चम्पावत : जिले में वनाग्नि ने बढ़ाई टेंशन ! दमा मरीजों और बुजुर्गों के लिए खतरे की घंटी
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
वनाग्नि ने बढ़ाई गर्मी की मार , 5 दिनों में 4 डिग्री चढ़ा पारा , बच्चों-बुजुर्गों पर खतरा ।
चम्पावत ( Champawat ) - पहाड़ी जिले चम्पावत में इस वक्त गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है । जिले के जंगल एक बार फिर भीषण वनाग्नि की चपेट में हैं । पहाड़ों से उठता धुआं अब गांवों और आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहा है । जंगलों में लगी आग सिर्फ पेड़ों को ही नहीं निगल रही , बल्कि वन्यजीवों की जिंदगी भी राख में बदल रही है । स्थानीय लोग कह रहे हैं कि इस बार की गर्मी पिछले सालों के मुकाबले कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है । हालात इतने गंभीर हैं कि बीते 5 दिनों में जिले के तापमान में करीब 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है ।धुएं से घुट रही सांसें , दमा मरीजों की बढ़ी चिंता
वनाग्नि से उठने वाला जहरीला धुआं अब लोगों की सेहत पर सीधा असर डाल रहा है । खासकर बच्चों , बुजुर्गों और दमा के मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक बनती जा रही है । चिकित्सकों का कहना है कि लगातार धुएं के संपर्क में रहने से सांस संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ सकती हैं । कई इलाकों में लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत भी होने लगी है ।जंगलों में मची तबाही , निरीह वन्यजीव जिंदा जलने को मजबूर
भीषण आग की वजह से जंगलों की हरियाली तेजी से खत्म हो रही है । वन संपदा राख हो रही है और कई निरीह वन्यजीव आग में फंसकर अपनी जान गंवा रहे हैं । विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इसी तरह जंगल जलते रहे तो आने वाले समय में पर्यावरणीय संतुलन पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है ।वन विभाग अलर्ट मोड पर , फायर वाचरों की बढ़ाई जा रही संख्या
उत्तराखंड हिंदी समाचार से बातचीत में जिले के वन क्षेत्राधिकारियों ने बताया कि वन विभाग की टीमें लगातार आग पर काबू पाने के लिए दिन-रात जुटी हुई हैं । उन्होंने कहा कि जंगलों में फायर वाचरों की संख्या बढ़ाई जा रही है और सड़कों के किनारे जमा पिरुल हटाया जा रहा है ताकि राहगीरों की लापरवाही से आग न फैले । अधिकारियों का कहना है कि बढ़ती गर्मी के कारण वनाग्नि की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और आम जनता का सहयोग बेहद जरूरी है ।देर रात सड़क किनारे पार्टियां बन रहीं खतरे की वजह
वन अधिकारियों ने चिंता जताई कि कई लोग देर रात तक सड़क किनारे बैठकर पार्टी कर रहे हैं । लापरवाही से फेंकी गई बीड़ी , सिगरेट या जलती लकड़ी जंगलों में आग फैलाने का बड़ा कारण बन रही है । वन विभाग ने लोगों से अगले एक सप्ताह तक विशेष सावधानी बरतने और वनाग्नि रोकथाम में सहयोग करने की अपील की है ।अगर जंगल बचाने हैं तो बढ़ानी होगी मैनपावर और तकनीक
विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि उत्तराखंड के जंगलों को बचाने के लिए सिर्फ पारंपरिक तरीकों से काम नहीं चलेगा । वनों को चिन्हित कर हर हाल में उन्हें बचाने का प्रयास करना होगा , फायर वाचरों की संख्या बढ़ानी होगी , आधुनिक तकनीक , ड्रोन निगरानी , तेज रिस्पॉन्स सिस्टम और ज्यादा मैनपावर की जरूरत है । वरना हर साल जंगलों में लगने वाली आग पर्यावरण और मानव जीवन दोनों के लिए बड़ा संकट बनती जाएगी ।पर्यावरण पर मंडराता बड़ा खतरा
वनाग्नि सिर्फ पेड़ों को नहीं जलाती , बल्कि यह पहाड़ों की जैव विविधता , जल स्रोतों और मौसम चक्र को भी प्रभावित करती है । लगातार बढ़ती आग की घटनाएं आने वाले समय में जल संकट और भूस्खलन जैसी समस्याओं को भी बढ़ा सकती हैं । चम्पावत में धधकते जंगल अब सिर्फ एक जिला समस्या नहीं , बल्कि पूरे उत्तराखंड के पर्यावरण के लिए चेतावनी बन चुके हैं ।
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