तकलीफ : सड़क का इंतजार करते-करते दुनिया से विदा हुईं चंद्रा देवी , 10 साल बाद भी अधूरा रह गया सड़क सपना
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
बागेश्वर ( Bageshwar ) - जिले की ग्राम पंचायत कर्मी के सापुली तोक में सड़क सुविधा का अभाव ग्रामीणों के लिए लंबे समय से परेशानी का सबब बना हुआ है । इसी बदहाली का दर्द चंद्रा देवी की अंतिम यात्रा के दौरान एक बार फिर सामने आया । लंबी बीमारी के बाद निधन के बाद ग्रामीणों को उनके पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए करीब दो किलोमीटर का पैदल रास्ता तय करना पड़ा । सड़क से सापुली की दूरी करीब दो किलोमीटर , जबकि श्मशान घाट भी सड़क से लगभग एक किलोमीटर दूर है । ऐसे में अंतिम यात्रा के दौरान ग्रामीणों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा ।सड़क का सपना देखा , लेकिन पूरा होते नहीं देख पाईं
चंद्रा देवी आजीवन अविवाहित रहीं और अपने भाइयों के साथ रहती थीं । उनके भतीजे नरेंद्र दानू ने बताया कि चंद्रा देवी गांव तक सड़क पहुंचने का सपना देखा करती थीं । उन्हें उम्मीद थी कि एक दिन गांव सड़क सुविधा से जुड़ जाएगा , लेकिन उनका यह सपना अधूरा ही रह गया । बीमारी के दौरान उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाने में भी ग्रामीणों को काफी परेशानियां उठानी पड़ती थीं । सड़क के अभाव में मरीज को मुख्य सड़क तक पहुंचाना ही ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है ।पैदल रास्ते भी बदहाल , श्रमदान के सहारे ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार सापुली में पैदल आवाजाही के रास्तों की स्थिति भी बेहद खराब है । कुछ समय पहले गांव की महिलाओं और युवाओं ने खुद श्रमदान कर रास्तों की सफाई और मरम्मत की थी । ग्रामीणों का कहना है कि लगातार उपेक्षा के कारण आवागमन के रास्ते भी जोखिम भरे होते जा रहे हैं ।भूस्खलन ने बढ़ाई मुश्किलें , मकानों में आईं दरारें
गांव भूस्खलन की चपेट में भी आ चुका है । कई मकानों में दरारें आने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है । सड़क सुविधा नहीं होने के कारण आपदा या किसी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है ।सड़क के अभाव में बढ़ रहा पलायन , बंद हो चुका जूनियर स्कूल
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा की कमी का असर गांव की आबादी और शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है । आवागमन की समस्या के चलते गांव से पलायन बढ़ रहा है । इसका परिणाम यह है कि गांव का जूनियर स्कूल भी बंद हो चुका है । ग्रामीणों के मुताबिक सड़क सुविधा मिलने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि गांव में बुनियादी सुविधाओं के विकास और पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी ।2016 की मुख्यमंत्री घोषणा , करीब दस साल बाद भी इंतजार
नरेंद्र सिंह के मुताबिक वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री घोषणा के तहत सापुली को सड़क मार्ग से जोड़ने की घोषणा की गई थी । लेकिन करीब दस साल गुजरने के बावजूद सड़क निर्माण का इंतजार खत्म नहीं हुआ है । ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब सड़क निर्माण की घोषणा हो चुकी है तो इसे धरातल पर उतारने में इतनी लंबी देरी क्यों हो रही है ।बीमारी से लेकर रोजमर्रा के काम तक हर कदम पर परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने का असर सिर्फ अंतिम यात्रा तक सीमित नहीं है । रोजमर्रा के जरूरी काम , बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना , बुजुर्गों की आवाजाही और आपातकालीन परिस्थितियों में ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है । बरसात और भूस्खलन के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है ।ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से लगाई सड़क निर्माण की गुहार
सापुली के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से वर्ष 2016 की लंबित सड़क घोषणा को जल्द धरातल पर उतारने की मांग की है । साथ ही गांव के बदहाल पैदल रास्तों की मरम्मत और सुरक्षा के ठोस इंतजाम करने की भी मांग उठाई है । ग्रामीणों का कहना है कि चंद्रा देवी की अंतिम यात्रा ने गांव की वर्षों पुरानी समस्या को एक बार फिर सामने ला दिया है । अब उन्हें आश्वासन नहीं , बल्कि सड़क निर्माण की ठोस कार्रवाई का इंतजार है ।
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