चम्पावत : भिंगराड़ा वन विभाग का जंगलों को आग से बचाने के लिए पिरूल संग्रह अभियान जारी
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
रिपोर्ट - दीपक शर्मा
चम्पावत ( Champawat ) - गर्मी बढ़ते ही चम्पावत जिले के भिंगराड़ा वन क्षेत्र में जंगलों पर आग का खतरा मंडराने लगा है । चीड़ के पेड़ों से गिरने वाली सूखी पत्तियां यानी पिरुल जंगलों में आग फैलाने का सबसे बड़ा कारण बन रही हैं । ऐसे में वन विभाग ने जंगलों को आग की तबाही से बचाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है । वन विभाग के कर्मचारी जंगलों और सड़कों के किनारे जमा सूखी पत्तियों व ज्वलनशील कचरे को साफ करने में जुटे हैं । जंगलों को सुरक्षित रखने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया जा रहा है ।जंगलों में बनाई जा रही फायर लाइन , आग फैलने पर लगेगी रोक
वन विभाग द्वारा जंगलों में विशेष अग्निरक्षा पथ यानी फायर लाइन तैयार की जा रही हैं । इन रास्तों का मकसद यह है कि यदि किसी हिस्से में आग लग जाए तो वह तेजी से दूसरे हिस्से तक न फैल सके । विशेषज्ञों के अनुसार , गर्मियों में हल्की सी चिंगारी भी हजारों हेक्टेयर जंगल को राख में बदल सकती है । ऐसे में फायर लाइन जंगलों के लिए सुरक्षा कवच का काम कर रही है ।अब वनकर्मी भी हाईटेक ! मिल रहे इलेक्ट्रिक स्मार्ट स्ट्रीक और बियर स्प्रे
जंगलों में गश्त करने वाले वनकर्मियों को अब आधुनिक सुरक्षा उपकरण भी दिए जा रहे हैं । हिंसक जानवरों से बचाव के लिए उन्हें इलेक्ट्रिक स्मार्ट स्ट्रीक और बियर स्प्रे उपलब्ध कराए गए हैं , ताकि वे सुरक्षित रहकर जंगलों की निगरानी कर सकें । वन विभाग का कहना है कि कर्मचारियों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है जितनी जंगलों की ।ग्रामीणों को बनाया जा रहा जंगल प्रहरी
भिंगराड़ा वन विभाग , वन सुरक्षा समितियों के साथ मिलकर ग्रामीणों को जागरूक करने में जुटा है । लोगों को पिरुल एकत्रित करने , जंगलों में आग न लगाने और आग लगने पर तुरंत सूचना देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है । इकट्ठा किए गए पिरुल से ब्रिकेट्स बन रहे हैं , जिनकी बाजारों में अच्छी मांग है । वनों की सुरक्षा में योगदान देने वाले कर्मचारियों और ग्रामीणों को सम्मानित भी किया जा रहा है , जिससे लोगों में जंगल बचाने का उत्साह बढ़ रहा है ।जंगल बचाना सबकी जिम्मेदारी - हिमालय सिंह टोलिया
वन क्षेत्राधिकारी हिमालय सिंह टोलिया ने कहा कि वन हमारी अमूल्य धरोहर हैं और इन्हें बचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है । उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी जंगल में आग दिखाई दे तो तुरंत वन हेल्पलाइन 1926 या क्षेत्रीय वन कार्यालय को सूचना दें । उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के सहयोग के बिना जंगलों को आग से बचाना संभव नहीं है ।जंगल बचेंगे तो भविष्य बचेगा
उत्तराखंड के जंगल केवल हरियाली नहीं बल्कि जल , जीवन और पर्यावरण का आधार हैं । हर साल लगने वाली वनाग्नि करोड़ों की वन संपदा और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाती है । ऐसे में भिंगराड़ा वन विभाग की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है ।
चम्पावत वनाग्नि, भिंगराड़ा वन विभाग, जंगलों में आग, उत्तराखंड वन विभाग, पिरुल से आग, forest fire Champawat, Uttarakhand forest news, वन सुरक्षा समिति, जंगल बचाओ अभियान, हिमालय सिंह टोलिया, उत्तराखंड हिंदी समाचार, forest fire prevention Uttarakhand, पर्यावरण संरक्षण, जंगलों की सुरक्षा, Uttarakhand latest news
खबर से जुड़ी अन्य तस्वीरें: