चम्पावत : देशभर में बना मिसाल , लेकिन अपने ही जिले में बेबस ! आखिर क्यों मदद को तरस रहा चम्पावत का यह किसान ?
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत से सूरज लडवाल की विशेष रिपोर्ट
रिवर्स पलायन की मिसाल पर संकट ! चम्पावत के हर्बल किसान तुलसी प्रसाद बोले - सुविधाएं नहीं मिलीं तो छोड़ना पड़ेगा सपना ।
चम्पावत ( Champawat ) - जिले में लॉकडाउन के दौरान जब हजारों लोग शहरों से गांव लौटे , तब अधिकांश लोग भविष्य को लेकर चिंतित थे । लेकिन चम्पावत जिले की ग्राम पंचायत बालातड़ी के तोक जनेड़ा निवासी तुलसी प्रसाद ने हालात के आगे हार मानने के बजाय रिवर्स पलायन को अवसर में बदलने का फैसला किया । उन्होंने पहाड़ में ही स्वरोजगार की नई राह खोजते हुए औषधीय और हर्बल खेती शुरू की , जो आज पूरे क्षेत्र के लिए मिसाल बन चुकी है ।काली हल्दी से लेकर लाकाडोंग तक... हर्बल फार्म बना आकर्षण का केंद्र
तुलसी प्रसाद के हर्बल फार्म में आज काली हल्दी , सफेद हल्दी , रोजमैरी , मेघालय की प्रसिद्ध लाकाडोंग हल्दी , तुलसी , रीठा , गुड़हल समेत कई दुर्लभ और औषधीय पौधों की खेती की जा रही है । तुलसी भट्ट ने बताया उनके फार्म में देश के अलग-अलग राज्यों से शोधार्थी , पीएचडी स्कॉलर , प्रकृति प्रेमी और औषधीय पौधों पर अध्ययन करने वाले लोग यहां पहुंचकर जानकारी हासिल कर चुके हैं ।हिमालयी उत्पादों से तैयार कर रहे खास हर्बल चाय
तुलसी प्रसाद केवल खेती तक सीमित नहीं हैं । वे हिसालू , किल्मोड़ा , बुरांश , बिच्छू घास , आर्टिमिसिया और अमरूद की पत्तियों जैसे हिमालयी उत्पादों से विशेष हर्बल चाय तैयार कर बाजार में उपलब्ध करा रहे हैं । उनके उत्पादों को लगातार पहचान मिल रही है और स्थानीय संसाधनों को नया बाजार भी मिल रहा है ।8 से 10 लोगों को दिया रोजगार , कई परिवारों की बनी आजीविका
रिवर्स पलायन की यह कहानी सिर्फ तुलसी प्रसाद तक सीमित नहीं है । उन्होंने क्षेत्र के 8 से 10 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराया है । साथ ही ग्रामीणों से हिमालयी औषधीय पौधे और वन उत्पाद खरीदकर उनकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग कर बाजार तक पहुंचा रहे हैं । इससे कई परिवारों की आय बढ़ी है और पहाड़ के पारंपरिक ज्ञान को भी नई पहचान मिली है ।जंगली जानवरों का आतंक बना सबसे बड़ा संकट
जहां एक ओर यह हर्बल फार्म सफलता की नई कहानी लिख रहा है , वहीं दूसरी ओर मूलभूत सुविधाओं का अभाव इस प्रयास पर भारी पड़ रहा है । तुलसी प्रसाद का कहना है कि जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक से उनकी फसलें और औषधीय पौधे लगातार नुकसान झेल रहे हैं । वर्षों की मेहनत से तैयार किए गए पौधों को भारी क्षति पहुंच रही है ।पानी की किल्लत और तारबाड़ ने बढ़ाई मुश्किलें , जनप्रतिनिधियों से कई बार लगा चुके गुहार
तुलसी प्रसाद के अनुसार फार्म में सिंचाई और पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है । उन्होंने बताया कृषि विभाग को उन्होंने दूरभाष व व्हाट्सएप के माध्यम से सुरक्षा के लिए तारबाड़ (फेंसिंग) और पानी की स्थायी व्यवस्था की मांग की , उन्हें आश्वासन भी दिया गया था लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है । अब सुविधाओं के अभाव में उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है ।मजबूरन छोड़ना पड़ सकता है रिवर्स पलायन का सपना
तुलसी प्रसाद का कहना है कि यदि समय रहते फार्म की सुरक्षा और पानी की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो उन्हें मजबूरन अपने इस सपने पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है । उन्होंने एक बार फिर उत्तराखंड हिंदी समाचार के माध्यम से प्रशासन से जल्द तारबाड़ और सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है , ताकि पहाड़ में स्वरोजगार और रिवर्स पलायन की यह सफल मिसाल आगे भी कायम रह सके ।चिंता बढ़ाता है ये बड़ा सवाल
जिस व्यक्ति ने पहाड़ में रोजगार सृजन , स्थानीय उत्पादों को बाजार और ग्रामीणों को आय का साधन दिया , क्या उसे मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पाएंगी ? अगर ऐसी सफल पहल ही उपेक्षा का शिकार होंगी तो पहाड़ में रिवर्स पलायन और स्वरोजगार के सपनों को कैसे मजबूती मिलेगी ?
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