बड़ी खबर : ग्राम प्रधानों ने ठोका ताला ! सरकार को खुली चेतावनी , 10 मांगों पर अब आर-पार
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
10 सूत्रीय मांगों को लेकर बागेश्वर से चम्पावत तक गरजे प्रधान , बोले - मांगें नहीं मानीं तो सामूहिक इस्तीफे की तैयारी ।
चम्पावत/बागेश्वर - ग्राम पंचायतों की समस्याओं और 10 सूत्रीय मांगों के निराकरण को लेकर ग्राम प्रधान संगठन एक बार फिर सरकार के खिलाफ मुखर हो गया है । प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर बुधवार , 16 सितंबर 2026 को बागेश्वर जिले के बागेश्वर , गरुड़ और कपकोट विकासखंड मुख्यालयों के साथ ही चम्पावत जिले के लोहाघाट और पाटी विकासखंड कार्यालयों में ग्राम प्रधानों ने तालाबंदी कर सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया । प्रधानों ने सरकार पर लंबे समय से मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया । आंदोलनकारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि जल्द मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा ।चार महीने से मांगपत्र , फिर भी नहीं निकला समाधान
बागेश्वर ब्लॉक अध्यक्ष नवल किशोर ने कहा कि प्रदेश संगठन पिछले करीब चार माह से लगातार अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर शासन को मांगपत्र सौंप रहा है । हर बार कार्रवाई का आश्वासन मिला , लेकिन प्रमुख मांगों पर अब तक ठोस निर्णय नहीं हो सका है । इससे ग्राम प्रधानों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है । ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष दीपक खेतवाल ने कहा कि ग्राम सभा देश की पहली विकासात्मक इकाई है , लेकिन पंचायतों को लगातार कमजोर और निष्क्रिय किया जा रहा है । प्रधान गांवों के विकास की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, इसके बावजूद उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा । उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो संगठन सामूहिक रूप से त्यागपत्र देने जैसे कड़े कदम उठाने को मजबूर होगा ।लोहाघाट-पाटी में भी ठोका ताला
चम्पावत जिले में भी प्रधान संगठन ने प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर मोर्चा खोल दिया । लोहाघाट और पाटी विकासखंड कार्यालयों में कुछ देर तालाबंदी कर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया गया । लोहाघाट ब्लॉक अध्यक्ष पवन भट्ट और प्रदेश उपाध्यक्ष अमर सिंह कोटियाल के नेतृत्व में ग्राम प्रधानों ने ब्लॉक कार्यालय में तालाबंदी कर धरना-प्रदर्शन किया । इस दौरान प्रधानों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दीं , और कहा कि सरकार उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय ले
प्रधानों ने कहा कि संगठन लंबे समय से 10 सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है । मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा ।मानदेय से लेकर ग्राम प्रधान निधि तक उठीं मांगें
ग्राम प्रधान संगठन की प्रमुख मांगों में प्रधानों को न्यूनतम 20 हजार रुपये मासिक मानदेय देने की मांग शामिल है । इसके साथ ही ग्राम पंचायत वार्ड सदस्यों को खुली बैठक में शिरकत करने पर मानदेय देने की मांग भी उठाई गई । प्रधानों ने मनरेगा में नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या को देखते हुए मजदूरों की उपस्थिति ऑफलाइन दर्ज करने की छूट देने की मांग की है ।कुशल श्रमिकों के लिए 800 रुपये मजदूरी की मांग
संगठन ने श्रमिकों की मजदूरी में बढ़ोतरी की भी मांग रखी है । प्रधानों के अनुसार अकुशल श्रमिकों को न्यूनतम 600 रुपये और कुशल श्रमिकों को 800 रुपये मजदूरी दिए जाने की व्यवस्था होनी चाहिए । इसके अलावा ग्राम पंचायतों को मिलने वाली राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त की धनराशि आबादी एवं भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर बढ़ाने की मांग की गई है ।जिला योजना में ग्राम पंचायत की भूमिका बढ़ाने की मांग
प्रधानों ने मांग की है कि जिला योजना मद में स्वीकृत होने वाले विकास कार्यों के प्रस्तावों को ग्राम पंचायत की खुली बैठक में अनिवार्य रूप से पारित कराया जाए । साथ ही जिला योजना की बैठक में ग्राम प्रधान संगठन को नामित सदस्य के रूप में आमंत्रित करने की मांग भी रखी गई है ।10 लाख तक के काम ग्राम पंचायत को देने की मांग
प्रधानों ने मांग की कि किसी भी विभाग द्वारा स्वीकृत 10 लाख रुपये तक के विकास कार्यों की कार्यदाई संस्था ग्राम पंचायत को ही बनाया जाए , ताकि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिल सके । साथ ही पंचायती राज विभाग के माध्यम से ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा कराने की मांग भी की गई है ।प्रधानमंत्री आवास की सूची को लेकर भी नाराजगी
प्रधान संगठन ने प्रधानमंत्री आवास प्लस सर्वे-2024 से जुड़ी समस्या भी उठाई । संगठन का कहना है कि कई जरूरतमंद ग्रामीणों के नाम सर्वे सूची में होने के बावजूद आवास सॉफ्टवेयर से जेनरेट प्राथमिकता सूची में नाम नहीं आने से लाभार्थियों में रोष है । प्रधानों ने ऐसे पात्र ग्रामीणों के नाम जल्द से जल्द प्रधानमंत्री आवास की प्राथमिकता सूची में शामिल करने की मांग की ।100 रुपये मासिक ग्राम पंचायत टैक्स का भी विरोध
प्रधानों ने 16वें वित्त की नई गाइडलाइन के तहत ग्राम पंचायत टैक्स से संबंधित व्यवस्था में संशोधन की मांग की है । संगठन के अनुसार प्रत्येक परिवार से 100 रुपये मासिक यानी सालाना 1,200 रुपये ग्राम पंचायत टैक्स लेने तथा टैक्स लागू नहीं होने पर ग्राम पंचायत के 16वें वित्त से 20 प्रतिशत राशि काटे जाने के आदेश में संशोधन किया जाना चाहिए । प्रधानों ने ग्राम पंचायतों को टैक्स लागू करने की बाध्यता से मुक्त करने की मांग की है ।तालाबंदी से प्रभावित रहा ब्लॉक कार्यालयों का कामकाज
ग्राम प्रधानों की तालाबंदी और धरना-प्रदर्शन के चलते संबंधित विकासखंड मुख्यालयों में कुछ समय के लिए सरकारी कामकाज प्रभावित रहा । प्रधानों ने कहा कि यह सांकेतिक विरोध है और मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और व्यापक रूप दिया जाएगा ।
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