चम्पावत : बैल ने किसान को सींग से किया लहूलुहान , गुप्तांग में गंभीर चोट ... 3 KM खड़ी चढ़ाई पार कर डोली में सड़क तक पहुंचाया , ग्रामीण बोले - चांद पर पहुंच गया देश , गांव तक सड़क नहीं
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत से सूरज लडवाल की रिपोर्ट
चांद पर पहुंच गए , गांव तक सड़क नहीं ! हादसे के बाद फूटा ग्रामीणों का गुस्सा ।
चम्पावत ( Champawat ) - जिले के विकासखंड पाटी अंतर्गत ग्राम पंचायत गागर के साला रज्युड़ा गांव में रविवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया । यहां , अपने ही बैल को जंगल ले जा रहे 40 वर्षीय कैलाश चंद्र भट्ट पुत्र पूर्णानंद भट्ट पर अचानक बैल ने हमला कर दिया । बैल ने सींग मारकर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया । हादसे में उनके गुप्तांग समेत शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं । घायल की हालत नाजुक बताई जा रही है ।जंगल ले जाते समय अचानक बेकाबू हुआ बैल , सींग से किया हमला
ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक, कैलाश चंद्र भट्ट रविवार सुबह करीब 9 बजे अपने बैल को घर से जंगल की ओर ले जा रहे थे । इसी दौरान रास्ते में अचानक बैल बेकाबू हो गया और उसने कैलाश पर सींग से हमला कर दिया । हमले में कैलाश गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े । बताया जा रहा है कि बैल के सींग से उनके गुप्तांग में गंभीर चोट लगी , जिससे वह बुरी तरह लहूलुहान हो गए । घटना के बाद आसपास मौजूद ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे और घायल को संभाला ।न सड़क… न आसान रास्ता , 3 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई बनी सबसे बड़ी चुनौती
हादसे के बाद घायल कैलाश को अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी परीक्षा बन गया । साला रज्युड़ा गांव तक सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें डोली के सहारे करीब 3 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार कर सड़क मार्ग तक पहुंचाया । गंभीर हालत में घायल व्यक्ति को पहाड़ी के कठिन रास्ते से डोली में लेकर चलना ग्रामीणों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा । ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाई और किसी तरह कैलाश को सड़क तक पहुंचाया , जिसके बाद उन्हें वाहन से उपचार के लिए हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल ले जाया गया ।लोग चांद पर पहुंच गए , हमारे गांव तक सड़क नहीं पहुंची
घटना के बाद ग्रामीणों में सड़क सुविधा को लेकर गहरी नाराजगी और पीड़ा देखने को मिली । ग्रामीणों का कहना है कि आज देश चांद तक पहुंच चुका है , लेकिन साला रज्युड़ा गांव के लोगों के लिए आज भी सड़क एक सपना बनी हुई है । ग्रामीणों के मुताबिक , यदि गांव तक सड़क होती तो गंभीर रूप से घायल कैलाश को अस्पताल पहुंचाने में इतना समय और मेहनत नहीं लगती । घायल को करीब 3 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई डोली के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ा । ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि किसी गंभीर मरीज या घायल की हालत रास्ते में और बिगड़ जाए तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी ?ग्रामीणों का सवाल- आखिर कब खत्म होगा सड़क का इंतजार?
साला रज्युड़ा के ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में गांव के लोगों को आए दिन परेशानी झेलनी पड़ती है । बीमार व्यक्ति हो , गर्भवती महिला हो या फिर कोई दुर्घटना का शिकार , हर आपात स्थिति में ग्रामीणों को इसी तरह डोली और पैदल रास्ते का सहारा लेना पड़ता है । कैलाश चंद्र भट्ट के साथ हुए हादसे ने एक बार फिर गांव की सड़क व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य आपातकालीन पहुंच पर सवाल खड़े कर दिए हैं ।हल्द्वानी में चल रहा उपचार , हालत गंभीर
ग्रामीणों के अनुसार , कैलाश चंद्र भट्ट को गंभीर हालत में हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल ले जाया गया है , जहां उनका उपचार चल रहा है । बताया जा रहा है कि उन्हें गुप्तांग में गंभीर चोट आई है और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है । फिलहाल इस घटना ने जहां परिवार की चिंता बढ़ा दी है , वहीं साला रज्युड़ा की सड़क समस्या एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है । ग्रामीणों की मांग है कि जिम्मेदार विभाग और प्रशासन गांव की सड़क समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए ।
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