पिथौरागढ़ में रेबीज का कहर : मौत के साए में जी रहा जुम्मा गांव , 20 दिनों में दो मासूमों की जान , आठ और गांवों पर मंडरा रहा खतरा
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
आवारा पिल्ले के आतंक ने उजाड़ीं खुशियां , गांव में पसरा मातम और दहशत ।
धारचूला के जुम्मा गांव में रेबीज का खौफ , बच्चों की मौत के बाद सहमे ग्रामीण , कई घरों में नहीं जले चूल्हे ।
पिथौरागढ़ ( Pithoragarh ) - उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के धारचूला क्षेत्र स्थित जुम्मा गांव इन दिनों गहरे सदमे और भय के साए में जी रहा है । जिस गांव में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं , वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है । एक लावारिस पिल्ले के काटने से फैले रेबीज संक्रमण ने पूरे गांव को दहशत में डाल दिया है । बीते 20 दिनों के भीतर दो बच्चों की दर्दनाक मौत ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है ।20 दिन में दो मासूमों की मौत , गांव में पसरा मातम
जानकारी के अनुसार , रेबीज संक्रमण की चपेट में आने से दो बच्चों की मौत हो चुकी है । इन मौतों के बाद गांव में मातम का माहौल है । कई परिवार सदमे में हैं और लोगों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे । ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की मौत के बाद से गांव में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है ।मां को नहीं मिला बेटे का अंतिम दर्शन , दर्दनाक कहानी ने रुलाया गांव
रेबीज संक्रमण से जान गंवाने वाले छात्र युवराज धामी की मौत जिला अस्पताल में हुई थी । बताया जा रहा है कि उस समय उसकी मां ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में कीड़ाजड़ी संग्रह के लिए गई हुई थी । जब तक वह गांव लौटी , तब तक बेटे का अंतिम संस्कार हो चुका था । अपने इकलौते बेटे का अंतिम चेहरा तक न देख पाने का दर्द मां और परिवार को भीतर तक तोड़ गया है ।दो पीड़ित अब भी गांव से दूर , खतरे की आशंका बरकरार
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार , जिस पिल्ले ने लोगों को काटा था , उसके शिकार हुए दो लोग अभी भी गांव से बाहर ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद हैं । उन्हें अब तक गांव में हुई घटनाओं और अपने ऊपर मंडरा रहे खतरे की पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है । स्वास्थ्य विभाग लगातार उनकी तलाश और संपर्क में जुटा हुआ है ।पिता और दो बच्चों पर भी खतरा , पूरे परिवार में चिंता
ग्रामीणों के मुताबिक , जिस पिल्ले ने दो बच्चों को काटा था , उसने एक ही परिवार के तीन अन्य सदस्यों को भी अपना शिकार बनाया था । इनमें पिता और उनके दो बच्चे शामिल हैं । रेबीज संक्रमण के मामले सामने आने के बाद यह परिवार भी भय और चिंता के बीच दिन गुजार रहा है ।आठ और गांवों पर खतरे की घंटी , स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस क्षेत्र में यह घटना हुई , वहां आसपास के करीब आठ गांवों में भी खतरा बना हुआ है । स्वास्थ्य विभाग ने एहतियातन कई लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई है और ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है । हालांकि लोगों में डर अभी भी कम नहीं हुआ है ।विशेषज्ञों ने दी चेतावनी , जानवर के काटने को न लें हल्के में
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध कुत्ते या जानवर के काटने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना और एंटी-रेबीज टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है । थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है । जुम्मा गांव की यह त्रासदी केवल एक गांव की कहानी नहीं , बल्कि पूरे पहाड़ी क्षेत्र के लिए चेतावनी है । समय पर इलाज , जागरूकता और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच ही ऐसी घटनाओं को रोक सकती है । फिलहाल जुम्मा गांव अपने खोए हुए बच्चों के गम और भविष्य की चिंता के बीच जीवन गुजारने को मजबूर है ।
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