बड़ी खबर : चम्पावत के इस संरक्षित शिव मंदिर पर मंडराया खतरा ! बिना अनुमति बन रहे दो नए मंदिर , पुरातत्व विभाग ने लगाई रोक
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत से सूरज लडवाल की रिपोर्ट
धर्मशाला , मूर्ति निर्माण और खनन से स्मारक की मौलिकता प्रभावित होने की शिकायत , क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी ने ग्राम प्रधान को भेजा कड़ा पत्र , निर्माण तत्काल रोकने के निर्देश ।
चम्पावत ( Champawat ) - जिले की लोहाघाट तहसील के मजपीपल गांव में स्थित संरक्षणाधीन शिव मंदिर एवं अभिलेखयुक्त नौले से जुड़े मामले में पुरातत्व विभाग ने गंभीर आपत्ति जताई है । विभाग के संज्ञान में आया है कि संरक्षित स्मारक स्थल के परिसर में बिना अनुमति निर्माण कार्य किए जा रहे हैं , जिससे ऐतिहासिक स्मारक की मौलिकता और आसपास का परिदृश्य प्रभावित होने की आशंका है । इस मामले में क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई , अल्मोड़ा ने 05 अक्टूबर 2026 को ग्राम प्रधान मजपीपल को पत्र भेजकर किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं । पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी चम्पावत , उप जिलाधिकारी लोहाघाट और राजस्व उपनिरीक्षक पट्टी मड़लक को भी भेजी गई है ।संरक्षित स्थल पर बन रहे दो नए मंदिर , विभाग ने जताई आपत्ति
धर्मशाला और मूर्ति निर्माण का भी जिक्र
पुरातत्व विभाग के पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि संरक्षणाधीन स्थल पर धर्मशाला , मूर्ति निर्माण समेत अन्य कार्य बिना अनुमति किए जा रहे हैं । विभाग के अनुसार इस तरह के निर्माण से स्मारक की मौलिकता प्रभावित हो रही है । इतना ही नहीं , पत्र में खनन और अन्य नव-निर्माण कार्यों का भी उल्लेख है । विभाग ने आशंका जताई है कि ऐसे कार्यों से न केवल ऐतिहासिक स्मारक की मौलिकता बल्कि उसके आसपास का पूरा परिदृश्य भी प्रभावित हो सकता है ।100 मीटर तक निर्माण पर रोक , 200 मीटर क्षेत्र भी विनियमित
निर्माण से पहले प्रमुख सचिव स्तर से अनुमति जरूरी
पत्र में साफ किया गया है कि संरक्षित स्मारक स्थल के आसपास किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने से पहले सक्षम प्राधिकारी एवं प्रमुख सचिव , संस्कृति विभाग , उत्तराखंड शासन स्तर से अनुमति लिया जाना आवश्यक है । ऐसे में मजपीपल स्थित ऐतिहासिक स्थल पर चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर पुरातत्व विभाग ने ग्राम प्रधान को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं ।तत्काल निर्माण कार्य रोकें , विभाग ने दी सख्त हिदायत
क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई ने मंदिर परिसर में हो रहे निर्माण कार्य को तत्काल रोकने और किसी भी निर्माण के लिए विभागीय सहमति प्राप्त करने को कहा है । साथ ही ग्राम प्रधान से अनुरोध किया गया है कि संरक्षणाधीन स्मारक स्थल को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचाई जाए और भविष्य में भी बिना अनुमति कोई नव-निर्माण न किया जाए । विभाग ने यह भी कहा है कि यदि स्थल पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य होता है तो इसकी सूचना तत्काल क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई के कार्यालय को दी जाए ।ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा पर अब निगाहें
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