उत्तराखंड हिंदी समाचार की खबर का असर ? चम्पावत में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए वन विभाग ने बताई तैयारी
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत से सूरज लडवाल की रिपोर्ट
चम्पावत में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए वन विभाग अलर्ट ! 64 कैमरा ट्रैप , 3 ड्रोन और रेस्क्यू पिंजरों से होगी निगरानी ।
चम्पावत ( Champawat ) - पर्वतीय जनपद चम्पावत में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है । आबादी वाले क्षेत्रों में खासतौर पर गुलदार , भालू और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही के बीच लोगों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग सतर्कता बरत रहा है । इसी बीच 17 अक्टूबर को उत्तराखंड हिंदी समाचार की ओर से मानव - वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए जरूरी उपकरणों की उपलब्धता और प्रभावी कदम उठाने का मुद्दा उठाए जाने के बाद वन विभाग ने अपनी तैयारियों की जानकारी साझा की है । प्रभागीय वनाधिकारी धिनो पुरुषोत्तमन ने 18 अक्टूबर को बताया कि वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने , आबादी वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए विभाग की ओर से विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं । हालांकि , इन प्रयासों का धरातल पर कितना प्रभाव पड़ता है , यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी ।64 कैमरा ट्रैप और 3 ड्रोन कैमरे रखेंगे वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर
गुलदार से लेकर भालू तक के रेस्क्यू के लिए इतने उपकरण उपलब्ध
जिलाधिकारी ने दिए थे 22.40 लाख रुपये , खरीदे गए रेस्क्यू उपकरण
पिछले वर्ष मानव - वन्यजीव संघर्ष के मामले सामने आने के बाद , मानव - वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए प्रशासन की ओर से भी धनराशि उपलब्ध कराई गई है । प्रभागीय वनाधिकारी के मुताबिक , वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिलाधिकारी चम्पावत की ओर से 22.40 लाख रुपये प्रदान किए गए थे । इस धनराशि से 5 गुलदार रेस्क्यू पिंजरे , 2 बाघ रेस्क्यू पिंजरे , 5 ततैया रेस्क्यू सूट , 1 ट्रेंक्यूलाइजिंग गन , 2 भालू रेस्क्यू पिंजरे और रेस्क्यू किट खरीदे जा चुके हैं ।केवल पिंजरे और कैमरे नहीं , जागरूकता पर भी जोर
गुलदार , सुअर , और भालू के छिपने की जगह बन रहीं झाड़ियां , 191.5 हेक्टेयर में होगा लैंटाना उन्मूलन
वन विभाग ने वन क्षेत्रों और आबादी के आसपास उगी झाड़ियों को भी महत्वपूर्ण मुद्दा माना है । विभाग की ओर से झाड़ी कटान मशीनें खरीदी जा रही हैं । साथ ही इस वर्ष 191.5 हेक्टेयर क्षेत्र में लैंटाना (कालाबासा) उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । घनी झाड़ियों में वन्यजीवों के छिपने की आशंका के मद्देनजर उनकी सफाई जरूरी है । हालांकि , लैंटाना या अन्य झाड़ियों को हटाने का काम सावधानीपूर्वक और संबंधित विभाग के मार्गदर्शन में किया जाना चाहिए । ग्रामीणों को घनी झाड़ियों में स्वयं प्रवेश कर जोखिम उठाने के बजाय वन विभाग को सूचना देनी चाहिए ।वन विभाग की जनता से अपील - घर के आसपास रखें रोशनी , बच्चों और बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें
क्या सर्दियों में मानव - वन्यजीव संघर्ष पर लगेगा अंकुश ?
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