चिंता : खाली गांवों में बस गया मौत का शिकारी ! उत्तराखंड के घोस्ट विलेज में गुलदार का कब्जा
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
घोस्ट विलेज बने गुलदारों का अड्डा , पहाड़ में बढ़ता खौफ ।
पलायन की मार से खाली हुए गांवों में इंसानों पर टूट रहा मौत का साया ।
देहरादून ( Dehradun ) - उत्तराखंड के पहाड़ों में पलायन की त्रासदी अब एक नए और खतरनाक संकट को जन्म दे रही है । खाली होते गांव , वीरान मकान और सुनसान रास्ते अब गुलदारों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनते जा रहे हैं । हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि घोस्ट विलेज के आसपास रहने वाले लोग हर दिन मौत के साये में जीने को मजबूर हैं ।पांच महीने में 14 मौतें , पहाड़ में बढ़ा गुलदार का आतंक
वन विभाग के आंकड़े डराने वाले हैं । जनवरी से मई के बीच राज्य में गुलदार के हमलों में 14 लोगों की जान जा चुकी है , जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं । सबसे अधिक असर पौड़ी और अल्मोड़ा जिलों में देखा जा रहा है , जहां गांवों के खाली होने का सीधा फायदा गुलदार उठा रहे हैं ।खाली मकान बने शिकारी का अड्डा
पलायन के कारण हजारों मकान वीरान पड़े हैं । इन मकानों के आसपास उगी झाड़ियां , सुनसान गलियां और जंगल से सटे इलाके गुलदारों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुके हैं । यही वजह है कि अब गुलदार गांवों के भीतर तक पहुंच रहे हैं और लोगों पर हमला कर रहे हैं । ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलते ही गांवों में सन्नाटा पसर जाता है और लोग घरों से निकलने में डर महसूस करते हैं ।पौड़ी और अल्मोड़ा सबसे ज्यादा प्रभावित
पौड़ी गढ़वाल और अल्मोड़ा जिले गुलदार हमलों की सबसे बड़ी मार झेल रहे हैं । कई गांवों में महिलाएं और बच्चे अकेले बाहर निकलने से डर रहे हैं । खेतों में काम करना और मवेशी चराना भी जोखिम भरा हो गया है ।मां के साथ घूम रहे शावक बढ़ा रहे खतरा
वन विशेषज्ञों के अनुसार गुलदार अक्सर मानव आबादी के आसपास रहना पसंद करता है । वीरान गांव , झाड़ियां और सुनसान क्षेत्र उसके लिए आदर्श ठिकाने बन जाते हैं । कई इलाकों में मादा गुलदार अपने शावकों के साथ देखी गई हैं , जिससे हमलों का खतरा और बढ़ गया है ।आंकड़े बता रहे भयावह तस्वीर
* पौड़ी में सबसे अधिक मौतें और हमले।
* अल्मोड़ा दूसरे स्थान पर ।
* नैनीताल , पिथौरागढ़ और टिहरी में भी लगातार बढ़ रहे हमले ।
* कई जिलों में दर्जनों लोग घायल हुए हैं ।
* वन विभाग के लिए चुनौती बनता जा रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष ।पहाड़ों से पलायन का दर्द अब बन रहा है जानलेवा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहाड़ों से पलायन नहीं रुका तो आने वाले वर्षों में घोस्ट विलेज की संख्या और बढ़ेगी । इससे मानव और वन्यजीव संघर्ष और भी गंभीर रूप ले सकता है । खाली गांवों में मानवीय गतिविधियां बढ़ाने , झाड़ियों की सफाई और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करने की जरूरत महसूस की जा रही है ।ग्रामीणों में दहशत , सरकार से कार्रवाई की मांग
गांवों के लोगों का कहना है कि शाम होते ही बच्चे घरों में कैद हो जाते हैं । महिलाएं जंगल और खेतों में जाने से डरती हैं । ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने , कैमरा ट्रैप लगाने और संवेदनशील इलाकों में त्वरित कार्रवाई की मांग की है ।क्या पहाड़ के खाली गांव बनेंगे मौत के गांव ?
उत्तराखंड के घोस्ट विलेज केवल पलायन की कहानी नहीं कह रहे , बल्कि अब वे एक नए संकट का संकेत भी बन चुके हैं । अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो खाली होते गांवों में गुलदारों का बढ़ता आतंक पहाड़ की सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है ।
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