• Home
  • देश - दुनियां
  • उत्तराखंड
  • आस्था / आध्यात्म
  • पर्यावरण / प्रकृति
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • ABOUT US
  • CONTACT US
No Result
View All Result

No Result
View All Result
Top Banner Ad
Ad
Ad
Ad
Ad
Ad

Wednesday, 14-October-2026

Home उत्तराखंड

कभी संस्कार , सम्मान और जमीन देखकर बेटी ब्याही जाती थी , आज शहर में मकान देखकर ! क्या सच में तरक्की कर रहे हैं हम ? - Uttarakhand Hindi Samachar

Posted by admin
Posted Date: 2026-10-12 22:04:52
Share Share Share

कभी संस्कार , सम्मान और जमीन देखकर बेटी ब्याही जाती थी , आज शहर में मकान देखकर ! क्या सच में तरक्की कर रहे हैं हम ?


(Report - uttarakhandhindisamachar.com)

विचारोत्तेजक लेख - सूरज लडवाल
जिस गांव की जमीन कभी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करती थी , आज उसी जमीन को छोड़कर शहर के छोटे से मकान में अपना रुतबा तलाश रहे हैं लोग । सवाल यह नहीं कि शहर में घर क्यों हो , सवाल यह है कि घर चुनते वक्त संस्कार , सम्मान और बच्चों के भविष्य से ज्यादा मकान की लोकेशन क्यों महत्वपूर्ण हो गई ?
एक समय था , जब बेटी के माता-पिता उसके लिए ऐसा वर तलाशते थे , जो संस्कारी हो , महिलाओं का सम्मान करता हो , मेहनती हो और जिसके पास गांव में पर्याप्त जमीन हो । उस दौर के माता - पिता की सोच केवल आज तक सीमित नहीं थी । वे बेटी की शादी के साथ - साथ आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी देखते थे । वे सोचते थे कि आज उनकी बेटी जिस घर में जाएगी , कल वहां उसके बच्चे भी बड़े होंगे । उनके खेलने के लिए खुला आंगन होगा , दौड़ने के लिए खेत-खलिहान होंगे और बड़े होने पर अपना घर बनाने के लिए जमीन का एक टुकड़ा भी होगा । परिवार बढ़ेगा , जरूरतें बढ़ेंगी , लेकिन जमीन का सहारा बना रहेगा । उनकी नजर में जमीन केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं थी , बल्कि परिवार की सुरक्षा , आत्मनिर्भरता और आने वाली पीढ़ियों की विरासत थी ।

लेकिन आज तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है

Advertisement
अब कई परिवारों की पहली पसंद ऐसा लड़का हो गया है , जिसके पास गांव में कितनी जमीन है , यह बाद की बात है , शहर में अपना मकान होना चाहिए । मकान छोटा हो , आसपास खुली जगह न हो , बच्चों के खेलने के लिए आंगन न हो , इससे बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता । बस शहर में अपना घर होना चाहिए , ताकि समाज में रुतबा बना रहे और रिश्तेदारों के सामने सिर ऊंचा करके कहा जा सके - हमारा लड़का शहर में सेटल है । लेकिन जरा ठहरिए ! क्या शहर में मकान होना ही सेटल होने की सबसे बड़ी निशानी है ? क्या एक ऐसे घर को सफल जीवन का प्रतीक मान लिया जाए , जहां बच्चों को खेलने के लिए खुली जगह न मिले ? जहां दो कदम चलने के लिए भी सड़क का सहारा लेना पड़े ? जहां घर की चारदीवारी तो हो , लेकिन बच्चों के बचपन के लिए खुला आसमान न हो ? और सबसे बड़ा सवाल - अगर लड़का शहर में मकान का मालिक है , लेकिन उसके व्यवहार में संस्कार नहीं , महिलाओं के प्रति सम्मान नहीं , जिम्मेदारी का भाव नहीं और नशे की आदतों से दूरी नहीं , तो क्या केवल उस मकान की चाबी बेटी के सुखी भविष्य की गारंटी बन सकती है ? मकान की रजिस्ट्री देखकर रिश्ते तय हो सकते हैं , लेकिन सुखी वैवाहिक जीवन की रजिस्ट्री नहीं ?

शहर का मकान बड़ा या इंसान का चरित्र ?

यहां शहर में रहने या मकान खरीदने का विरोध नहीं है । शहर में घर होना अच्छी बात है । रोजगार , शिक्षा , स्वास्थ्य और बेहतर सुविधाओं के लिए शहरों की जरूरत भी है । सवाल उस मानसिकता से है , जो शहर के पते को चरित्र का प्रमाणपत्र और मकान को संस्कारों का विकल्प मान बैठी है । एक ओर ऐसा लड़का है , जिसके पास गांव में पर्याप्त जमीन है , जो मेहनती है , जिम्मेदार है , महिलाओं का सम्मान करता है और अपने परिवार को साथ लेकर चलना जानता है । दूसरी ओर ऐसा लड़का है , जिसके पास शहर में मकान तो है , लेकिन व्यवहार में अहंकार , आदतों में नशा और सोच में महिलाओं के प्रति सम्मान का अभाव है । अब फैसला कीजिए - बेटी के भविष्य के लिए असली संपत्ति किसके पास है ? याद रखिए , जमीन पर बना मकान रहने की जगह दे सकता है , लेकिन घर में रहने वाले इंसान का चरित्र ही उस जगह को परिवार बनाता है । अगर सम्मान नहीं , तो महल भी कैदखाना बन सकता है । अगर प्रेम , सुरक्षा और अपनापन है , तो साधारण-सा घर भी स्वर्ग जैसा महसूस हो सकता है ।

गांव की जमीन छोटी नहीं , सोच छोटी हो गई है

Advertisement
विडंबना देखिए कि जिस गांव की जमीन पर कभी परिवारों की कई पीढ़ियां पली - बढ़ीं , आज उसी जमीन को कई लोग पिछड़ेपन की निशानी समझने लगे हैं । गांव में खेत हों तो लड़का गांव वाला कहलाता है , जबकि शहर में छोटा - सा मकान हो तो उसे आधुनिक और सफल मान लिया जाता है । क्या जमीन का मूल्य केवल इसलिए कम हो जाता है कि वह गांव में है ? क्या शहर में मकान होने मात्र से व्यक्ति की सामाजिक हैसियत बढ़ जाती है ? गांव की जमीन केवल आज की जरूरत पूरी नहीं करती । वह भविष्य के लिए भी संभावनाएं बचाकर रखती है । परिवार बढ़ने पर नया मकान बन सकता है , बच्चों के लिए खुली जगह रह सकती है , खेती या अन्य कामों के अवसर मिल सकते हैं । जमीन जरूरत के समय आर्थिक सहारा भी बन सकती है । वहीं शहर के मकान की उपयोगिता भी कम नहीं है , लेकिन यदि किसी परिवार की पूरी आर्थिक क्षमता एक छोटे से मकान में सिमट जाए , तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जगह और संसाधनों की कमी चुनौती बन सकती है ।

आज के दिखावे की कीमत कहीं अगली पीढ़ी तो नहीं चुकाएगी ?

Advertisement
आज माता-पिता अपने बच्चों के लिए बेहतर भविष्य चाहते हैं । यह स्वाभाविक है । लेकिन बेहतर भविष्य का अर्थ केवल शहर में बस जाना , महंगा मकान खरीद लेना या समाज में अपनी हैसियत दिखाना नहीं है । बेहतर भविष्य का अर्थ है - अच्छी शिक्षा , सुरक्षित वातावरण , सम्मानजनक व्यवहार , आर्थिक स्थिरता , मानसिक सुकून और आगे बढ़ने के अवसर । जरा उस बच्चे की कल्पना कीजिए , जिसके माता - पिता ने समाज में रुतबा दिखाने के लिए शहर में मकान तो खरीद लिया , लेकिन उसके पास खेलने के लिए खुला आंगन नहीं है । उसे हर वक्त यातायात से भरी सड़कों का खतरा है । परिवार पर मकान की किस्तों या खर्चों का दबाव है और भविष्य में उसके लिए अलग घर बनाने की गुंजाइश भी नहीं है । दूसरी तरफ , गांव में रहने वाला परिवार आधुनिक शिक्षा , रोजगार और सुविधाओं से जुड़ते हुए अपनी जमीन और विरासत को भी सुरक्षित रख सकता है । हर शहर का मकान ऐसा नहीं होता और न ही गांव की हर जमीन लाभ की गारंटी है । लेकिन इतना तय है कि भविष्य की योजना बनाते समय केवल आज का रुतबा देखना दूरदर्शिता नहीं , कई बार दिखावे की कीमत पर भविष्य को दांव पर लगाना होता है ।

बेटी कोई सौदा नहीं , जिसके साथ संपत्ति का पैकेज देखकर फैसला हो

इस पूरी बहस में सबसे जरूरी बात यह है कि बेटी की शादी को केवल जमीन , मकान , गाड़ी और कमाई की तुलना तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए । बेटी के लिए वर चुनते समय यह देखना जरूरी है कि वह महिलाओं को किस नजर से देखता है । क्या वह अपनी पत्नी को बराबरी का अधिकार देता है ? क्या वह उसकी भावनाओं , सपनों और निर्णयों का सम्मान करता है ? क्या वह नशे से जुड़ी हानिकारक आदतों से दूर है ? क्या वह कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी उठाने की क्षमता रखता है ? क्योंकि बेटी को केवल रहने के लिए मकान नहीं चाहिए , उसे सम्मान के साथ जीने का अधिकार भी चाहिए । उसे केवल चार दीवारें नहीं चाहिए , उसे ऐसा साथी चाहिए जिसके साथ वह अपने जीवन के फैसले ले सके । उसे केवल संपत्ति नहीं चाहिए , उसे सुरक्षा , विश्वास और बराबरी चाहिए । और हां , जमीन - जायदाद और आर्थिक स्थिरता भी महत्वपूर्ण हैं । लेकिन वे अच्छे चरित्र का विकल्प नहीं हो सकते । जिस रिश्ते में इंसान की कीमत उसकी संपत्ति से तय हो और उसके संस्कारों की कीमत न हो , वहां शादी तो हो सकती है , लेकिन सुखी जीवन की गारंटी नहीं ।

असली अमीर कौन - लाखों का मकान वाला या जमीन का मालिक ?

Advertisement
अमीर होने की परिभाषा भी अब नए सिरे से समझने की जरूरत है । क्या अमीर वह है , जिसके पास शहर में मकान है , लेकिन उसके पास भविष्य के लिए कोई आर्थिक गुंजाइश नहीं ? या वह , जिसके पास जमीन है , मेहनत करने की क्षमता है , परिवार के प्रति जिम्मेदारी है और आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ छोड़ जाने की दूरदृष्टि है ? जमीन का मालिक होना अपने आप में अमीरी की गारंटी तो नहीं है । क्योंकि जमीन बेकार भी पड़ी रह सकती है , और उसकी कीमत समय के साथ बदल भी सकती है । दूसरी ओर , शहर में अपना मकान होना आर्थिक सुरक्षा और स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार हो सकता है । लेकिन जब बात संपत्ति की व्यापक समझ की हो , तो जमीन का महत्व केवल उसकी आज की कीमत में नहीं , बल्कि उसके उपयोग , संभावनाओं और पीढ़ियों तक मिलने वाले लाभ में भी छिपा होता है । इसीलिए गांव की जमीन को केवल इसलिए कमतर नहीं समझना चाहिए कि वह शहर के किसी मकान की तरह चमकती नहीं है । कभी - कभी मिट्टी से जुड़ी संपत्ति , सीमेंट की चमक से कहीं अधिक दूरदर्शी साबित होती है ।

इस सवाल का जवाब हर माता - पिता को खुद से पूछना चाहिए

Advertisement
जब आप अपनी बेटी के लिए वर तलाशें , तो क्या केवल यह पूछेंगे कि लड़के का घर शहर में है या गांव में ? या यह भी पूछेंगे कि वह आपकी बेटी को कितना सम्मान देगा ? क्या यह देखेंगे कि उसके पास कितनी जमीन है ? या यह भी कि उसके पास कितना धैर्य , कितना विवेक और कितनी जिम्मेदारी है ? क्या आप केवल आज के रहन - सहन को देखेंगे ? या आने वाले बीस-पच्चीस वर्षों में अपने नाती-नातिनों के जीवन की संभावनाओं पर भी विचार करेंगे ? क्या आप समाज को रुतबा दिखाने के लिए रिश्ता करेंगे या अपनी बेटी के सुखी जीवन के लिए ? समय बदलना गलत नहीं है । शहरों की ओर बढ़ना गलत नहीं है । आधुनिक सुविधाएं चाहना भी गलत नहीं है । गलत तब होता है , जब आधुनिकता के नाम पर हम उन मूल्यों को पीछे छोड़ देते हैं , जो किसी भी परिवार की असली नींव होते हैं । याद रखिए , शहर का मकान आपकी सामाजिक हैसियत बढ़ा सकता है , जमीन आपकी आर्थिक संभावनाओं को विस्तार दे सकती है , लेकिन संस्कार , सम्मान और जिम्मेदारी ही रिश्तों को मजबूत बनाते हैं । इसलिए बेटी के लिए ऐसा वर चुनिए , जिसके पास भविष्य बनाने की सोच हो , न कि केवल वर्तमान दिखाने का शौक । क्योंकि असली अमीरी यह नहीं कि आपके पास कितना बड़ा मकान है । असली अमीरी यह है कि आपके पास कितनी जमीन , कितने साधन और कितने अवसर होने के बावजूद आप इंसान कितने अच्छे हैं । मकान शहर में हो या गांव में , घर वहीं बसता है जहां सम्मान हो । जमीन कितनी भी हो , विरासत तभी समृद्ध होती है जब अगली पीढ़ी को संपत्ति के साथ संस्कार भी मिलें । दिखावे के लिए शहर का पता मत चुनिए , भविष्य के लिए सही इंसान चुनिए । क्योंकि मकान की कीमत बाजार तय करता है , लेकिन इंसान की कीमत उसके संस्कार तय करते हैं ।


Video:

Ad
Ad

Other Related posts

    चम्पावत : एक क्लिक और बैंक खाता साफ ! देवीधुरा कॉलेज में पुलिस ने छात्रों को किया अलर्ट ,

    बड़ी खबर : गुटखा-पान मसाला खाने वालों की बढ़ी टेंशन ! उत्तराखंड में एक साल तक पाबंदी ,

    तस्करी : पल्सर बाइक पर सवार थे दो लोग , तलाशी में निकली 2 किलो से ज्यादा चरस ,

    चम्पावत : CM धामी ने 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता की मंजूरी , दीपा चौबे और प्रेम चन्द्र के नाम सूची में ,

    दर्दनाक हादसा : नाले में बहे दो दोस्त ! एक की मौत , दूसरा रातभर तड़पता रहा युवक ,

    दर्दनाक : एक छोटी सी चूक और चली गई जान , 300 मीटर गहरी खाई में गिरी महिला ,

    हड़कंप : चम्पावत में महिला ने दो बच्चों के साथ उठाया खौफनाक कदम ! तीनों की हालत बिगड़ी ,

    चम्पावत : रहस्यमयी ढंग से लापता हुई महिला ! साथ में दो बच्चे भी गायब , तलाश में जुटी पाटी पुलिस ,

    21 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत , एक साल पहले हुई थी शादी ,

    पढ़ाई का दबाव कितना भारी ? 18 वर्षीय युवती से जुड़ी घटना ने बढ़ाई चिंता ,

News By Category:


खेल समाचार कृषि , बागवानी और पशुपालन राजनीति
देश - दुनियां तकनीकी समाचार उत्तराखंड
आस्था / आध्यात्म पर्यावरण / प्रकृति क्राइम
पर्यटन
  • Home
  • About
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions

© Uttarakhand Hindi Samachar, All rights reserved. Designed and Developed by LD Bhatt, Whatsapp: +91-9540281104

error: Content is protected !!
X
No Result
View All Result
  • Home
  • देश - दुनियां
  • उत्तराखंड
  • आस्था / आध्यात्म
  • पर्यावरण / प्रकृति
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • ABOUT US
  • CONTACT US

© Uttarakhand Hindi Samachar All rights reserved. Powered by ExtraGo.in