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Thursday, 20-August-2026

Home आस्था / आध्यात्म

10 मिनट चली लेकिन कई सवाल छोड़ गई विश्व प्रसिद्ध बग्वाल - Uttarakhand Hindi Samachar

Posted by admin
Posted Date: 2024-08-19 16:25:13
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10 मिनट चली लेकिन कई सवाल छोड़ गई विश्व प्रसिद्ध बग्वाल


(Report - uttarakhandhindisamachar.com)

कुमाऊं - के चम्पावत जिला अंतर्गत माँ वाराही धाम देवीधुरा में भाई - बहन के अटूट प्रेम के रिश्तों का प्रतीक रक्षाबंधन धूमधाम से मनाया गया । यहाँ सदियों से चली आ रही पौराणिक बग्वाल का भव्य आयोजन हुआ । इस बग्वाल को देखने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी पहुंचे । सुबह से माँ के धाम में श्रद्धालुओं का तांता उमड़ चुका था । सुबह से ही मंत्रोच्चार से मंदिर परिसर व मेला क्षेत्र गुंजायमान हो चुका था । जिसके बाद खोलीखांड दुबाचौड़ के पावन मैदान में एक के बाद एक खामों का आना शुरू हुआ । ढोल - नंगाड़ो की धुन , माँ वाराही के जयकारे और लगातार चल रहे मंत्रोच्चार ने पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा । थोड़ी देर बाद चारों खाम के सैंकड़ों लोग खोलीखांड दुबाचौड़ के मैदान में माँ वाराही के जयकारों के साथ पहुंच चुके थे । परिक्रमा चल ही रही थी औऱ तीन खामों ने परिक्रमा पूरी कर ली लेकिन चौथी खाम गहड़वाल खाम की परिक्रमा पूरी होने से पहले की बग्वाल शुरू कर दी गई । ये पहली मर्तबा हुआ कि जब बग्वाल में एक खाम के कुछ ही लोग शामिल रहे । बग्वाल में रणबांकुरों में उत्साह , विश्वास औऱ आस्था साफतौर पर देखी जा सकती थी । खोलीखांड के मैदान के चारों ओर फलों के बोरे भरे हुए थे । औऱ फिर वो घड़ी आ गई जिसका हजारों लोग घंटों से इंतजार कर रहे थे । खोलीखांड दुबाचौड़ के मैदान में फलों से बग्वाल शुरू हुई औऱ लोग एक दूसरे पर फल वर्षा करने लगे लेकिन बीच - बीच में तमाम पत्थर भी चले । यहाँ फलों के साथ पत्थर भी खूब बरसाए गए । लाउडस्पीकर से लगातार चल रहे मंत्रोच्चार और मैदान पर ढोल - नगाड़ों की धुन औऱ माँ वाराही के जयकारों के साथ ये पत्थर युद्ध करीब 10 मिनट तक चला , यानी लोग एक दूसरे पर करीब 10 मिनट तक फल और पत्थर मारते रहे । करीब 10 मिनट के बाद शंखनाद के साथ बग्वाल का समापन हुआ । पत्थर युध्द के बाद चारों खामों के बग्वाली वीरों ने एक दूसरे को गले लगाया औऱ बग्वाल समापन की बधाई दी । इस पत्थर युद्ध में दर्जनों की संख्या में रणबांकुरे चोटिल हुए हैं । बग्वाली वीरों के साथ - साथ कई दर्शक भी चोटिल हुए हैं ।

एक व्यक्ति के शरीर के बराबर रक्त बहता है बग्वाल में -

मान्यता है कि बग्वाल तब तक नहीं रुकती है जब तक इस पत्थर युद्ध में एक व्यक्ति के शरीर जितना रक्त न बह जाए । कुल मिलाकर कहा जाय तो बग्वाल में रणबांकुरे एक व्यक्ति के शरीर जितना रक्त यानी 5 - 6 लीटर खून खोलीखांड दुबाचौड़ के मैदान में माँ वाराही के गणों को प्रसन्न करने के लिए समर्पित करते हैं ।

करीब 60 हजार से अधिक लोग बने बग्वाल के साक्षी -

माँ वाराही धाम देवीधुरा की ख्याति इतनी है कि यहाँ पत्थर युद्ध को देखने पूरे भारतवर्ष से लोग पहुंचे हुए थे । माँ की महिमा , भक्तों की आस्था और यहाँ की पवित्रता की बदौलत एक अनुमान के मुताबिक करीब 60 हजार लोग बग्वाल के साक्षी बने । बाहरी राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने देखा कि आंखिर सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन आज के आधुनिक युग में कैसे किया जाता है । बाहरी राज्यों से आए लोगों ने माना कि परमाणु युग में भी आज पत्थर युद्ध की न सिर्फ बात होती है बल्कि माँ के पावन प्रांगण में इसे हर्षोल्लास के साथ मनाया भी जाता है ।

गहड़वाल खाम के लोग परिक्रमा करते रह गए और बग्वाल शुरू हो गई -

पहली मर्तबा ऐसा हुआ कि परिक्रमा पूरी नहीं हुई थी और बग्वाल शुरू हो गई । बग्वाल में गहड़वाल खाम परिक्रमा कर रही थी और फिर परिक्रमा के बाद उसे पत्थर युद्ध के दूसरे छोर पर पहुंचना था । लेकिन परिक्रमा करते पूरी होने से पहले ही बग्वाल शुरू हो जाना अब कई सवाल खड़े कर रहा है । आंखिर ये अव्यवस्था कैसे हुई और आंखिर कैसे खाम की परिक्रमा पूरी होने से पहले बग्वाल शुरू हुई , इस पर चिंतन करना बेहद आवश्यक हो गया है ।

जानिए क्या कहा बग्वाली वीरों ने -

बग्वाली वीरों ने इतिहास में पहली बार कहा कि , उन्होंने बग्वाल नहीं खेली । गहड़वाल खाम के लोगों ने नाराजगी जताते हुए अब कई सवाल उठाए हैं । लेकिन असल वजहों का पता लगाने की कोशिस हो रही है । बग्वाल चम्पावत जिले ही नहीं बल्कि समूचे उत्तराखंड की पहचान है । ये वो स्थान है जहाँ आने मात्र से ही आपको मन की शांति और तन की स्फूर्ति मिलती है ।

इस बार बग्वाल के दर्शन नहीं कर पाए तो -

आप अगले वर्ष रक्षाबंधन के दिन जरूर आइए और माँ वाराही के पावन खोलीखांड - दुबाचौड़ के मैदान में बग्वाल के दर्शन जरूर कीजिए ।


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