शिक्षक कुर्सी से उठे और उसी जगह गिर पड़ा छत का मलबा
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
शिक्षक के उठते ही कुर्सी पर गिरा छत का भारी प्लास्टर , जर्जर भवन पर उठे सवाल ।
अल्मोड़ा ( Almora ) - जिले के राजकीय इंटर कॉलेज लोधिया में बुधवार को उस वक्त बड़ा हादसा टल गया , जब मुख्य भवन के स्टाफ रूम की छत का भारी प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा । गनीमत रही कि कुछ सेकंड पहले ही शिक्षक अपनी कुर्सी से उठकर खिड़की खोलने गए थे । उनके उठते ही उसी स्थान पर छत का मलबा आ गिरा , जहां वह बैठे थे ।शिक्षक उठे और कुर्सी पर आ गिरा मलबा
बताया गया कि शिक्षक स्टाफ रूम में नियमित कामकाज कर रहे थे । इसी दौरान वह खिड़की खोलने के लिए अपनी सीट से उठे । कुछ ही क्षण बाद छत का प्लास्टर टूटकर उनकी कुर्सी पर जा गिरा । घटना के बाद स्टाफ रूम में मौजूद शिक्षक सहम गए । अगर शिक्षक कुछ सेकंड और उसी कुर्सी पर बैठे रहते तो गंभीर हादसा हो सकता था ।48 साल पुराना भवन , सुरक्षा पर बड़ा सवाल
विद्यालय का मुख्य भवन करीब 48 वर्ष पुराना बताया जा रहा है और इसकी हालत जर्जर होने की बात सामने आई है । विद्यालय परिसर में मौजूद अन्य कक्षा-कक्ष और कार्यालयों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई जा रही है । बारिश के मौसम में छत का प्लास्टर गिरना सीधे तौर पर विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है ।नए निर्माण में भी दरारों की शिकायत
चिंता पुराने भवनों तक ही सीमित नहीं है । विद्यालय परिसर में पिछले कुछ वर्षों में हुए कुछ नए निर्माणों में भी दीवारों और फर्श पर दरारें दिखाई देने तथा बारिश में छतों से पानी टपकने की शिकायतें सामने आई हैं । अभिभावकों ने प्रशासन से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने और खामियां मिलने पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है ।डीएम के निरीक्षण के अगले ही दिन गिरा प्लास्टर
खास बात यह है कि जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने बीते दिवस ही जीआईसी लोधिया का स्थलीय निरीक्षण किया था । निरीक्षण के दौरान विद्यालय परिसर की कुछ इमारतों को असुरक्षित पाया गया था । डीएम ने जर्जर भवनों के नियमानुसार ध्वस्तीकरण और नए भवन की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए थे । इसके ठीक बाद छत का प्लास्टर गिरने की घटना ने विद्यालय भवनों की स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ा दी है ।अभिभावकों की मांग - खतरे वाले भवनों से बच्चों को दूर रखें
अभिभावकों का कहना है कि जब तक जर्जर भवनों की मरम्मत , पुनर्निर्माण या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी नहीं होती , तब तक बच्चों और शिक्षकों को असुरक्षित भवनों में बैठाना उचित नहीं है । उन्होंने विद्यालय की सभी इमारतों का तकनीकी सुरक्षा परीक्षण कराने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है ।आज शिक्षक बचे , कल बच्चों की बारी न आए
जीआईसी लोधिया में बुधवार को जनहानि नहीं हुई , यह राहत की बात है । लेकिन शिक्षक के उठने के कुछ ही क्षण बाद उसी कुर्सी पर छत का मलबा गिरना खतरे की गंभीर चेतावनी है । सवाल अब सिर्फ जर्जर भवन का नहीं , बल्कि उस भवन के नीचे पढ़ रहे बच्चों और काम कर रहे शिक्षकों की सुरक्षा का है ।
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