चम्पावत : दुबचौड़ा में उमड़ा आस्था का सैलाब ! चौड़ाख्याली गांव से हनुमान मंदिर तक ढोल-दमाऊं की गूंज के बीच निकला भव्य डोला
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत से दीपक शर्मा व सूरज लडवाल की संयुक्त रिपोर्ट
चम्पावत ( Champawat ) - देवभूमि उत्तराखंड में लोकपर्व हरेला की खुशियां पूरे उत्साह के साथ मनाई जा रही हैं । इसी क्रम में जिले के दुबचौड़ा (लधौली) स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित हरेला महोत्सव एवं पारंपरिक मेले ने पूरे क्षेत्र को भक्ति , संस्कृति और लोक परंपराओं के रंग में रंग दिया । सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब मंदिर परिसर में उमड़ पड़ा और पूरा क्षेत्र जयकारों , ढोल-दमाऊं और लोकगीतों की मधुर धुनों से गूंज उठा ।ख्याली क्षेत्र के गांवों से निकला भव्य डोला , श्रद्धालुओं ने दिखाई अद्भुत आस्था
हरेला पर्व के अवसर पर निकाला गया पारंपरिक डोला ख्याली क्षेत्र के कई गांवों से होकर भव्य शोभायात्रा के रूप में लधौली स्थित हनुमान मंदिर पहुंचा । रास्तेभर श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारे लगाए और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर लोक संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली । डोले के स्वागत के लिए जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धा व्यक्त की ।मुख्य अतिथि मुकेश सिंह महराना की अध्यक्षता में हुआ शुभारंभ
इस वर्ष आयोजित दुबचौड़ा हरेला मेले का शुभारंभ राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त मुकेश सिंह महराना की अध्यक्षता में किया गया । कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक , जनप्रतिनिधि , सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे । सभी ने हरेला पर्व को प्रकृति संरक्षण , हरियाली और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला ।हनुमान मंदिर में उमड़ा जनसैलाब , श्रद्धालुओं ने मांगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
मेले के दौरान हनुमान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी । लोगों ने भगवान हनुमान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि , खुशहाली और क्षेत्र में शांति की कामना की । मंदिर परिसर में मेले का उल्लास , धार्मिक अनुष्ठान और ग्रामीण संस्कृति का संगम देखने लायक रहा ।हरेला सिर्फ पर्व नहीं , प्रकृति संरक्षण का भी संदेश
उत्तराखंड का लोकपर्व हरेला हरियाली , कृषि , पर्यावरण संरक्षण और नई फसल के स्वागत का प्रतीक माना जाता है । यह पर्व लोगों को प्रकृति से जुड़ने और पेड़-पौधों के संरक्षण का संदेश देता है । यही कारण है कि हर साल इस पर्व को पूरे उत्साह , श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है ।क्षेत्रवासियों में दिखा उत्साह , मेले ने संजोई लोक संस्कृति की विरासत
दुबचौड़ा हरेला मेले में बच्चों , युवाओं , महिलाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया । मेले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि उत्तराखंड की लोक परंपराएं आज भी लोगों की आस्था और पहचान का मजबूत आधार हैं । धार्मिक आयोजन के साथ-साथ यह मेला सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती प्रदान करता है ।
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