वीडियो : चम्पावत में नौनिहालों के पोषण पर माफिया का खेल ? आंगनबाड़ी से मुफ्त मिला आहार दुकानों में बिकता मिला
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत ( Champawat ) - सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से नौनिहालों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराकर उनके बेहतर स्वास्थ्य और पोषण की व्यवस्था कर रही है । लेकिन लोहाघाट में इस सरकारी योजना के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं । आरोप है कि कुछ अभिभावक आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों के लिए निशुल्क मिलने वाला पंजरी , खिचड़ी , हलवा मिक्स समेत अन्य पौष्टिक आहार घर ले जाने के बाद उसे दुकानों में बेच रहे हैं । हैरानी की बात यह है कि इन पैकेटों पर स्पष्ट रूप से लिखा होता है - बिक्री के लिए नहीं । इसके बावजूद यदि यह सामग्री बाजार में पहुंच रही है तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर निगरानी तंत्र कहां है ?बच्चों के लिए मिला पोषण पहुंचा दुकानों तक , कैसे ?
जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल के दौरान कुछ दुकानों में ऐसा पौष्टिक आहार सामने आया , जो आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से नौनिहालों के लिए निशुल्क वितरित किया जाता है । वीडियो का लिंक खबर के अंत में दिया गया है । बताया गया कि कुछ अभिभावक आंगनबाड़ी केंद्रों से नियमित रूप से पौष्टिक आहार लेकर आते हैं और बाद में उसे दुकानदारों को बेच देते हैं । अब बड़ा सवाल यह है कि जो खाद्य सामग्री सरकार ने बच्चों के पोषण के लिए भेजी , वह दुकानों तक आखिर पहुंच कैसे रही है ?बच्चे नहीं खाते , इसलिए बेच देते हैं - अभिभावकों का तर्क
पड़ताल के दौरान जब कुछ अभिभावकों से पौष्टिक आहार बेचने को लेकर सवाल किया गया तो उनका कहना था कि उनके बच्चे यह आहार नहीं खाते । इसलिए वे इसे दुकानों में बेचकर पैसे ले लेते हैं या उसके बदले अन्य सामान खरीद लेते हैं । लेकिन सवाल यह है कि बच्चे अगर आहार नहीं खाते तो क्या उसे बाजार में बेच देना सही है ? क्या अभिभावकों को यह जानकारी नहीं दी जाती कि यह सामग्री बच्चों के पोषण के लिए निशुल्क दी जाती है और बिक्री के लिए नहीं है ?दुकानदार भी क्यों खरीद रहे हैं सरकारी पोषण आहार ?
कुछ दुकानदारों ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि कुछ अभिभावक आंगनबाड़ी केंद्रों से पौष्टिक आहार इकट्ठा करके दुकानों में बेचने आते हैं । दुकानदारों के अनुसार यह सिलसिला लंबे समय से चलने की बात कही जा रही है । ऐसे में दूसरा बड़ा सवाल सामने आता है - जब पैकेट पर साफ लिखा है कि सामग्री बिक्री के लिए नहीं है , तो दुकानदार इसे खरीद क्यों रहे हैं ? क्या दुकानदारों को इसकी जानकारी नहीं है या फिर जानबूझकर इस व्यवस्था का फायदा उठाया जा रहा है ? वीडियो का लिंक खबर के अंत में दिया गया है ।एक्सपायरी आहार भी सामने आया , बच्चों की सेहत से खिलवाड़ तो नहीं ?
पड़ताल के दौरान कुछ ऐसी सामग्री भी सामने आने की बात कही गई है , जिसकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी थी । यह मामला और भी गंभीर हो जाता है । आखिर एक्सपायरी खाद्य सामग्री बच्चों तक पहुंचने से पहले ही रोकने की जिम्मेदारी किसकी है ?क्या आंगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित रूप से स्टॉक और एक्सपायरी डेट की जांच होती है ?
क्या वितरण के बाद भी विभाग यह देखता है कि बच्चों को पौष्टिक आहार वास्तव में मिल रहा है या नहीं ?सरकार की योजना पर कौन लगा रहा है पलीता ?
सरकार नौनिहालों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर योजना चला रही है । इसके तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को निशुल्क पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाता है । लेकिन यदि यही सामग्री बच्चों की थाली तक पहुंचने के बजाय दुकानों की अलमारियों तक पहुंच रही है , तो योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है । सरकारी पैसा खर्च हो रहा है , सामग्री बच्चों के नाम पर पहुंच रही है और फिर वही सामग्री बाजार में बिक रही है , तो जवाबदेही किसकी होगी ?अभिभावक ही नहीं , दुकानदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में
इस पूरे मामले में केवल अभिभावकों की भूमिका पर सवाल उठाना पर्याप्त नहीं होगा । यदि दुकानदारों को मालूम है कि यह सामग्री बिक्री के लिए नहीं है , फिर भी वे इसे खरीद रहे हैं तो उनकी भूमिका की भी जांच जरूरी है । क्या विभाग इस मामले में दुकानों की जांच करेगा ? क्या ऐसे पौष्टिक आहार की खरीद-फरोख्त करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी ? क्या यह पता लगाया जाएगा कि कितने आंगनबाड़ी केंद्रों से कितनी सामग्री बाहर जा रही है ? अब विभाग की जांच पर टिकी नजरें
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल बाल विकास विभाग की निगरानी व्यवस्था पर खड़ा होता है । यदि यह गतिविधि वास्तव में लंबे समय से चल रही थी , तो विभागीय स्तर पर इसकी भनक क्यों नहीं लगी ? क्या आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित होने वाले पौष्टिक आहार का रिकॉर्ड और वास्तविक खपत मिलाई जाती है ? क्या अभिभावकों को इस सामग्री के उपयोग और नियमों के बारे में पर्याप्त जानकारी दी जाती है ? और सबसे अहम - क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी ? अब देखना होगा कि बाल विकास विभाग और प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और नौनिहालों के हिस्से के पोषण को बाजार तक पहुंचाने वाले इस कथित खेल पर कब और कैसे रोक लगाई जाती है ।वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर टच करें
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