आस्था : देवीधुरा में 28 अगस्त को गूंजेगा बग्वाल का रणघोष , 23 अगस्त को मंत्री राम सिंह कैड़ा करेंगे ऐतिहासिक मेले का शुभारंभ
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत से सूरज लडवाल की रिपोर्ट
देवीधुरा में सजेगा आस्था और परंपरा का भव्य दरबार , 28 अगस्त को चार खाम-सात थोक के बीच होगी विश्वप्रसिद्ध बग्वाल ।
चम्पावत। उत्तराखंड के चम्पावत जिले में आस्था , संस्कृति और सदियों पुरानी परंपरा का अनूठा संगम एक बार फिर देखने को मिलेगा । विश्वप्रसिद्ध मां बाराही धाम देवीधुरा में असाड़ी कौतिक रक्षाबंधन बग्वाल मेला-2026 का भव्य शुभारंभ 23 अगस्त 2026 से होने जा रहा है । मेले के उद्घाटन कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के शहरी विकास , पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन तथा जलागम प्रबंधन मंत्री राम सिंह कैड़ा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे । हालिया कार्यक्रम संबंधी जानकारी के अनुसार मंत्री राम सिंह कैड़ा 23 अगस्त को सुबह 08:30 बजे नैनीताल जिले के धारी से कार द्वारा प्रस्थान करेंगे और पूर्वाह्न करीब 11:00 बजे देवीधुरा पहुंचेंगे । यहां वे मां बाराही धाम मंदिर परिसर में आयोजित असाड़ी कौतिक बग्वाल मेला-2026 के शुभारंभ समारोह में प्रतिभाग करेंगे ।23 अगस्त से 4 सितंबर तक चलेगा ऐतिहासिक मेला
मां बाराही धाम देवीधुरा में इस वर्ष का बग्वाल मेला 23 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा । मेले का सबसे बड़ा आकर्षण 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन होने वाली विश्वप्रसिद्ध बग्वालहोगी ।चार खाम और सात थोकों की अनूठी परंपरा
देवीधुरा की बग्वाल केवल एक मेला नहीं , बल्कि कुमाऊं की विशिष्ट लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है । बग्वाल में चार खाम ( चम्याल , गहड़वाल , लमगड़िया और वालिग ) के साथ सात थोकों के लोग पारंपरिक रूप से भाग लेते हैं । रक्षाबंधन के दिन मां बाराही के जयकारों के बीच योद्धा पारंपरिक अंदाज में मैदान में उतरते हैं और ऐतिहासिक खोलीखांड़ दुबाचौड़ मैदान में बग्वाल खेली जाती है । यह परंपरा देवीधुरा को देश-दुनिया के अनूठे धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों में अलग पहचान देती है ।पत्थरों की बग्वाल , लेकिन परंपरा में दिखता है आस्था का रंग
देवीधुरा की बग्वाल को अक्सर पाषाण युद्ध के रूप में जाना जाता है , हालांकि अब पत्थरों का प्रयोग कम और फलों का प्रयोग अधिक होने लगा है । परंपरा में प्रतिभागी एक-दूसरे की ओर पत्थर , फल-फूल आदि फेंकते हैं और रिंगाल से बनी ढालों से अपना बचाव करते हैं । बीते वर्षों में बग्वाल में फल-फूलों का प्रयोग भी प्रमुख रूप से देखने को मिला है । लोक मान्यता के अनुसार इस परंपरा का संबंध मां बाराही की आराधना और पुरानी बलि परंपरा से जोड़ा जाता है । हालांकि इसके इतिहास को लेकर अलग-अलग लोकमान्यताएं प्रचलित हैं । सरकारी पर्यटन स्रोत भी बग्वाल को देवीधुरा की विशिष्ट धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा के रूप में दर्ज करता है ।मंत्री कैड़ा के आगमन से उद्घाटन कार्यक्रम पर टिकी निगाहें
23 अगस्त को मंत्री राम सिंह कैड़ा के मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचने से मेले के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह है । देवीधुरा में इस दौरान श्रद्धालुओं , पर्यटकों और स्थानीय लोगों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है । मेले के दौरान प्रशासन की ओर से पेयजल , बिजली , स्वच्छता , स्वास्थ्य , यातायात और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है । हालिया जानकारी के मुताबिक मेले में मेडिकल टीम और एंबुलेंस की व्यवस्था के साथ भीड़ को देखते हुए पुलिस , सीसीटीवी , पार्किंग और यातायात प्रबंधन पर भी फोकस किया जा रहा है ।28 अगस्त को बग्वाल पर रहेगी देश-दुनिया की नजर
23 अगस्त से शुरू होने वाले मेले का रंग जैसे-जैसे चढ़ेगा , वैसे-वैसे देवीधुरा की निगाहें 28 अगस्त पर टिकती जाएंगी । इसी दिन रक्षाबंधन के अवसर पर चार खाम और सात थोकों के बग्वाली वीर ऐतिहासिक मैदान में उतरेंगे । आस्था , रोमांच , लोक संस्कृति और सदियों पुरानी परंपरा का यह संगम एक बार फिर चम्पावत को देश के सांस्कृतिक नक्शे पर खास पहचान दिलाने को तैयार है ।
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