पहाड़ की पीड़ : घर लौटते वक्त फिसला पैर और थम गई सांसें , 54 वर्षीय महिला की दर्दनाक मौत
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
पिथौरागढ़ ( Pithoragarh ) - पहाड़ों में रोजमर्रा की जिंदगी कितनी जोखिम भरी है , इसकी एक और दर्दनाक तस्वीर मुनस्यारी से सामने आई है । जंगल से घास काटकर घर लौट रही 54 वर्षीय महिला अचानक सीढ़ियों से गिर गई । हादसे में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई । घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया ।जंगल से घास काटकर घर लौट रही थी महिला
जानकारी के अनुसार , पापड़ी गांव निवासी 54 वर्षीय पार्वती मंगलवार देर शाम मवेशियों के लिए जंगल से घास काटकर घर लौट रही थीं । ग्रामीणों के मुताबिक , घर पहुंचने से कुछ कदम पहले अचानक उनका पैर सीढ़ियों में फिसल गया और वह अनियंत्रित होकर नीचे गिर गईं । हादसे में महिला के सिर समेत शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं । घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और महिला को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की कोशिश शुरू की ।108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया
करीब साढ़े सात बजे 108 आपातकालीन सेवा की एंबुलेंस से महिला को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया । रात करीब एक बजे महिला को मुनस्यारी से लोहाघाट होते हुए चम्पावत की ओर लाया जा रहा था । लेकिन रास्ते में चम्पावत के समीप महिला की तबीयत अचानक और बिगड़ गई । परिजन महिला को चम्पावत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे , जहां चिकित्सकों ने इमरजेंसी में जांच और प्राथमिक उपचार के बाद स्थिति को देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया ।इलाज से पहले ही थम गई जिंदगी
अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने महिला को मृत घोषित कर दिया । अस्पताल प्रशासन के अनुसार , महिला को ब्रॉट डेड अवस्था में अस्पताल लाया गया था । इसके बाद परिजन शव को लेकर गांव लौट गए ।
पहाड़ की खूबसूरती के पीछे कितनी पीड़ ( दर्द ) छिपी है , यह यहां की माताओं-बहनों से बेहतर कौन समझ सकता है । मवेशियों के लिए घास लाने से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक , कठिन पगडंडियां और खड़ी सीढ़ियां उनकी जिंदगी का हिस्सा हैं । कभी यही रास्ते घर पहुंचाते हैं , तो कभी किसी घर का चिराग बुझा देते हैं ।पहाड़ की महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी पर फिर उठे सवाल
यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं , बल्कि पहाड़ी ग्रामीण जीवन की उस हकीकत को भी सामने लाता है , जहां आज भी महिलाएं परिवार और मवेशियों के लिए जंगलों से घास-पत्ती लाने का जोखिम उठाती हैं । दुर्गम रास्ते , खड़ी सीढ़ियां और भारी बोझ कई बार जिंदगी पर भारी पड़ जाते हैं । पहाड़ की महिलाओं के लिए जंगल से चारा लाना रोजमर्रा की मजबूरी है , लेकिन यही काम कई बार जानलेवा साबित हो जाता है । ऐसे हादसे सवाल छोड़ जाते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए सुरक्षित रास्ते , स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाएं और आपातकालीन सेवाओं की पहुंच कितनी मजबूत है । घटना दुखद है , लेकिन इससे सबक लेना भी उतना ही जरूरी है ।
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