच
सलूड़ का रम्माण मेला न केवल उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करता है , बल्कि भारतीय परंपराओं की जीवंत विरासत को वैश्विक पहचान भी दिलाता है । यहां लोक , धर्म और प्रकृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है ।वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर टच करें
यूट्यूब पर देखें -https://youtube.com/shorts/UCOQwZZ7Ovw?si=oxePesPd41UXcFCh
फेसबुक पर देखें -https://www.facebook.com/share/r/18PWA6T4KA/
रम्माण उत्सव चमोली, सलुड़ डुंगरा रम्माण मेला, उत्तराखंड सांस्कृतिक उत्सव, UNESCO अमूर्त सांस्कृतिक विरासत, जोशीमठ समाचार, बद्री विशाल जयघोष, उत्तराखंड लोक संस्कृति, Chamoli Ramman Festival, Uttarakhand News Hindi