बड़ी खबर : उत्तराखंड में वोटरों की बड़ी सफाई ! 8.26 लाख नाम हटे , कई सीटों का चुनावी गणित बदलने के संकेत
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) के बाद सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े , देहरादून , हरिद्वार , ऊधमसिंह नगर , अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में सबसे बड़ा असर , 11 सितंबर तक चलेगा दावा-आपत्ति का दौर ।
देहरादून ( Dehradun ) - उत्तराखंड में आगामी विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-2026) ने प्रदेश की चुनावी तस्वीर बदल दी है । निर्वाचन आयोग की ओर से जारी प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार राज्य की मतदाता सूची से 8,26,977 मतदाता कम हो गए हैं , जबकि करीब 19 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में विभिन्न प्रकार की विसंगतियां सामने आई हैं । इन आंकड़ों ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है , क्योंकि जिन जिलों में सबसे अधिक मतदाता कम हुए हैं , वहीं प्रदेश की बड़ी संख्या में विधानसभा सीटें भी स्थित हैं ।एक साल में 13 लाख से ज्यादा मतदाता घटे , बदली चुनावी तस्वीर
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार , वर्ष 2025 की अंतिम मतदाता सूची में उत्तराखंड में 84,29,459 मतदाता दर्ज थे । विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद यह संख्या घटकर 71,33,785 रह गई है । यानी लगभग 13 लाख मतदाता कम दर्ज हुए हैं । निर्वाचन विभाग का कहना है कि यह कमी केवल नाम हटाने का परिणाम नहीं है , बल्कि इसमें मृतक , स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले गए मतदाता , एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नाम , अपात्र मतदाता तथा अन्य तकनीकी कारण भी शामिल हैं ।एसआईआर में 8.26 लाख नाम हटे , सबसे ज्यादा असर इन जिलों में
विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जिन जिलों में सबसे अधिक मतदाता कम हुए हैं, उनमें -
* देहरादून - 1,86,008
* ऊधमसिंह नगर - 1,77,673
* हरिद्वार - 1,30,203
* अल्मोड़ा - 55,485
* पौड़ी - 51,359
* नैनीताल - 71,810
* पिथौरागढ़ - 27,436
* चमोली - 23,436
* टिहरी - 43,625
* बागेश्वर - 13,010
* चंपावत - 17,718
* उत्तरकाशी - 18,405
* रुद्रप्रयाग - 10,809 शामिल हैं ।19 लाख रिकॉर्ड में मिली गड़बड़ी , अब शुरू होगी जांच
निर्वाचन आयोग की डेटा मैपिंग में 19,04,380 मतदाताओं के रिकॉर्ड में विभिन्न प्रकार की विसंगतियां सामने आई हैं । इनमें मुख्य रूप से -
* एक ही व्यक्ति के एक से अधिक रिकॉर्ड ,
* परिवार से जुड़े गलत संबंध ,
* आयु संबंधी असंगति ,
* पुराने रिकॉर्ड से मेल न खाना ,
* डुप्लीकेट प्रविष्टियां ,
* अन्य तकनीकी त्रुटियां शामिल हैं । अब संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद आवश्यक संशोधन किए जाएंगे ।सबसे ज्यादा विसंगतियां देहरादून में , अल्मोड़ा में सबसे कम
निर्वाचन विभाग के अनुसार डेटा मैपिंग में -
* देहरादून – 33 प्रतिशत
* हरिद्वार – 31 प्रतिशत
* नैनीताल – 29 प्रतिशत रिकॉर्ड में सबसे अधिक विसंगतियां मिली हैं । वहीं सबसे कम विसंगतियां चमोली और अल्मोड़ा (करीब 16 प्रतिशत) में दर्ज की गई हैं ।नैनीताल में 1.88 लाख संभावित विसंगतियां चिन्हित
नैनीताल जिले में आधुनिक तकनीक से 1,88,054 संभावित विसंगतियां चिन्हित की गई हैं । जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि सभी मामलों में विधिसम्मत नोटिस जारी किए जाएंगे और दस्तावेजों की जांच के बाद पात्र मतदाताओं के रिकॉर्ड सही किए जाएंगे । यदि किसी मतदाता के नाम, पता, आयु, फोटो या अन्य विवरण में त्रुटि है या किसी पात्र व्यक्ति का नाम सूची में नहीं है तो वह निर्धारित अवधि में दावा-आपत्ति दर्ज करा सकता है ।14 जुलाई से 11 सितंबर तक चलेगा दावा-आपत्ति अभियान
निर्वाचन विभाग के अनुसार -
* 14 जुलाई से 11 सितंबर 2026 तक दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा ।
* 15 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी । मतदाता अपने सुधार के लिए -
* फॉर्म-6 (नया नाम जोड़ने) ,
* फॉर्म-7 (नाम हटाने) ,
* फॉर्म-8 (संशोधन) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं ।विशेष कैंप लगाए जाएंगे
उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे के अनुसार राज्यभर में 70 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) और लगभग 800 सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) तैनात किए गए हैं । दस्तावेजों के सत्यापन और शिकायतों के निस्तारण के लिए तहसील , नगर निकाय , वार्ड स्तर और पंचायत स्तर पर विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे ताकि लोगों को सुविधा मिल सके ।प्रदेश में 86,433 सर्विस वोटर
ड्राफ्ट सूची के अनुसार उत्तराखंड में 86,433 सर्विस वोटर दर्ज किए गए हैं । सबसे अधिक सर्विस वोटर -
* पौड़ी – 14,569
* पिथौरागढ़ – 13,016
* चमोली – 9,736 जबकि सबसे कम हरिद्वार - 2,261 में दर्ज किए गए हैं ।क्या बदलेगा चुनावी समीकरण ?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिन जिलों में मतदाताओं की संख्या में सबसे अधिक कमी आई है , वहां प्रदेश की बड़ी संख्या में विधानसभा सीटें आती हैं । कई सीटों पर पिछले चुनावों में जीत-हार का अंतर कुछ सौ या कुछ हजार वोटों का ही रहा था । ऐसे में अंतिम मतदाता सूची आने के बाद चुनावी रणनीतियों में बदलाव देखने को मिल सकता है । हालांकि भाजपा का कहना है कि केवल अपात्र नाम हटाए जा रहे हैं और इसका चुनावी परिणामों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा । वहीं कांग्रेस ने पूरे मामले की समीक्षा करने और क्षेत्रवार प्रभाव का अध्ययन करने की बात कही है ।मतदाताओं से आयोग की अपील
निर्वाचन आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके नाम , पता , आयु , फोटो या अन्य विवरण में कोई त्रुटि हो अथवा उनका नाम मतदाता सूची में शामिल न हो तो निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित निर्वाचन कार्यालय या विशेष शिविर में पहुंचकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ दावा-आपत्ति अवश्य दर्ज कराएं ।
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