दर्दनाक : चम्पावत में दिवाली से पहले मातम ! दो बहनों के इकलौता भाई को छीन ले गया गुलदार
(Report - uttarakhandhindisamachar.com)
चम्पावत से सूरज लडवाल की रिपोर्ट
दिवाली से पहले गुलदार का खूनी हमला ! घर से महज 30 मीटर दूर 13 वर्षीय हिमांशु को बनाया निवाला , परिवार का इकलौता चिराग बुझा ।
चम्पावत ( Champawat ) - जिले में मानव - वन्यजीव संघर्ष की एक और बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है । दिवाली से ठीक पहले लोहाघाट के सुई डूंगरी गांव में गुलदार ने 13 वर्षीय मासूम बच्चे पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया । गुलदार बच्चे को घर के नजदीक से ही उठाकर ले गया । करीब तीन घंटे तक चली तलाश के बाद बच्चे का क्षत - विक्षत शव घर से महज 30 मीटर नीचे खेतों में बरामद हुआ । घटना के बाद पूरे गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है ।रायकोट मेला देखकर लौट रहा था हिमांशु , घर से चंद कदम पहले घात लगाए बैठा था गुलदार
ग्रामीणों के मुताबिक , बुधवार शाम करीब 6:30 बजे सुई डूंगरी निवासी 13 वर्षीय हिमांशु पुजारी पुत्र गंगादत्त पुजारी रायकोट मेला देखकर घर लौट रहा था । इसी दौरान घर से लगभग 30 मीटर की दूरी पर घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक उस पर हमला कर दिया और उसे उठाकर ले गया । जब हिमांशु काफी देर तक घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने ग्रामीणों के साथ उसकी तलाश शुरू की । काफी खोजबीन के बाद रात करीब 9:30 बजे हिमांशु का शव घर से लगभग 30 मीटर नीचे खेतों में मिला । आनन - फानन में ग्रामीण उसे लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे , जहां चिकित्सक डॉ. मानसी ने उसे मृत घोषित कर दिया । ग्रामीणों के अनुसार , गुलदार ने बच्चे के पेट और जांघों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था ।दो बहनों का इकलौता भाई था हिमांशु , परिवार का बुझ गया घर का चिराग
इस हृदयविदारक घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है । हिमांशु दो बहनों का इकलौता भाई था और कक्षा सात में पढ़ता था । जिस घर में दिवाली की खुशियों की तैयारियां होनी थीं , वहां अब मातम पसरा है । इकलौते बेटे को खोने के बाद माता - पिता का रो - रोकर बुरा हाल है और दोनों बेसुध पड़े हैं । ग्रामीणों ने बताया कि हिमांशु बुधवार को ट्यूशन जाने के बजाय घर से नाराज होकर रायकोट मेला देखने चला गया था । मेला देखकर वह खुशी - खुशी घर लौट रहा था , लेकिन घर पहुंचने से पहले ही गुलदार ने उसे अपना शिकार बना लिया ।ग्रामीणों का वन विभाग पर फूटा गुस्सा , बोले - पहले दी थी सूचना , फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश देखने को मिला । ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से गुलदार गांव के आसपास लगातार दिखाई दे रहा था । इसकी सूचना वन विभाग को भी दी गई थी और गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की गई थी , लेकिन विभाग ने समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की । ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पिंजरा लगाया गया होता और क्षेत्र में गश्त बढ़ाई गई होती तो शायद आज एक परिवार का इकलौता बेटा जिंदा होता । अस्पताल पहुंचे वन कर्मियों को भी ग्रामीणों के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा । आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से गुलदार को आदमखोर घोषित कर उसे मारने की मांग की है । उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द गुलदार को पकड़ने या मारने की प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वह भविष्य में किसी और बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है ।अस्पताल पहुंचे डीएम मनीष कुमार , तत्काल पिंजरे लगाने और गश्त के निर्देश
घटना की सूचना मिलने पर सामाजिक कार्यकर्ता सचिन जोशी ने जिलाधिकारी मनीष कुमार , वन विभाग और लोहाघाट प्रशासन को मामले से अवगत कराया । उन्होंने गुलदार को पकड़ने के लिए तत्काल कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की । सूचना मिलते ही जिलाधिकारी मनीष कुमार अस्पताल पहुंचे और घटना की जानकारी ली । इसके बाद वह ग्रामीणों के साथ तत्काल घटनास्थल की ओर रवाना हुए । जिलाधिकारी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए वन विभाग को तत्काल क्षेत्र में पिंजरे लगाने और नियमित गश्त सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए । इस दौरान ग्रामीणों ने डीएम को सड़क बंद होने की समस्या से भी अवगत कराया । जिलाधिकारी ने सड़क खोलने का आश्वासन दिया । उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुखद घटना है । पीड़ित परिवार की हरसंभव मदद की जाएगी तथा नियमानुसार मुआवजा देने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है ।जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी ने जताया दुख
सूचना मिलने पर जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी भी लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय पहुंचे और घटना की जानकारी ली । उन्होंने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया । उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो , इसके लिए वन विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं । वहीं , सीएमओ चम्पावत डॉ. देवेश चौहान ने बताया कि बच्चे को अस्पताल पहुंचाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी । उन्होंने बताया कि अग्रिम कार्रवाई की जा रही है । सूचना मिलते ही लोहाघाट के रेंजर रमेश चंद्र जोशी और पुलिस टीम फौरन अस्पताल पहुंची ।कुछ दिन पहले ही , उत्तराखंड हिंदी समाचार ने जताई थी मानव - वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका
गौरतलब है कि उत्तराखंड हिंदी समाचार ने कुछ दिन पहले ही खबर प्रकाशित कर सर्दियों के मौसम में चम्पावत जिले में मानव - वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने की आशंका जताई थी । समाचार पोर्टल ने वन विभाग को अलर्ट रहने , संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया था । अब इस चेतावनी के कुछ ही दिनों बाद सुई डूंगरी गांव में हुई यह दर्दनाक घटना कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है । चम्पावत जिले में मानव - वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए केवल घटना के बाद पिंजरे लगाने और गश्त बढ़ाने तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं होगा । वन विभाग को संवेदनशील गांवों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने , ग्रामीणों को सतर्क करने , गुलदार की गतिविधियों पर नियमित निगरानी रखने और समय रहते प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है । दिवाली से ठीक पहले एक मासूम की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है । अब जरूरत है कि इस दर्दनाक घटना से सबक लेते हुए वन विभाग और प्रशासन मानव - वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाएं , ताकि किसी दूसरे परिवार को इस तरह अपना चिराग न खोना पड़े ।
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