हरतालिका पर सामवेदियों का उपाकर्म , मंत्रोच्चार के बीच धारण किया नया जनेऊ
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
बागेश्वर और चम्पावत में दिखी धार्मिक परंपरा की अनूठी झलक , ऋषि तर्पण के बाद विधि-विधान से हुआ उपाकर्म ।
चम्पावत/बागेश्वर - हरतालिका पर्व के अवसर पर बागेश्वर और चम्पावत में सामवेद का पालन करने वाले लोगों ने परंपरागत उपाकर्म कार्यक्रम विधि-विधान और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न किया । ऋषि तर्पण के बाद हस्त नक्षत्र में मंत्रोच्चार के बीच सामवेदियों ने नया यज्ञोपवीत यानी जनेऊ धारण किया । इसके बाद भगवान की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई ।त्यारकुड़ा में धार्मिक परंपरा के साथ हुआ उपाकर्म
चम्पावत के त्यारकुड़ा में आयोजित उपाकर्म कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामवेदी शामिल हुए । कुलपुरोहित पंडित दीपक कुलेठा और भैरव पांडेय के साथ नंदा बल्लभ तिवारी , कृष्णानंद तिवारी , रमेश तिवारी , हरीश तिवारी , ललित मोहन तिवारी , हार्दिक तिवारी , पीयूष तिवारी , चंद्र बल्लभ तिवारी , बिपिन तिवारी और कमलदीप तिवारी समेत अन्य लोग मौजूद रहे ।तीनों वेदों के अनुसार अलग-अलग होती है उपाकर्म की परंपरा
बागेश्वर में वेदों के जानकार डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी ने बताया कि ऋग्वेद , यजुर्वेद और सामवेद के आधार पर पूजा-पद्धति और कर्मकांड तय होते हैं । उन्होंने बताया कि यजुर्वेदियों का उपाकर्म श्रावण मास की शुक्ल पूर्णिमा को , जबकि ऋग्वेदियों का उपाकर्म श्रावण शुक्ल पक्ष के श्रवण नक्षत्र में संपन्न होता है । वहीं सामवेदी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी हरतालिका पर्व पर जनेऊ धारण करते हैं । हालांकि इस दौरान किए जाने वाले मंत्रोच्चार यजुर्वेद की परंपरा के अनुसार किए जाते हैं ।नया जनेऊ धारण करने के बाद बनाए गए पकवान
सामवेदी पंडित गणेश चंद्र तिवारी ने बताया कि हरतालिका के दिन भी श्रावणी शुक्ल पूर्णिमा की तरह कर्मकांड पूरे किए जाते हैं । मंत्रोच्चार के बीच नया जनेऊ धारण करने के बाद घरों में पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं और परिवार के साथ पर्व मनाया जाता है । बागेश्वर के दफौट क्षेत्र स्थित खोलाखेत भगवती मंदिर में सामवेदियों ने सामूहिक रूप से जनेऊ धारण किया । धार्मिक अनुष्ठान के दौरान मंत्रोच्चार और पूजा-पाठ के बीच उपाकर्म की परंपरा पूरी की गई । इस अवसर पर आनंद तिवारी , दिनेश तिवारी , महेश तिवारी , राजेंद्र तिवारी , जगदीश तिवारी और धीरज तिवारी समेत कई लोग मौजूद रहे । उपाकर्म के समापन पर सामवेदियों ने एक-दूसरे को हरतालिका पर्व की शुभकामनाएं दीं । कार्यक्रम में धार्मिक परंपरा , आस्था और वैदिक संस्कृति की झलक देखने को मिली ।
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