पीड़ा : दिल्ली में विधायक बना पहाड़ का लाल , लेकिन पैतृक गांव आज भी सड़क को मोहताज ! 2 किलोमीटर सड़क के लिए मुख्यमंत्री धामी से लगाई गुहार - Uttarakhand Hindi Samachar
पीड़ा : दिल्ली में विधायक बना पहाड़ का लाल , लेकिन पैतृक गांव आज भी सड़क को मोहताज ! 2 किलोमीटर सड़क के लिए मुख्यमंत्री धामी से लगाई गुहार
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
अल्मोड़ा ( Almora ) - पहाड़ के गांवों की बदहाली और विकास के दावों के बीच अल्मोड़ा जिले का दाड़िमी गांव आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का इंतजार कर रहा है । विडंबना देखिए कि इसी गांव से निकलकर रविंदर सिंह नेगी दिल्ली की पटपड़गंज विधानसभा से भाजपा विधायक बन चुके हैं , लेकिन उनके पैतृक गांव तक आज भी सड़क नहीं पहुंच पाई है ।
अपने गांव की सड़क के लिए दिल्ली के विधायक ने लिखा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को पत्र
अपने पैतृक गांव की इस पीड़ा को लेकर रविंदर सिंह नेगी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर सड़क निर्माण की मांग उठाई है । उन्होंने विकासखंड लमगड़ा , तहसील जैंती की ग्राम पंचायत दाड़िमी के तोक सीमखान से नौगांव तक करीब 2 किलोमीटर सड़क के नवनिर्माण को ग्रामीणों की बुनियादी जरूरत बताया है । उन्होंने पत्र में कहा कि सड़क बनने से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का यह गांव सड़क मार्ग से जुड़ सकेगा और उनका पैतृक घर भी सड़क सुविधा से लाभान्वित होगा ।
विधायक मोहन सिंह भी उठा चुके हैं मांग , फिर भी नहीं बनी सड़क
हैरानी की बात यह है कि जागेश्वर विधानसभा के विधायक मोहन सिंह भी इस सड़क के निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं । इसके बावजूद गांव तक सड़क पहुंचने का इंतजार खत्म नहीं हुआ है । आज भी ग्रामीणों के लिए महज दो किलोमीटर सड़क एक सपना बनी हुई है ।
आजादी की लड़ाई में योगदान , आज सड़क के लिए संघर्ष
दाड़िमी गांव की कहानी सिर्फ सड़क की मांग तक सीमित नहीं है । यह उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की विरासत से भी जुड़ी है , जिन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया और बेहतर भविष्य का सपना देखा । आज उन्हीं सेनानियों के आश्रितों को अपने गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है । यह सवाल भी खड़ा होता है कि जिन पूर्वजों ने देश की आजादी के लिए अपना योगदान दिया , क्या उनके आश्रितों को आजादी के दशकों बाद भी दो किलोमीटर सड़क के लिए इंतजार करना पड़ेगा ?
दिल्ली तक पहुंचा पहाड़ का लाल , गांव तक क्यों नहीं पहुंचा विकास ?
रविंदर सिंह नेगी दिल्ली में विधायक बनकर अपनी पहचान बना चुके हैं , लेकिन उनके पैतृक गांव की सड़क की मांग अब भी मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंची है । ऐसे में सवाल सिर्फ दाड़िमी गांव का नहीं , बल्कि उत्तराखंड के उन तमाम गांवों का है , जहां आज भी बुनियादी सुविधाएं सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच फंसी हुई हैं । अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मांग पर कब तक निर्णय लेते हैं और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की विरासत से जुड़े दाड़िमी गांव को आखिर कब सड़क की सौगात मिलती है ।
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