आस्था : ढोल - नगाड़े , देव डांगरों की बारात और बाबा के जयकारे... ऐसा होता है फटकशिला का दशहरा
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत से सूरज लडवाल की रिपोर्ट
हजारों लोगों की आस्था का केंद्र फटकशिला मंदिर , फिर भी सड़क पर डामरीकरण का इंतजार ।
चम्पावत ( Champawat ) - उत्तराखंड की देवभूमि में लोक आस्था और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं का अनूठा संगम देखने को मिलता है । पाटी विकासखंड के धूनाघाट के निकट स्थित फटकशिला मंदिर में बरसों से दशहरे के पावन अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है । जहां देशभर में दशहरे को भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है , वहीं फटकशिला में आसपास के गांवों के श्रद्धालु अपने आराध्य फटकशिला बाबा की आराधना कर सुख - समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना करते हैं ।दशहरे पर फटकशिला बाबा के दरबार में उमड़ती है आस्था
विश्व कल्याण की कामना के साथ होगी पूजा - अर्चना
मेले में खरीदारी का आनंद उठाते हैं स्थानीय लोग
हजारों श्रद्धालुओं की आस्था , लेकिन सड़क पर डामरीकरण का इंतजार
फटकशिला मंदिर में गहरी धार्मिक आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के बावजूद मंदिर तक पहुंचने वाले सड़क मार्ग पर डामरीकरण न हो पाना चिंता का विषय है । धार्मिक महत्व के इस स्थल तक आवागमन को सुविधाजनक बनाने के लिए सड़क की स्थिति में सुधार करना जरूरी है । सवाल यह है कि जब फटकशिला मंदिर हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है , तो यहां तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क सुविधा कब उपलब्ध होगी ? धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही के बीच बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए ।मानसखंड माला से जुड़े फटकशिला मंदिर , मिले पर्यटन को बढ़ावा
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