BREAKING : चम्पावत जिले की जिपं सीट शक्तिपुरबंगा पर सस्पेंस बरकरार ! हाईकोर्ट के स्टे के बाद कृष्णानंद जोशी को बड़ी राहत
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत से सूरज लडवाल की रिपोर्ट
शक्तिपुरखुंगा सीट पर सियासी संग्राम तेज , जिला न्यायालय के फैसले पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक ।
चम्पावत ( Champawat ) - जिले की पंचायत राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है । नैनीताल हाईकोर्ट ने चंपावत जिले की चर्चित शक्तिपुरखुंगा जिला पंचायत सीट मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए जिला न्यायालय के आदेश पर स्टे लगा दिया है । इससे सीट बचाने की लड़ाई लड़ रहे विजेता प्रत्याशी कृष्णानंद जोशी को बड़ी राहत मिल गई है ।जानिए , क्या है पूरा मामला ?
दरअसल , जिला पंचायत शक्तिपुरखुंगा सीट से विजयी हुए कृष्णानंद जोशी का नाम कथित तौर पर दो अलग-अलग मतदाता सूचियों में दर्ज पाया गया था । इसी आधार पर प्रतिद्वंदी और भाजपा समर्थित प्रत्याशी मनमोहन सिंह बोहरा ने जिला न्यायालय में चुनाव याचिका दायर की थी । जिला न्यायालय चंपावत ने 28 अप्रैल को बड़ा फैसला सुनाते हुए कृष्णानंद जोशी का चुनाव रद्द कर दिया था और सीट को रिक्त घोषित कर दिया था । हालांकि दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी मनमोहन सिंह बोहरा को विजयी घोषित करने की मांग खारिज कर दी गई थी ।अब हाईकोर्ट ने पलटा पूरा खेल
अब नैनीताल हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की बेंच ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि केवल दो जगह मतदाता सूची में नाम होना चुनाव में फर्जीवाड़े की श्रेणी में नहीं आता । इस आधार पर चुनाव रद्द नहीं किया जा सकता । हाईकोर्ट ने जिला न्यायालय के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है और राज्य निर्वाचन आयोग से दो सप्ताह में जवाब तलब किया है । मामले की अगली सुनवाई एक जुलाई को होगी ।पंचायत चुनाव की सबसे चर्चित सीट बनी शक्तिपुरखुंगा
हरिद्वार को छोड़कर जुलाई 2025 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में चंपावत की शक्तिपुरखुंगा सीट सबसे ज्यादा चर्चाओं में रही । यहां मुकाबला बेहद कांटे का था । कृष्णानंद जोशी ने मनमोहन सिंह बोहरा को 345 वोटों से हराया था । कृष्णानंद जोशी की 2259 वोट , मनमोहन सिंह बोहरा को 1914 वोट , मनीष महर को 1734 वोट , दिनेश चंद्र चौड़ाकोटी 1041 वोट और चंद्र सिंह को 812 वोट मिले थे ।हाईकोर्ट के फैसले के बाद जोशी के समर्थकों में उत्साह
हाईकोर्ट के फैसले के बाद कृष्णानंद जोशी समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है । वहीं राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि अंतिम फैसला भी जोशी के पक्ष में आता है तो यह पंचायत राजनीति में बड़ा संदेश देगा । दूसरी ओर भाजपा समर्थित खेमे में इस फैसले को लेकर हलचल बढ़ गई है । अब सबकी निगाहें एक जुलाई की अगली सुनवाई पर टिकी हैं , जहां इस हाई प्रोफाइल पंचायत विवाद पर बड़ा फैसला सामने आ सकता है । यह मामला अब सिर्फ एक पंचायत सीट तक सीमित नहीं रह गया है । उत्तराखंड की राजनीति में यह बहस तेज हो गई है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम तकनीकी कारणों से दो मतदाता सूचियों में दर्ज हो जाए तो क्या उसका चुनाव ही रद्द कर दिया जाना चाहिए या नहीं ? फिलहाल , हाईकोर्ट की शुरुआती टिप्पणी ने कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों को राहत का संकेत दे दिया है ।
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