दर्दनाक : चम्पावत के पाटी में दर्दनाक अग्निकांड ! गौशाला में जिंदा जल गए 6 बेजुबान , मंजर देख कांप उठे लोग
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
कानीकोट में दर्दनाक अग्निकांड , गौशाला में जिंदा जले 1 बैल , 1 गाय और 4 बकरियां ।
चम्पावत ( Champawat ) - जिले से दर्दनाक खबर सामने आई है । जिले के पाटी विकासखंड की ग्राम पंचायत कानीकोट में देर रात एक गौशाला में भीषण आग लगने से छह मवेशियों की जिंदा जलकर मौत हो गई । घटना के बाद पशुपालक प्रेम सिंह सदमे में हैं । ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है ।आधी रात को गौशाला में लगी आग , मची अफरा-तफरी
ग्राम पंचायत कानीकोट निवासी प्रेम सिंह पुत्र प्रताप सिंह की गौशाला में 22 अगस्त 2026 की रात करीब 2 बजे अचानक आग लग गई । देखते ही देखते आग ने पूरी गौशाला को अपनी चपेट में ले लिया । भीषण आग के बीच गौशाला में बंधे पशुओं को बाहर निकालने का मौका नहीं मिल सका । हादसे में एक बैल , एक गाय और चार बकरियों की जिंदा जलकर मौत हो गई ।मच्छरों को भगाने के लिए जलाई गई थी आग
घटना की सूचना के बाद प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया । पट्टी पटवारी ईश्वरी राम ने बताया कि शाम के समय गौशाला के पास धुएं के जरिए मच्छरों को भगाने के लिए आग जलाई गई थी । बताया गया कि गौशाला घर से काफी दूरी पर स्थित थी । ऐसे में आग फैलने की जानकारी समय रहते नहीं मिल पाई और देखते ही देखते आग ने गौशाला को अपनी चपेट में ले लिया ।छह बेजुबानों की मौत से ग्रामीण प्रेम सिंह व्यथित
इस दर्दनाक हादसे ने ग्रामीण प्रेम सिंह को गहरे सदमे में डाल दिया है । जिन पशुओं को परिवार का हिस्सा माना जाता था , उनकी इस तरह आग में जलकर मौत से ग्रामीण क्षेत्र में भी शोक का माहौल है । हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित पशुपालक को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है , ताकि अग्निकांड से हुए नुकसान की कुछ भरपाई हो सके ।मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता का प्रयास
पट्टी पटवारी ईश्वरी राम ने बताया कि प्रभावित ग्रामीण को मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं । ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है ।सावधानी बरतने की जरूरत
ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छरों को भगाने या अन्य घरेलू कारणों से खुले में आग जलाने के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है । खासकर गौशाला और सूखी घास-पुआल के आसपास आग जलाने से आग तेजी से फैल सकती है । कानीकोट की घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा को लेकर सतर्कता की जरूरत सामने ला दी है ।
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