चम्पावत में सियासी संग्राम ! भ्रष्टाचार के आरोप से जाति की राजनीति तक घमासान , CDO के ट्रांसफर ने बढ़ाए सवाल
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत से सूरज लडवाल की रिपोर्ट
चम्पावत ( Champawat ) - जिले में इन दिनों हालात कुछ ऐसे हैं कि एक विवाद थमता नहीं और दूसरा सामने आ जाता है । पाटी विकासखंड में कथित भ्रष्टाचार के आरोप , विधायक का मुख्य विकास अधिकारी के कार्यालय पहुंचना , महिला अधिकारी से बहस , संबंधित जेई का तबादला , प्रधानों के दो गुटों की अलग-अलग तस्वीरें , महिला समूहों का महिला अधिकारी के पक्ष में बात कहना , भाजपा नेताओं के जातिगत आरोप और कांग्रेस विधायक का पलटवार , इन सबके बीच अब मुख्य विकास अधिकारी के दूसरे जिले में तबादले ने पूरे घटनाक्रम को और गरमा दिया है । सवाल यह है कि आखिर पाटी ब्लॉक में ऐसा क्या हुआ कि मामला विकास कार्यों से निकलकर सियासत , अधिकारी-कर्मचारी और जातीय आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया ?विधायक पहुंचे CDO कार्यालय , पाटी ब्लॉक के कथित भ्रष्टाचार पर उठाए सवाल
गुरुवार को लोहाघाट विधायक खुशाल सिंह अधिकारी मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय पहुंचे । विधायक ने पाटी विकासखंड में कथित भ्रष्टाचार को लेकर नाराजगी जताई और मामले की जांच की मांग की । बताया गया कि इस दौरान अधिकारियों की कार्यप्रणाली और जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) द्वारा फोन नहीं उठाए जाने को लेकर भी विधायक ने नाराजगी जताई । मामला यहीं नहीं रुका । बातचीत के दौरान विधायक और एपीडीओ विम्मी जोशी के बीच तीखी बहस होने की बात सामने आई । मौके पर प्रधान संगठन के अध्यक्ष समेत अन्य लोग भी मौजूद बताए गए ।CDO ने कहा - आरोप गंभीर हैं , होगी निष्पक्ष जांच
विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों को मुख्य विकास अधिकारी ने गंभीर माना और मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया । इसके बाद संबंधित जेई के तबादले की कार्रवाई भी सामने आई । यहीं से सवाल और गहरा गया - क्या विधायक की शिकायत के बाद जेई का ट्रांसफर हुआ ? क्या ट्रांसफर सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी या शिकायत का असर ? इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी सार्वजनिक तौर पर सामने आना बाकी है ।फिर CDO का ही ट्रांसफर ! संयोग या सवाल ?
घटनाक्रम ने शनिवार को उस समय नया मोड़ ले लिया , जब मुख्य विकास अधिकारी का दूसरे जिले के लिए तबादला हो गया । अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सवाल उठ रहा है - जिस अधिकारी ने विधायक के आरोपों को गंभीर बताते हुए जांच की बात कही , उसी अधिकारी का तत्काल बाद तबादला क्यों हो गया ? क्या यह महज प्रशासनिक फेरबदल है या पाटी प्रकरण से इसका कोई संबंध है ? हालांकि सीडीओ के ट्रांसफर आदेश में इस फैसले को जनहित और कार्यहित में लिया गया निर्णय बताया गया है ।इधर पाटी के प्रधानों का एक गुट DM के पास पहुंचा
शनिवार को ही पाटी विकासखंड के प्रधानों का एक गुट जिलाधिकारी से मिलने पहुंचा । इस दौरान विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों और संबंधित जेई की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों का जोरदार विरोध किया गया । प्रधानों के इस गुट ने जेई के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर आपत्ति जताते हुए उनकी कार्यप्रणाली का समर्थन किया । यानी एक तरफ विधायक सवाल उठा रहे हैं , तो दूसरी तरफ प्रधानों का एक गुट उन्हीं आरोपों के खिलाफ खड़ा नजर आ रहा है । आखिर सच किसके साथ है ?महिला अधिकारी के समर्थन में उतरीं महिलाएं , विधायक से माफी की मांग
मामले में महिला अधिकारी विम्मी जोशी के साथ कथित अनुचित व्यवहार का मुद्दा भी अब तूल पकड़ चुका है । समूहों की महिलाओं ने विम्मी जोशी के समर्थन में आवाज उठाई और विधायक से माफी मांगने की बात कही । इससे बाद विवाद अब केवल कथित भ्रष्टाचार के आरोपों तक सीमित नहीं रहा , बल्कि महिला अधिकारी के सम्मान और जनप्रतिनिधि-अधिकारी के व्यवहार का मुद्दा भी बन गया है ।भाजपा नेताओं ने उठाया जाति का मुद्दा , सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
घटनाक्रम के बाद भाजपा के कई नेताओं और समर्थकों की सोशल मीडिया पोस्ट सामने आईं । इनमें आरोप लगाया गया कि विधायक ने अनुसूचित जाति के जिला पंचायत राज अधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार किया । इसके साथ यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री के मॉडल जिले चम्पावत में सब कुछ ठीक चल रहा है ।विधायक का पलटवार - हम अधिकारियों को पद से पहचानते हैं , जाति से नहीं
भाजपा नेताओं के आरोपों के बाद विधायक खुशाल सिंह अधिकारी का सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया । वीडियो में विधायक कहते नजर आ रहे हैं कि वे अधिकारियों को उनके पद से पहचानते हैं , जाति से नहीं । उन्होंने भाजपा पर जातिवाद का खेल खेलने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस धर्म और जाति के आधार पर लोगों को बांटने का काम नहीं करती । इस बयान के बाद राजनीतिक वार-पलटवार और तेज हो गया है ।एक तरफ भ्रष्टाचार के आरोप , दूसरी तरफ सब ठीक है का दावा - आखिर सच क्या है ?
पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पाटी विकासखंड में वास्तव में गड़बड़ी है या फिर मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है ? अगर भ्रष्टाचार के आरोप निराधार हैं तो इसकी जांच के बाद स्थिति साफ होनी चाहिए । और अगर आरोपों में दम है तो जांच में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए । क्योंकि जनता का सवाल सीधा है - विकास कार्यों में पारदर्शिता आखिर कहां है ?CDO का ट्रांसफर बना सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा चर्चा मुख्य विकास अधिकारी के तबादले को लेकर है । गुरुवार को विधायक ने CDO कार्यालय में पहुंचकर कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग की । CDO ने आरोपों को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की बात कही । संबंधित जेई के ट्रांसफर की कार्रवाई हुई और फिर CDO का भी दूसरे जिले के लिए तबादला हो गया । ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है - क्या CDO का तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है ? या इसका पाटी प्रकरण से कोई संबंध है ? जिस कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की बात कही गई , उसका आगे क्या होगा ? क्या जेई के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच होगी ? क्या विधायक और महिला अधिकारी के बीच हुए विवाद की भी कोई जांच होगी ? और सबसे बड़ा सवाल - पाटी ब्लॉक में आखिर सच क्या है ?चम्पावत में गरमाया माहौल , अब सबकी नजर जांच पर
फिलहाल चम्पावत का राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल गर्म है । एक तरफ विधायक कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मुखर हैं , दूसरी तरफ प्रधानों का एक गुट विधायक के आरोपों का विरोध कर रहा है । महिला अधिकारी के समर्थन में महिलाएं सामने आई हैं तो भाजपा नेताओं ने जातिगत व्यवहार का आरोप लगाया है । जवाब में विधायक ने भी जाति की राजनीति पर जोरदार पलटवार किया है । इन सबके बीच CDO का तबादला इस पूरे प्रकरण में नया अध्याय जोड़ गया है , हालांकि सीडीओ के ट्रांसफर आदेश में इस फैसले को जनहित और कार्यहित में लिया गया निर्णय बताया गया है । अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पाटी विकासखंड के कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कब और कैसे होती है और जांच में क्या सामने आता है । क्योंकि फिलहाल चम्पावत में सवाल बहुत हैं... लेकिन जवाबों का इंतजार अभी बाकी है और इन सवालों के जवाब तब सामने आ सकते हैं जब बड़ी व निष्पक्ष जांच हो ।
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